प्र1.
पहले दिए गए चित्रणों में वस्तु विनिमय प्रणाली के कुछ तरीके दर्शाए गए हैं। क्या आपने अपने क्षेत्र में इस तरह के प्रयोगों का अवलोकन किया है?
उत्तर
हाँ — वस्तु विनिमय समाप्त नहीं हुआ है। जहाँ लोगों में परस्पर विश्वास हो या नकद कम हो, वहाँ यह आज भी जीवित है। अपने आस-पास इन्हें देखिए —
- बर्तन वाले। विक्रेता घर-घर आकर पुराने कपड़ों के बदले स्टील के बर्तन देता है — ठीक वैसे ही जैसे चित्र 11.7 में है।
- कबाड़ी वाला। पुराने अखबार और रद्दी के बदले बाल्टी, मग या प्लास्टिक का सामान।
- पुस्तक और खिलौनों का आदान-प्रदान विद्यालयों और कॉलोनियों में, जैसे चित्र 11.6 का पुस्तक विनिमय क्लब।
- गाँव में सहयोग। किसान एक दिन के लिए बैल या ट्रैक्टर देता है और बदले में फसल का हिस्सा या एक दिन का श्रम पाता है।
- कौशल के बदले कौशल। पड़ोसी आपके भाई को गणित पढ़ाती हैं और आपकी माताजी उनके परिवार के कपड़े सिलती हैं।
- मेले। असम के मोरीगांव जिले का जोन बील मेला सबसे प्रसिद्ध जीवित वस्तु विनिमय मेला है — पहाड़ी लोग कंद-मूल, सब्जियाँ, फल, जड़ी-बूटियाँ और मसाले लाते हैं और मैदानी लोगों से चावल के पिठा के बदले उनका विनिमय करते हैं।
यह कीजिए: एक सप्ताह तक अपनी गली में हुए हर लेन-देन की डायरी बनाइए और हर एक पर ‘मुद्रा’ या ‘वस्तु विनिमय’ लिखिए। नकद भुगतानों के बीच दो-तीन वस्तु विनिमय प्रायः छिपे मिल जाएँगे।