प्र1.
कल्पना कीजिए कि किसान की कहानी में, वह कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ लेता है जो उसके बैल के बदले उसे एक जोड़ी नए जूते, एक स्वेटर और दवाइयाँ देने को तैयार हो। क्या आप सोचते हैं कि ऐसी स्थिति आसानी से बन सकती है?
उत्तर
नहीं, ऐसी स्थिति बहुत कम बनेगी। इसके लिए एक साथ बहुत-सा संयोग चाहिए।
एक ही व्यक्ति में, एक ही दिन, तीन शर्तें पूरी होनी चाहिए —
- उसके पास जूते, स्वेटर और दवाइयाँ — तीनों हों। ये तीन बिल्कुल अलग व्यवसाय हैं।
- उसे बैल की आवश्यकता हो, और इतनी अधिक कि वह तीनों वस्तुएँ छोड़ने को तैयार हो जाए।
- दोनों पक्ष यह मानें कि एक बैल इन तीनों का उचित मूल्य है।
वास्तविक जीवन में जूते मोची से मिलते हैं, स्वेटर बुनकर से और दवाइयाँ वैद्य से। तीनों को अलग-अलग वस्तुएँ चाहिए और संभवतः किसी को बैल नहीं चाहिए। इसीलिए कहानी में किसान को विनिमयों की श्रृंखला से गुजरना पड़ता है।
ऐसा क्यों होता है: यह आवश्यकताओं के द्विसंयोग का सबसे कठिन रूप है। एक संयोग बनना ही कठिन है; यहाँ किसान को तीन संयोग एक साथ चाहिए।