प्र1.
क्या आप चित्र 12.24 में दिए गए मानचित्र पर बंदरगाह, राजमार्ग और रेलवे के जाल को देख सकते हैं? आपके विचार से इन्होंने सूरत को व्यापारिक केंद्र बनाने में किस प्रकार सहायता प्रदान की?
उत्तर
हाँ — और वे यहाँ हैं। पहले चित्र 12.24 (सूरत नगर का मानचित्र) के नीचे दाईं ओर दी गई सूची देखिए, फिर मानचित्र पर वे चिह्न खोजिए।
| विशेषता | सूची में चिह्न | मानचित्र पर कहाँ |
|---|---|---|
| बंदरगाह | छोटा जहाज | नगर के दक्षिण-पश्चिम में समुद्र-तट पर दो जहाज-चिह्न, जहाँ ताप्ती नदी अरब सागर में मिलती है |
| रेल मार्ग | आड़ी धारियों वाली रेखा | नगर के ठीक बीच से, लगभग उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर, नदी को पार करती हुई |
| राज मार्ग / सड़कें | सादी काली रेखा | अनेक — नगर से हर दिशा में निकलती और बीच में एक-दूसरे को काटती हुई |
| वायुपत्तन | वायुयान | बसे हुए क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में, तट के पास |
| वस्त्र बाजार | छोटा पीला-हरा वर्ग | नगर के हृदय में — लगभग रेल मार्ग के ऊपर ही |
| नदी (ताप्ती) | हलकी नीली पट्टी | पूर्व से आकर नगर को चीरती हुई समुद्र की ओर |
इन्होंने सूरत को व्यापारिक केंद्र कैसे बनाया
- बंदरगाह ने संसार को सूरत तक ला दिया। नगर पश्चिमी तट पर है, इसलिए जहाज पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और यूरोप तक माल ले जाते-लाते रहे। अध्याय यही कहता है — “पश्चिमी तट पर नगर के स्थित होने के कारण अनेक बंदरगाह और सड़कों के जाल बिछे, जो आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” यहाँ व्यापार “16वीं शताब्दी के बाद से” फला-फूला।
- रेल मार्ग कच्चा माल लाता है और तैयार वस्त्र ले जाता है। कपास महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य भागों की कपास मंडियों से यहाँ पहुँचती है (चित्र 12.23); तैयार साड़ियाँ और परिधान देश भर की दुकानों को जाते हैं। वस्त्र बाजार रेल मार्ग के पास इसीलिए है।
- सड़कें अंतिम कड़ी जोड़ती हैं। मंडी से पावरलूम तक कपास, पावरलूम से रंगाई इकाई तक कपड़ा, और रंगे कपड़े से थोक बाजार तक तैयार माल — “उत्पाद एक चरण से दूसरे चरण में बाजारों के माध्यम से जाता है”, और हर ऐसा चरण एक सड़क-यात्रा है।
- वायुपत्तन छोटी पर बहुमूल्य वस्तुएँ ले जाता है। सूरत विश्व में हीरा उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है, जहाँ लगभग 15 लाख कारीगर हीरे काटने और चमकाने में लगे हैं। हीरे जहाज से नहीं, वायुयान से जाते हैं।
- तीनों मिलकर व्यापार सस्ता कर देते हैं। जिस नगर में माल समुद्र, रेल और सड़क — तीनों से आ-जा सके, वहाँ क्रय-विक्रय सस्ता पड़ता है। इसलिए व्यापारी, कारीगर और थोक विक्रेता वहीं इकट्ठा होते हैं, और यह जमावड़ा और अधिक लोगों को खींचता है।
ऐसा क्यों होता है: बाजार के लिए केवल क्रेता-विक्रेता पर्याप्त नहीं — माल का उन तक पहुँचना भी आवश्यक है। परिवहन ही अच्छे स्थान को व्यापारिक केंद्र में बदलता है। सूरत के पास दूसरी वस्तु भी थी — “विशेषज्ञ कारीगरों और कुशल व्यक्तियों के समुदाय सदियों से यहाँ रहते आए हैं। उनके कौशल पीढ़ियों से हस्तांतरित होते रहे हैं।”