प्र1.
कल्पना कीजिए कि आप एक किसान हैं और जहाँ आप रहते हैं, वहाँ लोग वस्तु विनिमय प्रणाली का प्रयोग करते हैं। आपको यहाँ अनेक प्रकार की वस्तुओं की आवश्यकता है, जैसे – एक जोड़ी नए जूते, एक स्वेटर और अपनी दादी के लिए दवाइयाँ। परंतु आपके पास देने के लिए केवल एक बैल है। इस बैल का विनिमय करके आप कैसे विभिन्न प्रकार की आवश्यक वस्तुओं को विभिन्न लोगों एवं स्थानों से प्राप्त करेंगे?
उत्तर
मुझे एक बड़े विनिमय को छोटे-छोटे विनिमयों की श्रृंखला में बाँटना पड़ेगा, क्योंकि किसी एक व्यक्ति के पास जूते, स्वेटर और दवाइयाँ — तीनों एक साथ होने और उसे बैल की आवश्यकता होने की संभावना बहुत कम है।
चरण 1 — ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना जिसे वास्तव में बैल चाहिए।
चरण 2 — एक जोड़ी जूते बैल के मूल्य के बराबर नहीं, इसलिए बैल के बदले कई बोरे गेहूँ लेना।
चरण 3 — गेहूँ मोची तक ले जाना; तय करना कि कितने बोरे एक जोड़ी जूतों के बराबर हैं।
चरण 4 — शेष गेहूँ लेकर दूसरे व्यक्ति के पास स्वेटर के लिए जाना।
चरण 5 — बचे हुए गेहूँ से तीसरे व्यक्ति से दवाइयाँ लेना।
चरण 6 — बचे हुए बोरे घर लाकर सुरक्षित भंडारण करना।
चरण 2 — एक जोड़ी जूते बैल के मूल्य के बराबर नहीं, इसलिए बैल के बदले कई बोरे गेहूँ लेना।
चरण 3 — गेहूँ मोची तक ले जाना; तय करना कि कितने बोरे एक जोड़ी जूतों के बराबर हैं।
चरण 4 — शेष गेहूँ लेकर दूसरे व्यक्ति के पास स्वेटर के लिए जाना।
चरण 5 — बचे हुए गेहूँ से तीसरे व्यक्ति से दवाइयाँ लेना।
चरण 6 — बचे हुए बोरे घर लाकर सुरक्षित भंडारण करना।
अर्थात् बैल को पहले एक विभाज्य वस्तु — गेहूँ — में बदला जाता है, तभी उसे टुकड़ों में व्यय किया जा सकता है।
संकेत: ध्यान दीजिए कि यहाँ गेहूँ मुद्रा का काम कर रहा है। वह एक कच्चा विनिमय माध्यम बन गया है। वास्तविक मुद्रा का आरंभ ठीक इसी प्रकार हुआ था।