अन्वेषण अध्याय 2 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ऊपर दर्शाए गए चित्रानुसार एक वर्षामापी बनाइए। वर्षामापी को खुले स्थान में रखिए और ऐसी वस्तुओं से दूर रखिए, जो वर्षा के जल संग्रहण में बाधक हो सकती हैं। यह भी सुनिश्चित कीजिए कि वर्षामापी समतल सतह पर हो और हवा से झुके अथवा गिरे नहीं। मापक की सहायता से वर्षा की मात्रा को प्रतिदिन एक ही समय पर एक महीने तक अभिलेखित कीजिए (यदि हिमपात होता है, तो उसे मापने से पहले पिघलने दीजिए)। उस महीने के प्रत्येक सप्ताह में होने वाली औसत वर्षा की गणना कीजिए तथा सप्ताह दर सप्ताह में होने वाली वर्षा के अंतर पर टिप्पणी कीजिए।
उत्तर

कैसे बनाएँ: सीधी दीवार वाली प्लास्टिक की बोतल का ऊपरी एक-तिहाई भाग काटकर उसे उलटकर नीचे वाले भाग में बैठा दीजिए — यही संग्राहक कीप बन जाएगी। नीचे वाले भाग पर मिलीमीटर में अंकित कागज की पट्टी चिपकाइए (या स्केल का उपयोग कीजिए), जिसकी शून्य रेखा भीतर की तली से आरंभ हो। बोतल को किसी भारी डिब्बे में बैठा दीजिए, ताकि हवा उसे गिरा न सके।

वे नियम जिन पर आपके पाठ्यांकों की सार्थकता टिकी है —

  • खुला मैदान — पेड़, दीवार या छत के किनारे से दूर; ऊपर की कोई भी वस्तु या तो वर्षा रोक लेगी या अतिरिक्त जल टपका देगी।
  • समतल एवं दृढ़ सतह; वर्षामापी का मुख क्षैतिज रहना चाहिए।
  • प्रतिदिन एक ही घड़ी-समय पर पाठ्यांक लीजिए और फिर वर्षामापी खाली कर दीजिए।
  • सूखे दिन ‘0’ लिखिए — खाली स्थान छोड़ना और शून्य लिखना एक बात नहीं है।
  • हिमपात या ओले गिरें तो उन्हें पिघलने के बाद मापिए।

नमूना उत्तर (मानसून के एक महीने का) —

सप्ताहदैनिक पाठ्यांक (मि.मी.)कुल (मि.मी.)प्रतिदिन औसत (मि.मी.)
सप्ताह 10, 0, 12, 4, 0, 8, 42828 ÷ 7 = 4.0
सप्ताह 215, 22, 30, 18, 6, 0, 79898 ÷ 7 = 14.0
सप्ताह 32, 0, 0, 5, 11, 3, 02121 ÷ 7 = 3.0
सप्ताह 40, 9, 26, 34, 12, 5, 08686 ÷ 7 = 12.3
महीने का कुल = 28 + 98 + 21 + 86 = 233 मि.मी.
प्रति सप्ताह औसत = 233 ÷ 4 = 58.25 मि.मी.

अंतर पर टिप्पणी: वर्षा एक समान नहीं हुई। महीने की कुल वर्षा का चार-पाँचवाँ भाग सप्ताह 2 और सप्ताह 4 में ही गिरा, जबकि सप्ताह 1 और 3 लगभग सूखे रहे। भारत में वर्षा झड़ियों में आती है, लगातार फुहार के रूप में नहीं — कुछ दिन सक्रिय मानसून, फिर सप्ताह भर का विराम, फिर दूसरी झड़ी।

यह क्यों महत्वपूर्ण है: किसान 233 मि.मी. के मासिक औसत पर योजना नहीं बना सकता। उसके लिए यह महत्वपूर्ण है कि सूखा विराम ठीक उसी समय तो नहीं आया जब नन्ही फसल को जल चाहिए था। इसीलिए भारत मौसम विज्ञान विभाग केवल मौसमी कुल नहीं, बल्कि झड़ियों और विरामों का पूर्वानुमान देता है।
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