अन्वेषण अध्याय 11 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उपर्युक्त उदाहरण में आवश्यकताओं के द्विसंयोग के क्या दृष्टांत हैं?
उत्तर

किसान की श्रृंखला के हर विनिमय में आवश्यकताओं का द्विसंयोग चाहिए। उदाहरण में ऐसे चार दृष्टांत हैं।

क्रमविनिमयकिन दो आवश्यकताओं का मेल आवश्यक है
1बैल → गेहूँ के बोरेगेहूँ वाले को बैल चाहिए और किसान को गेहूँ चाहिए
2गेहूँ → जूतेमोची को गेहूँ चाहिए और किसान को वे जूते चाहिए
3गेहूँ → स्वेटरस्वेटर बेचने वाले को गेहूँ चाहिए और किसान को स्वेटर चाहिए
4गेहूँ → दवाइयाँदवा देने वाले को गेहूँ चाहिए और किसान को दवाइयाँ चाहिए

और पृष्ठ 232 पर कल्पित सरल स्थिति — एक ही व्यक्ति बैल के बदले जूते, स्वेटर और दवाइयाँ तीनों दे दे — पाँचवाँ तथा सबसे कम संभव दृष्टांत है।

स्वयं जाँचिए: यदि मोची को गेहूँ के स्थान पर दूध चाहिए होता, तो किसान को एक और विनिमय जोड़ना पड़ता (गेहूँ → दूध → जूते)। हर बेमेल श्रृंखला में एक कड़ी और जोड़ देता है।
प्र2.
उपर्युक्त स्थिति में वे कौन-से मामले हैं जहाँ आपको मूल्य के सामान्य मानक माप की कमी का सामना करना पड़ सकता है?
उत्तर

जहाँ भी दोनों पक्षों को दर पर बहस करनी पड़े, वहाँ मूल्य का सामान्य मानक माप नहीं है। किसान की कहानी में यह हर सौदे में होता है।

  • बैल के बदले गेहूँ। एक बैल कितने बोरे गेहूँ के बराबर है — दस, बीस या तीस? इसका निर्णय केवल मोल-भाव से होता है।
  • गेहूँ के बदले जूते। पुस्तक स्वयं कहती है कि हर लेन-देन में यह तय करना कठिन होगा कि जूतों के बदले गेहूँ की कितनी मात्रा उचित रहेगी।
  • गेहूँ के बदले स्वेटर। वही बहस दूसरे व्यक्ति के साथ फिर से।
  • गेहूँ के बदले दवाइयाँ। और फिर तीसरे व्यक्ति के साथ — जो गेहूँ का मूल्य पहले दोनों से भिन्न आँक सकता है।
  • बैल के बदले सीधे जूते। बैल को केवल एक जोड़ी जूतों के लिए बदलना उचित विनिमय नहीं होगा — पर सामान्य इकाई के बिना कोई यह सिद्ध भी नहीं कर सकता।
ऐसा क्यों होता है: सामान्य इकाई के बिना मूल्य केवल एक राय बनकर रह जाता है। मोची को गेहूँ सस्ता लग सकता है; किसान को, जिसने पूरी ऋतु परिश्रम किया, वही गेहूँ अमूल्य लगता है। यदि किसी एक को विनिमय लाभकारी न लगे तो सौदा टूट जाता है। मुद्रा हर वस्तु का मूल्य एक ही इकाई में देकर यह बहस समाप्त कर देती है।
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