प्र1.
क्या आपने अपने आस-पास के अन्य व्यक्तियों को सिक्कों और नोटों का प्रयोग किए बिना भुगतान करते या भुगतान प्राप्त करते हुए देखा है?
उत्तर
हाँ — नकद रहित भुगतान अब प्रतिदिन का दृश्य है, और केवल बड़ी दुकानों में ही नहीं।
- फल या सब्जी विक्रेता जिसके ठेले पर छपा हुआ क्यू.आर.कोड बँधा है, ठीक अध्याय के कृष्णप्पा की तरह।
- ऑटो-रिक्शा चालक जो यात्रा के अंत में क्यू.आर.कोड का कार्ड दिखा देता है।
- दवा की दुकान या सुपर बाजार में डेबिट या क्रेडिट कार्ड लगाते हुए व्यक्ति।
- नेट बैंकिंग से विद्यालय की फीस या बिजली का बिल भरते माता-पिता।
- मित्र जो कुछ ही क्षणों में मोबाइल पर यू.पी.आई. से बिल आपस में बाँट लेते हैं।
इनमें से किसी में भी कोई सिक्का या नोट हाथ नहीं बदलता। यह डिजिटल मुद्रा है — इलेक्ट्रॉनिक रूप में मुद्रा, जो अमूर्त है, अर्थात् जिसे न छू सकते हैं और न महसूस कर सकते हैं। वह सीधे भुगतानकर्ता के बैंक खाते से प्राप्तकर्ता के बैंक खाते में चली जाती है।
ऐसा क्यों होता है: क्यू.आर.कोड में प्राप्तकर्ता के बैंक खाते की जानकारी होती है। उसे स्कैन करते ही आपके बैंक को पता चल जाता है कि राशि कहाँ भेजनी है, इसलिए छोटे विक्रेता को न कार्ड मशीन चाहिए और न गल्ला — केवल एक मोबाइल।
यह कीजिए: घर से विद्यालय तक के रास्ते में कितने क्यू.आर.कोड दिखते हैं, गिनिए। यह संख्या बता देगी कि आपके अपने क्षेत्र में डिजिटल मुद्रा कितनी दूर तक पहुँच चुकी है।