प्र1.
चित्र 11.10 में दी गई समय-रेखा को देखें। आपने मुद्रा में क्या-क्या बदलाव देखे?
उत्तर
चित्र 11.10 को बाएँ से दाएँ पढ़िए — मुद्रा छह बार बदलती है, और हर बार पहले से अधिक सुविधाजनक हो जाती है।
| समय-रेखा पर तिथि | मुद्रा का रूप | क्या बदला |
|---|---|---|
| 6000 सा.सं.पू. | वस्तु विनिमय | वस्तु के बदले सीधे वस्तु — मुद्रा थी ही नहीं |
| 1000 सा.सं.पू. से | कौड़ी | एक कवच मुद्रा बन गया : गिनने योग्य, हल्का, नकल करना कठिन |
| 600 सा.सं.पू. से | धातु सिक्के — लोहा, चाँदी, सोना, ताँबा | मुद्रा पर अब अंकित और प्रमाणित मूल्य |
| 1861 | सरकारी कागजी मुद्रा | मूल्य सामग्री से अलग हुआ; कागज धातु से कहीं हल्का |
| 1980 | डिजिटल मुद्रा — डेबिट व क्रेडिट कार्ड | मुद्रा बिना ढोए एक स्थान से दूसरे स्थान जाने लगी |
| 2016 | यू.पी.आई. | अब केवल मोबाइल और क्यू.आर.कोड पर्याप्त; मुद्रा पूर्णतया इलेक्ट्रॉनिक |
चार बातें स्पष्ट दिखती हैं —
- भारी से भारहीन की ओर। पशुधन और अनाज → कवच → धातु → कागज → ऐसी मुद्रा जिसे छुआ नहीं जा सकता।
- प्राकृतिक से मानव-निर्मित की ओर। कवच मिलता है; सिक्का ढाला जाता है; यू.पी.आई. भुगतान सॉफ्टवेयर बनाता है।
- निजी से आधिकारिक की ओर। वस्तु विनिमय कोई भी कर सकता था; सिक्के राजा ढालते थे; आज केवल भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रा जारी कर सकता है।
- गति बढ़ती जाती है। वस्तु विनिमय से सिक्कों तक हजारों वर्ष लगे; कार्ड से यू.पी.आई. तक केवल लगभग 36 वर्ष।
स्वयं जाँचिए: समय-रेखा यह नहीं कहती कि पुराने रूप समाप्त हो गए। सिक्कों के बाद भी भारत के कुछ भागों में कौड़ी लंबे समय तक चलती रही, और आज सिक्के, नोट और यू.पी.आई. — तीनों साथ-साथ प्रयोग में हैं।