दो अलग-अलग उपकरणों से — एक यह बताता है कि पवन किस दिशा से आ रही है, दूसरा यह कि कितनी तेज है।
उपकरण
कैसे काम करता है
क्या बताता है
वात दिक्सूचक यंत्र (विंड वेन)
घूमने वाला फलक, जिसके एक छोर पर सूचक और दूसरे पर पूँछ होती है। पवन पूँछ पर धक्का मारती है और सूचक पवन की दिशा में मुड़ जाता है। यह मंद पवन में भी प्रतिक्रिया देता है।
पवन की दिशा
वात शंकु (विंड सॉक)
खंभे पर लगी कपड़े की नली, जो हवाई अड्डों की पक्की सड़क पर तथा राख या गैस निस्तारित करने वाले उद्योगों में लगाई जाती है।
उड़ान भरते और उतरते समय वायुयान चालकों को पवन की दिशा का तुरंत संकेत
पवन वेगमापी (एनीमोमीटर)
उर्ध्वाधर स्तंभ पर तीन या चार धातु के प्याले। पवन जितनी तेज, घूर्णन उतना अधिक; तल पर लगा मीटर निश्चित समय में घूर्णनों की गिनती करता है।
पवन की गति, किलोमीटर प्रति घंटा में
वात दिक्सूचक यंत्र का सूचक पवन की दिशा में मुड़ जाता है; पवन वेगमापी के प्याले पवन तेज होने पर तेजी से घूमते हैं।
दोनों पाठ्यांक क्यों चाहिए: केवल गति से वायुयान चालक यह तय नहीं कर सकता कि उतरना सुरक्षित है, और केवल दिशा से किसान यह नहीं जान सकता कि मिट्टी कितनी जल्दी सूखेगी। दोनों मिलकर बताते हैं कि मौसम किधर से और कितने बल से आ रहा है — इसीलिए कृषक पवन की दिशा से वर्षा की दिशा का अनुमान लगाते हैं और तीव्र गति वाली पवन मिट्टी को जल्दी सुखा देती है।
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