प्र1.
आपके विचार में क्या हुआ होगा जब सिक्कों का प्रयोग हर प्रकार के लेन-देन के लिए शुरू हुआ होगा, चाहे वह सब्जियाँ हों या जमीन खरीदना हो?
उत्तर
सिक्के छोटे क्रय के लिए उत्तम थे और बड़े क्रय के लिए अत्यंत असुविधाजनक, इसलिए आवश्यक सिक्कों की संख्या बहुत बढ़ गई।
एक गड्डी पालक ≈ कुछ छोटे सिक्के — सरल
जमीन का एक टुकड़ा ≈ हजारों सिक्के — धातु के बोरे
अर्थात् : सौदा जितना बड़ा, भुगतान उतना भारी
जमीन का एक टुकड़ा ≈ हजारों सिक्के — धातु के बोरे
अर्थात् : सौदा जितना बड़ा, भुगतान उतना भारी
इसके परिणाम —
- बड़े भुगतान बोरों या गाड़ियों में ले जाने पड़ते, कभी-कभी पहरेदारों के साथ।
- बड़ी राशि गिनने में लंबा समय लगता, और हर सिक्के का भार व शुद्धता जाँचनी पड़ती।
- राज्यों के बीच जाने वाले व्यापारियों को लंबी दूरी तक भारी भार ढोना पड़ता।
- घर में संपत्ति रखने का अर्थ था धातु का विशाल ढेर रखना।
अध्याय का अपना निष्कर्ष यही है — बड़ी मात्रा में सिक्के ले जाना कठिन होता होगा और सिक्कों को संगृहीत करना भी एक समस्या बन गई होगी। इसी खोज का अंत कागजी मुद्रा पर हुआ।