सबसे पहले यह देखिए कि 19 मई 2024 को भारत का कोई भी उपखंड हरे रंग में नहीं है। पूरा देश कम से कम ‘ध्यान दें’ की स्थिति में है और बड़े भाग ‘सतर्क रहें’ या ‘चेतावनी’ में हैं। यह भारतीय ग्रीष्म का चरम है और मानसून अभी आना शेष है — इसीलिए मानचित्र एक ही समय में दो विपरीत प्रकार की विपत्तियाँ दिखा रहा है।
| उपखंड का रंग | अर्थ | मोटे तौर पर कहाँ |
|---|---|---|
| हरा | कोई चेतावनी नहीं | इस मानचित्र पर कहीं नहीं |
| पीला | ध्यान दें (अद्यतन रहें) | अधिकांश मध्य एवं प्रायद्वीपीय भारत, हिमालयी राज्य, अधिकांश पूर्वोत्तर |
| नारंगी | सतर्क रहें (तैयार रहें) | गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम–मेघालय, त्रिपुरा, केरल, तटीय कर्नाटक के भाग |
| लाल | चेतावनी (कार्रवाई करें) | राजस्थान, पंजाब, हरियाणा–दिल्ली; और सुदूर दक्षिण में तमिलनाडु |
प्रतीक जिन परिस्थितियों का संकेत दे रहे हैं —
- ताप लहर (‘+’ चिह्न वाला तापमापी) — पूरे उत्तर-पश्चिम और उत्तरी मैदानों में।
- गरज और चमक (बिजली सहित काला बादल) — सबसे अधिक फैला हुआ प्रतीक; हिमालयी राज्यों, मध्य भारत, पूर्वी राज्यों, पूर्वोत्तर और प्रायद्वीप में।
- भारी / बहुत भारी वर्षा (धूसर और काले वर्षा-बादल) — पूर्वोत्तर, केरल, तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह।
- तेज धरातलीय हवाएँ (वात शंकु) — तमिलनाडु–केरल पट्टी और आंतरिक कर्नाटक में।
- उष्ण और आर्द्र (पीले घेरे में तापमापी) — तटीय क्षेत्रों में, जैसे कोंकण तट, गंगीय पश्चिम बंगाल और आंध्र तट।