अन्वेषण अध्याय 11 वस्तु विनिमय से मुद्रा तक के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

मुद्रा के अस्तित्व में आने से पहले लोग वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय सीधे अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं से करते थे। इसे वस्तु विनिमय प्रणाली (बार्टर सिस्टम) कहते हैं। कौड़ी, कवच, नमक, चायपत्ती, तंबाकू, कपड़ा, पशुधन और बीज इसमें प्रयोग होते थे। वस्तु विनिमय की पाँच सीमाएँ थीं — आवश्यकताओं का द्विसंयोग , मूल्य के सामान्य मानक माप का अभाव, विभाज्यता , सुवाह्यता और टिकाऊपन । मुद्रा ने इन पाँचों समस्याओं का समाधान किया। यह विनिमय का माध्यम है, मूल्य मापने का सामान्य अंकित मूल्य है, मूल्य के संग्रहण का साधन है और स्थगित भुगतान का मानक भी है। प्राचीन भारतीय सिक्के सोने, चाँदी, ताँबे या उनकी मिश्रधातु से बनते थे। उन्हें कार्षापण या पण कहा जाता था और उन पर अंकित चिह्न को रुपा कहते थे। सिक्के ढालना पूर्णतया शासकों के नियंत्रण में था। कागजी मुद्रा पहली बार चीन में प्रयोग हुई और भारत में 18वीं शताब्दी के अंत

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