कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 11 वस्तु विनिमय से मुद्रा तक के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

मुद्रा के अस्तित्व में आने से पहले लोग वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय सीधे अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं से करते थे। इसे वस्तु विनिमय प्रणाली (बार्टर सिस्टम) कहते हैं। कौड़ी, कवच, नमक, चायपत्ती, तंबाकू, कपड़ा, पशुधन और बीज इसमें प्रयोग होते थे। वस्तु विनिमय की पाँच सीमाएँ थीं — आवश्यकताओं का द्विसंयोग , मूल्य के सामान्य मानक माप का अभाव, विभाज्यता , सुवाह्यता और टिकाऊपन । मुद्रा ने इन पाँचों समस्याओं का समाधान किया। यह विनिमय का माध्यम है, मूल्य मापने का सामान्य अंकित मूल्य है, मूल्य के संग्रहण का साधन है और स्थगित भुगतान का मानक भी है। प्राचीन भारतीय सिक्के सोने, चाँदी, ताँबे या उनकी मिश्रधातु से बनते थे। उन्हें कार्षापण या पण कहा जाता था और उन पर अंकित चिह्न को रुपा कहते थे। सिक्के ढालना पूर्णतया शासकों के नियंत्रण में था। कागजी मुद्रा पहली बार चीन में प्रयोग हुई और भारत में 18वीं शताब्दी के अंत

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थअध्याय में कहाँउदाहरण
वस्तु विनिमय प्रणालीमुद्रा का प्रयोग किए बिना वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदानपृष्ठ 230, विनिमय का सबसे प्रारंभिक रूपआपका अतिरिक्त रबर, सहपाठी की अतिरिक्त पेंसिल के बदले
वस्तुएँव्यापार योग्य उत्पाद जो क्रय या विक्रय की जा सकती हैंपृष्ठ 230, मुद्रा से पहले प्रयुक्त वस्तुएँकौड़ी, कवच, नमक, चायपत्ती, तंबाकू, कपड़ा, पशुधन, बीज
आवश्यकताओं का द्विसंयोगदोनों व्यक्तियों के पास ठीक वही वस्तु हो जो दूसरे को चाहिएपृष्ठ 233, किसान की कठिनाईबैल वाले को ऐसा मोची चाहिए जिसे बैल की आवश्यकता हो
मूल्य का सामान्य मानक मापमूल्य का ऐसा मानक जिस पर सभी सहमत होंपृष्ठ 233, विनिमय क्यों टूट जाता हैएक स्वेटर कितने बोरे गेहूँ के बराबर है?
विभाज्यताकिसी वस्तु का टुकड़ों या भागों में विभाजित हो सकने का गुणपृष्ठ 233, बैल की समस्याबैल का कुछ हिस्सा स्वेटर के बदले नहीं दिया जा सकता
सुवाह्यताकिसी वस्तु को सरलता से एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने की समर्थतापृष्ठ 233, बैल को हर जगह ले जानागेहूँ के बोरे तीन अलग-अलग विक्रेताओं तक ढोना
टिकाऊपनक्षति सहकर लंबे समय तक संगृहीत रह सकने का गुणपृष्ठ 233, गेहूँ सड़ जाता है या चूहे खा जाते हैंअनाज खराब हो जाता है, सिक्का नहीं
सिक्के ढालना (मिंटिंग)वह प्रक्रिया जिससे सिक्कों का उत्पादन होता हैपृष्ठ 237, सिक्का-प्रणालीप्राचीन भारत में यह पूर्णतया शासकों के नियंत्रण में था
मिश्रधातुदो या दो से अधिक धातु तत्वों के मिश्रण से बनी धातुपृष्ठ 238, सिक्के किससे बनते हैंआज के सिक्के अधिकतर लोहे की मिश्रधातु के, जिनमें क्रोमियम, सिलिकॉन व कार्बन हैं
कार्षापण / पणसोने, चाँदी, ताँबे या उनकी मिश्रधातु से बने प्राचीन भारतीय सिक्केपृष्ठ 238, सिक्का-प्रणालीतमिल, तेलुगु व मलयालम में ‘पणं’ और कन्नड़ में ‘हण’ आज भी प्रचलित
रुपाप्राचीन सिक्कों पर अंकित चिह्नपृष्ठ 238संभवतः ‘रुपया’ शब्द का मूल
शीर्ष / पृष्ठ (ऑबवर्स / रिवर्स)सिक्के का मुख्यचित्र वाला भाग और उसका पिछला भागपृष्ठ 239चालुक्य सिक्के — एक ओर वराह, दूसरी ओर त्रिस्तरीय छत्र
करेंसीकिसी देश में प्रयोग की जाने वाली मुद्रा की प्रणालीपृष्ठ 241भारत में रुपये के सिक्के और नोट
अंकित मूल्यवह इकाई जिसमें सिक्कों एवं नोटों को वर्गीकृत किया जाता हैपृष्ठ 24050 पैसे, ₹1, ₹2, ₹5, ₹10 के सिक्के; ₹10 से ₹500 तक के नोट
क्यू.आर.कोडकाले-सफेद वर्गों का संग्रह जिसमें प्राप्तकर्ता के बैंक खाते की जानकारी होती हैपृष्ठ 243, कृष्णप्पा का फल का ठेलास्कैन कीजिए और सीधे विक्रेता के बैंक खाते में भुगतान कीजिए
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