अन्वेषण अध्याय 12 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह बाजार अपनी समृद्धि की चरम सीमा पर कैसा रहा होगा?
उत्तर

हाँ — और अध्याय में उद्धृत दोनों पुर्तगाली यात्रियों के वर्णन से यह चित्र बन जाता है।

कल्पना कीजिए कि आप 16वीं शताब्दी में विरूपाक्ष मंदिर के सामने खड़े हैं। मंदिर के गोपुरम से एक लंबी, सीधी, स्तंभों वाली गली आगे जाती है, जिसके दोनों ओर पत्थर के मंडप बने हैं। उनके नीचे विक्रेता अपने ढेर लगाए बैठे हैं —

  • अन्न और कृषि-उत्पाद — अनाज, बीज, दूध, तेल।
  • वस्त्र — रेशम, और “कपड़ों के विक्रेताओं के लिए कपास”।
  • पशु-पक्षी — गाय, खरगोश, घोड़े और यहाँ तक कि बटेर और तीतर।
  • बहुमूल्य वस्तुएँ — “सोने के जवाहरात और कृत्रिम आभूषण… हर प्रकार के माणिक्य, हीरे-मोतियों”।
  • चारा — “प्रचुर मात्रा में घास और भूसा” घोड़ों और पशुओं के लिए।

शिल्पकार यहाँ किसी बंद कारखाने में नहीं थे — “वहाँ शिल्पकार भी थे, जो अपनी गलियों में काम करते थे”। अर्थात् क्रेता स्वर्णकार को आभूषण गढ़ते देखता और वहीं से तैयार वस्तु खरीद लेता था। इसमें अनेक भाषाओं में होते मोल-तोल का शोर, फारस और पुर्तगाल से आए व्यापारी, मंदिर की घंटियाँ और तेल-मसालों की गंध जोड़ दीजिए — यही वह बाजार है जिसे डोमिन्गोस पेस ने ‘विश्व में उत्कृष्ट उपलब्धता वाला शहर' कहा था।

ऐसा क्यों होता है: हंपी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी और “समृद्ध व्यापार का केंद्र” था। सुदृढ़ और स्थिर राजधानी उत्पादकों और दूर-दराज के व्यापारियों को खींचती है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि वहाँ क्रय-शक्ति वाले क्रेता मिलेंगे। नुनिज को स्वयं आश्चर्य हुआ था — आस-पास का देश “बंजर” दिखता था, फिर भी नगर में “हर चीज की प्रचुरता” थी। वह प्रचुरता खेती से नहीं, व्यापार से आई थी।
प्र2.
क्या आप अपने राज्य में किन्हीं पुराने बाजारों के बारे में जानते हैं? वे वर्तमान बाजारों से किस तरह समान या भिन्न होंगे? अपने परिवार और समुदाय के वरिष्ठजनों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर

विधि। अपने राज्य का ऐसा एक बाजार चुनिए जो कम से कम कुछ पीढ़ी पुराना हो। अध्याय स्वयं चार बाजारों के चित्र देता है — पुरानी दिल्ली का खारी बावली मसाला बाजार (चित्र 12.15), जयपुर का जौहरी बाजार (चित्र 12.17), बेंगलुरु का फूल बाजार (चित्र 12.16) और इंफाल का इमा कैथल (चित्र 12.26)। फिर किसी वरिष्ठजन से तीन प्रश्न पूछिए — आपके बचपन में यहाँ क्या बिकता था? भुगतान कैसे होता था? माल यहाँ तक कैसे पहुँचता था?

अच्छा उत्तर पुराने और नए की तुलना एक ही बिंदुओं पर करता है, केवल “सब बदल गया” कहकर नहीं छोड़ देता।

तुलना का बिंदुपुराना बाजारआज का बाजार
स्थानप्रायः मंदिर, किले, नदी-घाट या रेलवे स्टेशन के पासवही स्थान — पुराने बाजार हिलते नहीं; नए बाजार सड़कों के साथ बनते हैं
विक्रेता कौनपीढ़ियों से वही परिवार, प्रायः एक गली में एक ही व्यवसायपारिवारिक दुकानें और साथ ही ब्रांडेड स्टोर, मॉल तथा ऑनलाइन विक्रेता
कीमतहर बार मोल-तोल से तयअधिकतर छपा हुआ अधिकतम खुदरा मूल्य; ठेलों और हाटों में मोल-तोल आज भी जीवित
भुगताननकद, और महीने के अंत में चुकता होने वाला उधार-खातानकद, कार्ड और यू.पी.आई. / क्यू.आर. कोड — चित्र 12.4 के ठेले पर क्यू.आर. कोड देखिए
माल कैसे आता थाबैलगाड़ी, नाव, सिर पर बोझाट्रक, रेल, शीतागार वाहन, कूरियर
जो नहीं बदलाएक क्रेता, एक विक्रेता, एक सहमत कीमत — और दशकों तक चलने वाला भरोसे का संबंध
नमूना उत्तर: “मेरी दादी बस-स्टैंड के पीछे लगने वाले साप्ताहिक हाट में सामान लेने जाती थीं, जो आज भी वहीं लगता है। वे बताती हैं कि तब वहाँ केवल सब्जियाँ, मिट्टी के बरतन, रस्सी और चूड़ियाँ बिकती थीं और हर कीमत पर मोल-तोल होता था। व्यापारी तीन गाँव दूर से बैलगाड़ी में आते थे। आज उसी हाट में प्लास्टिक की बाल्टियाँ और मोबाइल कवर भी बिकते हैं, सब्जी वाले ने अपने तराजू पर क्यू.आर. कोड चिपका रखा है, और सुबह छह बजे तक टेंपो मंडी से सब्जी उतार देता है। जो नहीं बदला वह है दिन — वह आज भी मंगलवार ही है, जैसा जाने कब से चला आ रहा है।”
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ