प्र1.
₹50 और ₹100 के नोटों को देखिए। क्या आप नोटों के पृष्ठ भाग पर दर्शाई गई भारत की सांस्कृतिक विरासत से संबंधित आकृतियों को पहचान पा रहे हैं? इनके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त कीजिए।
उत्तर
दोनों आकृतियाँ यूनेस्को की विश्व धरोहर हैं, और दोनों नोट के पृष्ठ भाग (पीछे की ओर) छपी हैं।
| नोट | पृष्ठ भाग की आकृति | कहाँ है | किसने बनवाया और क्या जानने योग्य है |
|---|---|---|---|
| ₹50 | हंपी का पाषाण रथ | हंपी, विजयनगर जिला, कर्नाटक | विट्ठल मंदिर परिसर में रथ के आकार में तराशा गया मंदिर, 16वीं शताब्दी में विजयनगर शासकों के काल में बना। हंपी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। |
| ₹100 | रानी की वाव — ‘रानी की बावड़ी’ | पाटन, सरस्वती नदी के तट पर, गुजरात | 11वीं शताब्दी में सोलंकी नरेश भीमदेव प्रथम की स्मृति में रानी उदयमती द्वारा बनवाई गई सात मंजिला उलटी बावड़ी; इसकी दीवारों पर 500 से अधिक बड़ी मूर्तियाँ हैं। |
इसी श्रृंखला के अन्य नोटों पर भी यही भावना है — ₹10 पर कोणार्क का सूर्य मंदिर, ₹20 पर एलोरा की गुफाएँ, ₹200 पर साँची स्तूप और ₹500 पर लाल किला।
ऐसा क्यों होता है: मुद्रा ही वह एकमात्र छपी हुई वस्तु है जो देश के हर व्यक्ति तक पहुँचती है। नोट के पृष्ठ भाग पर स्मारक छापकर रोजमर्रा की मुद्रा भारत की सांस्कृतिक विरासत का एक छोटा, चलता-फिरता पाठ बन जाती है।
संकेत: अपना ₹50 का नोट पुस्तक के चित्र 11.16 के पास रखकर देखिए। चित्र के नीचे छपे शब्द स्वयं स्मारक का नाम बता देते हैं।