प्र1.
अपने समीप स्थित खुदरा विक्रेता से किसी उत्पाद, उसके मूल स्थान और दुकान तक पहुँचने की प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं की शृंखला के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए। चित्र 12.11 में प्रवाह चित्र (फ्लो चार्ट) का उपयोग करके इसका पता लगाइए और इसे कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर
विधि — चार चरण।
- ऐसा उत्पाद चुनिए जिसका मूल स्थान स्पष्ट हो। चाय का पैकेट, साबुन, चावल की बोरी, कॉपी या मोबाइल चार्जर खुली सब्जी से बेहतर रहेगा, क्योंकि पैकेट पर ही विनिर्माता का नाम और पता छपा होता है।
- दुकानदार से पाँच प्रश्न पूछिए और उत्तर लिख लीजिए — यह आप तक कौन पहुँचाता है — कंपनी की गाड़ी, कोई वितरक, या आप स्वयं थोक बाजार से लाते हैं? वह थोक बाजार कहाँ है? इसे बनाता कौन है और कहाँ? माल कितने दिन में आता है? क्या वर्ष भर आपकी खरीद-कीमत बदलती है?
- लेबल पढ़िए — विनिर्माता का नाम, पता और निर्माण तिथि। इससे शृंखला का दूसरा सिरा मिल जाएगा, भले ही दुकानदार को पता न हो।
- प्रवाह चित्र बनाइए — चित्र 12.11 की तरह हर कड़ी के लिए एक बक्सा, हर गति के लिए एक तीर, और हर तीर पर लिखिए कि माल कौन ले जाता है।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए: कम से कम चार नामित कड़ियाँ; हर कड़ी का वास्तविक स्थान, केवल ‘कारखाना' शब्द नहीं; तीरों पर लिखे शब्द (‘क्रय करता है', ‘भेजता है', ‘पहुँचाता है'); और एक वाक्य कि यदि कोई एक कड़ी हट जाए तो क्या टूट जाएगा।
नमूना उत्तर: “मैंने किराना दुकान के सुरेश भैया से एक किलो चाय के पैकेट के बारे में पूछा।
असम के जोरहाट जिले के चाय बागान → पत्तियों की नीलामी → गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र → थोक में क्रय करता है → कोलकाता के पास कंपनी का मिश्रण और पैकिंग कारखाना → ट्रक से भेजा जाता है → जिला मुख्यालय में कंपनी का वितरक → जिसकी गाड़ी हर बृहस्पतिवार पहुँचाती है → सुरेश भैया की दुकान → 250 ग्राम और 1 किलो के पैकेटों में बिकती है → हमारा परिवार।
उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी वितरक की गाड़ी है — पिछले वर्ष बाढ़ में वह नौ दिन नहीं आई और कारखाने में चाय होते हुए भी उनकी दुकान में चाय नहीं थी।”
असम के जोरहाट जिले के चाय बागान → पत्तियों की नीलामी → गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र → थोक में क्रय करता है → कोलकाता के पास कंपनी का मिश्रण और पैकिंग कारखाना → ट्रक से भेजा जाता है → जिला मुख्यालय में कंपनी का वितरक → जिसकी गाड़ी हर बृहस्पतिवार पहुँचाती है → सुरेश भैया की दुकान → 250 ग्राम और 1 किलो के पैकेटों में बिकती है → हमारा परिवार।
उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी वितरक की गाड़ी है — पिछले वर्ष बाढ़ में वह नौ दिन नहीं आई और कारखाने में चाय होते हुए भी उनकी दुकान में चाय नहीं थी।”