प्र1.
ऐसे कुछ उपाय सुझाइए जिससे मुद्रा के प्रयोग द्वारा किसान की स्थिति को सरल बनाया जा सके?
उत्तर
मुद्रा किसान की पूरी विनिमय-श्रृंखला को एक विक्रय और तीन क्रय में बदल देगी।
वस्तु विनिमय से : बैल → गेहूँ → जूते, फिर स्वेटर, फिर दवाइयाँ (4 विनिमय, बोरों के साथ 3 यात्राएँ)
मुद्रा से : बैल → ₹ → जूते, स्वेटर, दवाइयाँ (1 विक्रय, फिर सरल क्रय)
मुद्रा से : बैल → ₹ → जूते, स्वेटर, दवाइयाँ (1 विक्रय, फिर सरल क्रय)
वस्तु विनिमय की हर सीमा के लिए मुद्रा के पास एक उपाय है —
| मुद्रा का कार्य | किसान के लिए इसका अर्थ |
|---|---|
| विनिमय का माध्यम | बैल किसी को भी बेचिए और जूते किसी से भी खरीदिए — आवश्यकताओं के द्विसंयोग की आवश्यकता ही नहीं |
| मूल्य का सामान्य माप | जूते, स्वेटर और दवाइयों का मूल्य रुपयों में अंकित है, इसलिए तुलना सरल और मोल-भाव अनावश्यक |
| विभाज्यता | बैल एक धनराशि बन जाता है जिसे ठीक-ठीक बाँटा जा सकता है — कुछ जूतों के लिए, कुछ स्वेटर के लिए, शेष दवाइयों के लिए |
| सुवाह्यता | सिक्के और नोट जेब में आ जाते हैं; गाँव-गाँव बोरे ढोने की आवश्यकता नहीं |
| मूल्य का संग्रहण | जो बच जाए वह अपना मूल्य बनाए रखता है। न सड़ेगा, न चूहे खाएँगे — महीनों बाद भी व्यय किया जा सकता है |
मुद्रा से किसान आज खरीदकर बाद में भुगतान भी कर सकता है, क्योंकि यह स्थगित भुगतान का मानक भी है।