प्र1.
पठार वह स्थल रूप है, जो अपने चारों ओर की भूमि से ऊँचा होता है तथा इसकी सतह प्राय: समतल होती है। इसके कुछ किनारे प्राय: खड़ी ढाल वाले होते हैं।
उत्तर
इस परिभाषा को समझिए: पठार को कभी-कभी ‘मेजनुमा भूमि’ भी कहा जाता है और यह नाम ही उसका आकार बता देता है — मेज़ की तरह वह ऊँचा उठा हुआ होता है और उसका ऊपरी भाग समतल होता है।
| स्थल रूप | ऊँचाई | ऊपरी सतह | किनारे |
|---|---|---|---|
| मैदान | नीचा | समतल | कोई स्पष्ट किनारा नहीं |
| पठार | आस-पास की भूमि से ऊँचा | प्राय: समतल | प्राय: खड़ी ढाल |
| पर्वत | बहुत ऊँचा | नुकीला, समतल नहीं | सभी ओर से खड़ी ढाल |
इसी अध्याय से भारतीय उदाहरण: पश्चिमी और पूर्वी घाट के बीच स्थित दक्कन का पठार, मध्य तथा दक्षिण भारत का संपूर्ण त्रिकोणीय प्रायद्वीपीय पठार, और गारो, खासी तथा जयंतिया पहाड़ियों को धारण करने वाला मेघालय पठार।
खड़ी ढाल का महत्व: जब कोई नदी समतल ऊपरी सतह पर बहती हुई खड़ी ढाल तक पहुँचती है, तो वह नीचे गिरती है — इसीलिए पठारों पर इतने जलप्रपात हैं, जैसे चित्र 1.1 का जोग जलप्रपात। इसी गिरते जल को जलविद्युत में बदला जाता है।