प्र1.
क्या यह शब्द वर्तमान भारत में मुद्रा के लिए प्रयोग किए जाने वाले शब्द से मिलता-जुलता है?
उत्तर
हाँ। यहाँ जिस शब्द की बात है वह है रुपा — प्राचीन सिक्कों पर अंकित चिह्न — और यही आज के प्रतिदिन प्रयुक्त शब्द रुपया का मूल है।
रुपा (चिह्न / रूप) → रूप्य (चिह्नांकित चाँदी) → रुपया
उसी अनुच्छेद का दूसरा शब्द भी जीवित है। प्राचीन सिक्कों को कार्षापण या पण कहा जाता था, और आज भी —
- तमिल, तेलुगु और मलयालम में मुद्रा के लिए पणं कहा जाता है;
- कन्नड़ में हण कहा जाता है।
ऐसा क्यों होता है: मुद्रा के नाम मुद्रा से भी अधिक समय तक जीवित रहते हैं। सिक्के सदियों पहले लुप्त हो गए, परंतु लोग बोलचाल में नाम प्रयोग करते रहे, इसलिए वह नाम एक पीढ़ी की मुद्रा से अगली पीढ़ी की मुद्रा तक पहुँच गया।