कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
मानचित्र पर हिमालय पर्वत श्रृंखला की लंबाई को देखिए। यह एक विशाल प्राकृतिक प्राचीर के समान प्रतीत होती है। क्या आप मानचित्र की संकेत-सूची के माध्यम से हिमालय के विभिन्न स्थानों की ऊँचाई का अनुमान लगा सकते हैं?
कर्क रेखा (23½° N)उगारो पहाड़ियाँखासी पहाड़ियाँजयंतिया पहाड़ियाँके2कंचनजंगामाउंट आबूअनाईमुडीहि मा ल यलद्दाखथार मरुस्थलउत्तरी मैदानअरावली पहाड़ियाँविंध्य पर्वतसतपुड़ा पर्वतपश्चिमी घाटपूर्वी घाटदक्कन का पठारछोटा नागपुरपठारकच्छ का रणपश्चिमी तटीय मैदानपूर्वी तटीय मैदानसुंदरवनअरब सागरबंगाल की खाड़ीहिंद महासागरपाकिस्तानअफ़ग़ानिस्तानचीननेपालभूटानबांग्लादेशम्यांमारश्रीलंकासिंधुसतलुजगंगायमुनाचंबलब्रह्मपुत्रनर्मदाताप्तीमहानदीगोदावरीकृष्णाकावेरीलक्षद्वीपअंडमान द्वीप समूहनिकोबार द्वीप समूह70° E75° E80° E85° E90° E95° E10° N15° N20° N25° N30° N35° Nसंकेत-चिह्नसमुद्र तल से ऊँचाई (मीटर)0 – 150150 – 300300 – 600600 – 15001500 – 30003000 – 50005000 से अधिकनदी (तीर = प्रवाह की दिशा)अंतर्राष्ट्रीय सीमापर्वत शिखर
पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक मानचित्र को यहाँ संकेत-चिह्न तथा अक्षांश और देशांतर रेखाओं सहित पुनः बनाया गया है।
उत्तर

मानचित्र पर यह श्रृंखला संपूर्ण उत्तर में एक लंबे चाप के रूप में फैली है। चित्र 1.2 का शीर्षक इसकी लंबाई बताता है — लगभग 2500 कि.मी.

दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ने पर रंग बदलते जाते हैं और संकेत-सूची उन्हें ऊँचाई में बदल देती है —

श्रेणीमानचित्र पर रंगअनुमानित ऊँचाई
शिवालिक (बाह्य हिमालय)हरे मैदानों के ठीक ऊपर हल्का भूराकुछ सौ मीटर से लगभग 1500 मीटर
हिमाचल (लघु हिमालय)गहरा भूरालगभग 1500–4500 मीटर — पर्वतीय पर्यटन स्थलों की पट्टी
हिमाद्रि (वृहद हिमालय)सबसे गहरा भूरा, फिर सफ़ेद4500 मीटर से ऊपर, चोटियाँ 8000 मीटर से भी अधिक
यह प्राचीर जैसी क्यों दिखती है: उत्तर-दक्षिण थोड़ी-सी दूरी में ही ऊँचाई बहुत तेज़ी से बढ़ती है। मैदान की लगभग 200 मीटर ऊँचाई से 8000 मीटर तक की चढ़ाई मात्र 200–300 कि.मी. में हो जाती है — इसीलिए मानचित्र पर तीनों रंग-पट्टियाँ एक-दूसरे से सटी हुई दिखती हैं।
स्वयं जाँचिए: सही आँकड़े आपकी पुस्तक के मानचित्र पर छपी संकेत-सूची पर निर्भर करते हैं, इसलिए उत्तर लिखने से पहले उसे अवश्य पढ़िए।
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