अन्वेषण अध्याय 2 आइए पता लगाएँ (चित्र 2.13

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप उस दिन क्या-क्या घटित होते हुए देखते हैं? वे कौन-कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जिनके बारे में भारतीय मौसम विभाग लोगों को सचेत कर रहा है?
उत्तर

सबसे पहले यह देखिए कि 19 मई 2024 को भारत का कोई भी उपखंड हरे रंग में नहीं है। पूरा देश कम से कम ‘ध्यान दें’ की स्थिति में है और बड़े भाग ‘सतर्क रहें’ या ‘चेतावनी’ में हैं। यह भारतीय ग्रीष्म का चरम है और मानसून अभी आना शेष है — इसीलिए मानचित्र एक ही समय में दो विपरीत प्रकार की विपत्तियाँ दिखा रहा है।

उपखंड का रंगअर्थमोटे तौर पर कहाँ
हराकोई चेतावनी नहींइस मानचित्र पर कहीं नहीं
पीलाध्यान दें (अद्यतन रहें)अधिकांश मध्य एवं प्रायद्वीपीय भारत, हिमालयी राज्य, अधिकांश पूर्वोत्तर
नारंगीसतर्क रहें (तैयार रहें)गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम–मेघालय, त्रिपुरा, केरल, तटीय कर्नाटक के भाग
लालचेतावनी (कार्रवाई करें)राजस्थान, पंजाब, हरियाणा–दिल्ली; और सुदूर दक्षिण में तमिलनाडु

प्रतीक जिन परिस्थितियों का संकेत दे रहे हैं —

  • ताप लहर (‘+’ चिह्न वाला तापमापी) — पूरे उत्तर-पश्चिम और उत्तरी मैदानों में।
  • गरज और चमक (बिजली सहित काला बादल) — सबसे अधिक फैला हुआ प्रतीक; हिमालयी राज्यों, मध्य भारत, पूर्वी राज्यों, पूर्वोत्तर और प्रायद्वीप में।
  • भारी / बहुत भारी वर्षा (धूसर और काले वर्षा-बादल) — पूर्वोत्तर, केरल, तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप तथा अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह।
  • तेज धरातलीय हवाएँ (वात शंकु) — तमिलनाडु–केरल पट्टी और आंतरिक कर्नाटक में।
  • उष्ण और आर्द्र (पीले घेरे में तापमापी) — तटीय क्षेत्रों में, जैसे कोंकण तट, गंगीय पश्चिम बंगाल और आंध्र तट।
एक ही मानचित्र पर गर्मी और वर्षा दोनों क्यों: मई के मध्य में उत्तर-पश्चिम भारत शुष्क, नीचे उतरती वायु के नीचे तप रहा होता है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून समुद्र से केरल, तमिलनाडु और अंडमान की ओर बढ़ चुका होता है। देश सचमुच दो भागों में बँटा होता है — एक ताप लहर वाला और दूसरा वर्षा वाला। यही बात अगला अध्याय, जो जलवायु पर है, विस्तार से समझाएगा।
प्र2.
किन राज्यों में चेतावनी के संकेत हैं?
उत्तर

‘चेतावनी (कार्रवाई करें)’ इस मानचित्र का सर्वाधिक गंभीर स्तर है और इसका रंग लाल है। 19 मई 2024 को लाल उपखंड ये हैं —

लाल (चेतावनी — कार्रवाई करें)प्रतीक के अनुसार कारण
राजस्थानभीषण ताप लहर, साथ ही गरज और चमक
पंजाबताप लहर
हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्लीताप लहर
तमिलनाडुबहुत भारी वर्षा और तेज धरातलीय हवाएँ

यदि ‘चेतावनी के संकेत’ का अर्थ व्यापक रूप से “हरे के अतिरिक्त कोई भी रंग” लिया जाए, तो उत्तर होगा — मानचित्र का प्रत्येक राज्य, क्योंकि कोई भी हरा नहीं है। इससे एक स्तर नीचे, नारंगी (सतर्क रहें — तैयार रहें) में गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम और मेघालय, त्रिपुरा, केरल तथा तटीय कर्नाटक का एक भाग आते हैं।

संकेत: मानचित्र को दो परतों में पढ़िए। उपखंड का रंग बताता है कि स्थिति कितनी गंभीर है; उस पर छपा प्रतीक बताता है कि स्थिति है क्या। इस मानचित्र के किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए दोनों चाहिए।
प्र3.
भारत के कौन-से भाग भीषण मौसमी घटनाओं से मुक्त हैं?
उत्तर

कड़ाई से देखें तो कोई नहीं — मानचित्र पर कहीं भी ‘कोई चेतावनी नहीं’ वाला हरा उपखंड नहीं है।

सामान्य मौसम के सबसे निकट वे भाग हैं जो पीले ‘ध्यान दें (अद्यतन रहें)’ में हैं, जहाँ लोगों से केवल पूर्वानुमान पर नजर रखने को कहा गया है और किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। इनमें देश का अधिकांश आंतरिक भाग आता है — मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड — तथा उत्तर में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, जहाँ केवल गरज और चमक का प्रतीक है।

ये भी ‘चेतावनी रहित’ क्यों नहीं हैं: मई का मध्य मानसून-पूर्व तूफानों का चरम समय है। तपती भूमि के ऊपर दोपहर की गर्मी से ऊँचे तूफानी बादल लगभग हर जगह बन जाते हैं, इसलिए देश के अधिकांश भाग में थोड़ी देर की गरज और चमक अपेक्षित रहती है। पीला उपखंड सुरक्षित उपखंड नहीं होता — वह वह होता है जिस पर नजर रखी जा रही है।
संकेत: परीक्षा में उत्तर देते समय पहले रंग की श्रेणी बताइए, फिर क्षेत्र। इससे पता चलता है कि आपने संकेत-सूची (लेजेंड) पढ़ी है, केवल मानचित्र की आकृति से अनुमान नहीं लगाया।
प्र4.
किन राज्यों में ताप लहर की संभावना है?
उत्तर

‘+’ चिह्न वाले लाल तापमापी का प्रतीक ढूँढ़िए। 19 मई 2024 के मानचित्र पर यह उत्तर-पश्चिम से उत्तरी मैदानों होते हुए पूर्व तक फैली एक चौड़ी पट्टी पर दिखाई देता है —

  • लाल (चेतावनी): राजस्थान, पंजाब, हरियाणा–चंडीगढ़–दिल्ली।
  • नारंगी (सतर्क रहें): गुजरात, जिसमें सौराष्ट्र और कच्छ भी सम्मिलित हैं, उत्तर प्रदेश, बिहार।
  • पीला (ध्यान दें): मध्य प्रदेश, तथा आगे पूर्व और दक्षिण में विदर्भ, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा तट की ओर कुछ भाग; हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड की तलहटी तथा कोंकण तट पर भी ताप लहर के प्रतीक दिखाई देते हैं।
यही पट्टी क्यों, दक्षिण क्यों नहीं: ताप लहर के लिए शुष्क वायु, स्वच्छ आकाश और समुद्री पवन का अभाव चाहिए। मई में उत्तर-पश्चिम भारत पर गर्म शुष्क वायु आती है, धूप को रोकने वाला बादल नहीं होता और यह क्षेत्र किसी भी समुद्र से बहुत दूर है। इसके विपरीत प्रायद्वीप सँकरा है — समुद्र कभी दूर नहीं होता और समुद्री पवन अधिकतम तापमान को नीचे रखती है।
संकेत: दोनों तापमापी प्रतीकों में भ्रम न कीजिए। ‘+’ वाला तापमापी ताप लहर है; पीले घेरे के भीतर वाला तापमापी उष्ण और आर्द्र है, जो तटीय दशा है; और ‘–’ वाला नीला तापमापी शीत लहर है।
प्र5.
त्रिपुरा और लक्षद्वीप में चेतावनी के क्या कारण हैं?
उत्तर
स्थानमानचित्र पर रंगदर्शाया गया प्रतीककिस बात की चेतावनी
त्रिपुरानारंगी — सतर्क रहें (तैयार रहें)बिजली सहित काला बादलगरज और चमक के साथ तूफान
लक्षद्वीपद्वीप इतने छोटे हैं कि रंग नहीं भरा जा सकावर्षा का बादल तथा बिजली वाला बादलभारी वर्षा के साथ गरज और चमक

त्रिपुरा पूर्वोत्तर में है, जहाँ बंगाल की खाड़ी से आती गर्म और अत्यंत नम वायु पहाड़ियों से टकराकर ऊपर उठती है। ऊपर उठती यह नम वायु ऊँचे तूफानी बादल बना देती है, इसलिए मई में गरज-चमक वाले मानसून-पूर्व तूफान और उनके साथ चलने वाली तेज हवाएँ सामान्य हैं। खुले खेतों में काम करने वालों के लिए बिजली गिरना यहाँ एक गंभीर संकट है।

लक्षद्वीप अरब सागर में छोटे प्रवाल द्वीपों का समूह है, जो बढ़ते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीधे मार्ग में पड़ता है — मानसून समुद्र के इस भाग में भारतीय मुख्य भूमि से पहले पहुँचता है। नम समुद्री वायु और घिरते बादल यहाँ भारी वर्षा और तूफान लाते हैं, जो द्वीपवासियों की मछली पकड़ने वाली और द्वीपों के बीच चलने वाली छोटी नावों के लिए खतरनाक होते हैं।

दोनों चेतावनियाँ एक जैसी दिखती हैं, किंतु कारण अलग हैं: त्रिपुरा के तूफान पहाड़ियों पर चढ़ती नम वायु से बनते हैं; लक्षद्वीप के तूफान गर्म समुद्र के ऊपर उठती नम वायु से, जब मानसून की धारा आगे बढ़ रही होती है। दोनों के पीछे के उपकरण-पाठ्यांक एक ही बात दिखाएँगे — उच्च आर्द्रता और गिरता वायुदाब।
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