बाजार की मुख्य विशेषताएँ
- क्रेता — जिसे वस्तु या सेवा चाहिए और जिसके पास भुगतान का साधन है।
- विक्रेता — जिसके पास वह वस्तु या सेवा है और जो उसे देने को तैयार है।
- वस्तुएँ या सेवाएँ, जिनका विनिमय होना है।
- एक कीमत जिस पर दोनों सहमत हों — “किसी भी लेन-देन को पूर्ण करने के लिए कीमत एक महत्वपूर्ण विशेषता है।”
- मोल-तोल, जहाँ कीमत पहले से नियत न हो।
- स्थान या मंच — हाट, दुकानों की गली, मंडी, मॉल, या कोई वेबसाइट अथवा ऐप।
- भुगतान का साधन — नकद, कार्ड, या चित्र 12.4 के ठेले जैसा क्यू.आर. कोड।
- लेन-देन — वस्तु और मुद्रा का वास्तविक आदान-प्रदान, जिससे विनिमय पूरा होता है।
अपनी यात्रा वाले उत्तर में क्या होना चाहिए: कब और कहाँ गए, क्या खरीदा, कीमत कैसे तय हुई, भुगतान कैसे किया, और ऊपर की कम से कम तीन विशेषताएँ नाम लेकर बताई गई हों।
विक्रेता — लगभग चालीस, हर एक के पास ठेला या चादर; चार सब्जी वाले थे, इसलिए होड़ भी थी। क्रेता — बड़ी भीड़, अधिकतर परिवार। वस्तुएँ — सब्जियाँ, फल, प्लास्टिक की बाल्टियाँ, कॉपी-पेंसिल, चूड़ियाँ, और एक व्यक्ति पकौड़े तल रहा था (यह वस्तु नहीं, सेवा है)। कीमत — कॉपी पर ₹40 अधिकतम खुदरा मूल्य छपा था और दुकानदार ने कम नहीं किया; टमाटर पर कोई मूल्य छपा नहीं था और माँ ने कुछ टमाटर नरम होने की बात कहकर ₹40 से ₹35 प्रति किलो करा लिया। भुगतान — कॉपी का नकद, और सब्जी वाले के तराजू से बँधे कार्ड पर क्यू.आर. कोड लगा था। लेन-देन — सब्जियाँ सरकारी मुहर लगे तराजू पर तौली गईं, कपड़े के थैले में डाली गईं और वहीं भुगतान हो गया।
सबसे रोचक बात यह लगी कि मोल-तोल सब्जी पर चला, कॉपी पर नहीं — क्योंकि कॉपी की कीमत उसके विनिर्माता ने छाप दी थी।”