प्र1.
ऊपर दी गई स्थिति में आपको किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
उत्तर
पाँच अलग-अलग प्रकार की चुनौतियाँ, और आगे चलकर अध्याय हर एक को नाम भी देता है।
- दोनों की आवश्यकताओं का मेल। जिसके पास जूते हैं, उसे ठीक वही वस्तु भी चाहिए जो आप दे रहे हैं। यह आवश्यकताओं का द्विसंयोग है।
- उचित दर तय करना। स्वेटर दो बोरे गेहूँ के बराबर है या पाँच? कोई निश्चित उत्तर नहीं, क्योंकि मूल्य का सामान्य मानक माप उपलब्ध नहीं है।
- वस्तु को बाँटना। बैल को जूते के बराबर टुकड़े में नहीं काटा जा सकता — यह विभाज्यता की समस्या है।
- वस्तु को ले जाना। बैल और गेहूँ के बोरे स्थान-स्थान पर ढोने पड़ते हैं — यह सुवाह्यता की समस्या है।
- वस्तु को सँभालकर रखना। गेहूँ सड़ जाता है या चूहे खा जाते हैं, इसलिए संपत्ति संगृहीत नहीं की जा सकती — यह टिकाऊपन की समस्या है।
इनके ऊपर समय और श्रम का व्यय भी है — कई यात्राएँ, कई बार मोल-भाव और एक सुरक्षित भंडार बनाने की चिंता।
ऐसा क्यों होता है: हर चुनौती की जड़ एक ही है — वस्तु विनिमय में जो वस्तु दी जा रही है, उसे दो काम एक साथ करने पड़ते हैं। वह स्वयं उपयोगी भी होनी चाहिए और भुगतान का साधन भी। मुद्रा इन दोनों कामों को अलग कर देती है, और हर चुनौती समाप्त हो जाती है।