अन्वेषण अध्याय 1 महत्वपूर्ण प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारत की कुछ प्रमुख भौगोलिक विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवाँ बड़ा देश है और एशिया महाद्वीप का भाग है। सामान्यत: भारत को पाँच प्रमुख भागों में विभाजित किया जाता है और इनमें से प्रत्येक अपने आप में एक प्रमुख भौगोलिक विशेषता है।

विशेषतास्थितिस्वरूप
हिमालय पर्वत श्रृंखलाउत्तरी सीमालगभग 2500 कि.मी. लंबी प्राकृतिक प्राचीर; 8000 मीटर से ऊँची अनेक चोटियाँ; तीन श्रेणियाँ — हिमाद्रि, हिमाचल और शिवालिक। इन्हीं के बीच शीत मरुस्थल लद्दाख है।
गंगा के मैदान (उत्तरी मैदान)हिमालय के दक्षिण मेंसमतल और अत्यंत उपजाऊ; सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों से सिंचित। भारत की जनसंख्या का बड़ा भाग यहीं रहता है।
थार मरुस्थलउत्तर-पश्चिमराजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा में फैला विशाल शुष्क क्षेत्र। इसकी पूर्वी सीमा पर प्राचीन अरावली पहाड़ियाँ हैं।
प्रायद्वीपीय पठारदेश का मध्य और दक्षिण भागत्रिकोणीय प्राचीन भूभाग, जिसके दोनों ओर पश्चिमी घाट और पूर्वी घाट तथा बीच में दक्कन का पठार है।
तटरेखाएँ और द्वीपसमूहदक्षिण में चारों ओर7500 कि.मी. से भी लंबी तटरेखा, डेल्टा और लैगून; अरब सागर में लक्षद्वीप तथा बंगाल की खाड़ी में अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह

इनके साथ तीन जलराशियाँ भी हैं — पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी और दक्षिण में हिंद महासागर। सुदूर पूर्वोत्तर में मेघालय पठार की गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ हैं, जो विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में से एक हैं।

ऐसा क्यों: ये विशेषताएँ संयोग नहीं हैं। हिमालय और मैदान — दोनों इसलिए हैं कि भारतीय भूभाग उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशिया से टकराया; प्रायद्वीप उसी भूभाग की बहुत पुरानी चट्टानी संरचना है; और तट तथा द्वीप वहाँ हैं जहाँ यह भूभाग महासागर से मिलता है।
प्र2.
भारत की भौगोलिक विविधताएँ हमारे जीवन को किस प्रकार प्रभावित करती हैं?
उत्तर

ये लगभग सब कुछ तय करती हैं — लोग क्या उगाते और खाते हैं, कैसे घर बनाते हैं, क्या काम करते हैं, कैसे यात्रा करते हैं और कौन-से त्योहार मनाते हैं।

क्षेत्रवहाँ के जीवन पर प्रभाव
हिमालयऊँचाई पर बस्तियाँ बहुत कम; याक से दूध, मांस, ऊन, गोबर और परिवहन; पत्थर तथा लकड़ी से बने काठ-कुनी घर जो गर्म रहते हैं और हल्के भूकंप सह लेते हैं; मठ और मंदिर तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं; पर्वतीय पर्यटन।
गंगा के मैदानसमतल, उपजाऊ और जल से भरपूर — इसलिए सघन कृषि, बहुफसलीय खेती, अधिक जनसंख्या, बड़े नगर तथा विस्तृत सड़क और रेल तंत्र। नदियाँ सहस्राब्दियों से यात्रा और व्यापार का मार्ग रही हैं।
थार मरुस्थलजल का अभाव — इसलिए बर्तन रेत से रगड़कर साफ किए जाते हैं, धोने का जल पुनः उपयोग होता है और टांका तथा कुंड वर्षा जल संचित करते हैं। खान-पान, वेशभूषा और दिनचर्या दिन की गर्मी तथा रात की ठंड के अनुकूल हैं; ऊँट यात्रा और व्यापार का आधार है।
प्रायद्वीपीय पठारखनिज, वन और उपजाऊ भूमि — खनन, उद्योग और कृषि। जलप्रपातों से जलविद्युत और सिंचाई। संथाल, गोंड, बैगा, भील और कोरकु जैसे आदिवासी समुदाय प्रकृति से घनिष्ठ रूप से जुड़े जीवन जीते हैं।
तट और द्वीपमत्स्यन, पत्तन और समुद्री व्यापार; डेल्टा भारत की सर्वाधिक उपजाऊ भूमि देते हैं; पश्चिमी तट पर स्थित मुंबई भारत का वित्तीय केंद्र है।

यह विविधता भारत को सुदृढ़ भी बनाती है। यदि किसी एक क्षेत्र में मौसम खराब हो, तो दूसरे क्षेत्र से अन्न, खनिज और रोज़गार मिलते रहते हैं।

क्या आप जानते हैं? इसी विविधता के कारण भारत में भोजन, भाषाओं, गृह-शैलियों, नृत्यों और त्योहारों की इतनी विशाल विविधता है — लद्दाख के लोसर और हेमिस महोत्सव, थार की सीमा पर पुष्कर मेला तथा खासी लोगों का शाद सुक मिनसिएम, ये तीनों इसी अध्याय से हैं।
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