अन्वेषण अध्याय 2 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने बीजों को इस प्रकार से पवन में उड़ते देखा है? अगर पवन न होती तो इन बीजों का क्या होता?
उत्तर

हाँ — सिंहपर्णी (डैंडेलियन) के छतरीनुमा बीज, सेमल और मदार (आक) की रुई जैसे बीज, तथा साल, गुलमोहर और मेपल के पंखदार बीज, जो छोटे हेलिकॉप्टर की तरह घूमते हुए उतरते हैं। ये सभी चलती वायु पर सवार होने के लिए ही बने हैं।

यदि पवन न होती —

  • हर बीज सीधे नीचे गिरता और अपने ही जनक पौधे की छाया में जा पड़ता।
  • तब सैकड़ों नन्हे पौधे एक ही छोटे-से टुकड़े में भीड़ बनाकर उगते और उसी प्रकाश, जल तथा पोषक तत्वों के लिए आपस में संघर्ष करते। अधिकांश नष्ट हो जाते।
  • प्रजाति नए क्षेत्रों में फैल ही नहीं पाती — पौधा चल नहीं सकता, इसलिए पवन ही उसका वाहन है
  • यदि उसी स्थान पर आग, बाढ़ या कोई रोग आ जाता, तो पूरी स्थानीय आबादी समाप्त हो सकती थी, क्योंकि कहीं और उसकी संतति उगी ही नहीं होती।
  • पवन-परागित पौधे — घास, मक्का, बाजरा, चीड़ — बीज बना ही नहीं पाते, क्योंकि उनका पराग भी पवन से ही यात्रा करता है।
बीज की बनावट क्यों ऐसी होती है: महीन रोमों की छतरी या पतला कागजी पंख बीज को बहुत कम भार में बड़ा पृष्ठ दे देता है। चलती वायु ऐसे बीज को लंबे समय तक क्षैतिज दिशा में धकेलती रहती है और गुरुत्व उसे देर से नीचे ला पाता है — इसी से कुछ मिलीग्राम का बीज जनक पौधे से सैकड़ों मीटर दूर जा पहुँचता है।
क्या आप जानते हैं? वाहक केवल पवन ही नहीं है। नारियल समुद्र के जल पर तैरकर नए तटों तक पहुँचता है, कँटीले बीज पशुओं के रोओं में उलझकर यात्रा करते हैं, और पक्षी फलों के बीज अपनी बीट के साथ बिखेरते हैं। किंतु पवन सबसे सस्ता और सबसे सामान्य साधन है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ