वस्तु विनिमय प्रणाली में लोग वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय सीधे अन्य वस्तुओं एवं सेवाओं से करते थे, मुद्रा का प्रयोग किए बिना।
यह कैसे कार्य करती थी। दो व्यक्ति मिलते, जिनमें से हर एक के पास वह वस्तु होती जो दूसरे को चाहिए। वे तय करते कि एक वस्तु की कितनी मात्रा दूसरी वस्तु की कितनी मात्रा के बराबर है, और अदला-बदली कर लेते। अध्याय का उदाहरण — आपके पास अतिरिक्त रबर है और पेंसिल चाहिए; सहपाठी के पास अतिरिक्त पेंसिल है और रबर चाहिए — एक विनिमय से दोनों की आवश्यकता पूरी।
कौन-सी वस्तुएँ प्रयोग होती थीं। वही वस्तुएँ चुनी जातीं जिनकी माँग बहुतों को हो और जिन्हें सँभालना सरल हो —
| प्रकार | अध्याय में दिए उदाहरण |
|---|---|
| कवच | कौड़ी, कवच |
| खाद्य एवं उत्तेजक पदार्थ | नमक, चायपत्ती, तंबाकू |
| कपड़ा और बीज | बुना हुआ कपड़ा, बीज |
| पशुधन | गाय, बकरी, घोड़े, भेड़ |
| विश्व की विशिष्ट मुद्राएँ | याप द्वीप (माइक्रोनेशिया) के ‘राई पत्थर’; मध्य मैक्सिको का एज्टेक ताँबे का ताजार्डो; सोलोमन द्वीप की तेवाऊ लाल पंख कुंडली |
वस्तु विनिमय आज भी लुप्त नहीं हुआ है। असम के मोरीगांव जिले का जोन बील मेला आज भी तीन दिवसीय वस्तु विनिमय मेला है, और घर-घर पुराने कपड़ों के बदले नए बर्तन आज भी दिए जाते हैं।