प्र1.
कल्पना कीजिए कि चेन्नई का कृष्णन कश्मीर में रहने वाले आमिर से वार्तालाप कर रहा है। कृष्णन कह रहा है कि पिछली रात की वर्षा के बाद चेन्नई में ठिठुरन हो गई है। आमिर पूछता है कि वहाँ कितनी ठंड है। कृष्णन आमिर को कैसे बताएगा कि चेन्नई में कितनी ठंड है? आखिरकार, कृष्णन के लिए जो मौसम ठंडा है, वह आमिर के लिए बहुत सुहावना हो सकता है!
उत्तर
कृष्णन इसे शब्दों में समझा ही नहीं सकता — उसे आमिर को ऐसे पैमाने पर एक संख्या बतानी होगी जिसे दोनों जानते हों। उसे कहना चाहिए, “यहाँ 20°C है”, न कि “यहाँ ठिठुरन है”।
ऐसा क्यों: ‘ठिठुरन’ कोई माप नहीं, एक अनुभूति है — और यह अनुभूति इस पर निर्भर करती है कि आपका शरीर किसका अभ्यस्त है। चेन्नई लगभग पूरे वर्ष गर्म और आर्द्र रहता है, इसलिए कृष्णन को 20°C ठंडा लगता है। कश्मीर में हिमपात वाली वास्तविक सर्दी पड़ती है, इसलिए आमिर के लिए वही 20°C एक सुहावना दिन है। एक ही वायु दोनों को दो विपरीत अनुभूतियाँ देती है।
जैसे ही कृष्णन “20°C” कहता है, असहमति समाप्त हो जाती है। आमिर को भले ही 20°C सुहावना लगे, अब वह ठीक-ठीक जानता है कि चेन्नई का मौसम कैसा है और वह उसकी तुलना अपने मौसम से कर सकता है। इसी कारण यह पूरा अध्याय सामान्य मानकों से मौसम मापने के विषय में है — यही बात वर्षा (मि.मी.), दाब (मिलीबार), पवन (किमी/घंटा) और आर्द्रता (प्रतिशत) पर भी लागू होती है।
संकेत: कृष्णन एक और उपयोगी संख्या जोड़ सकता है — आर्द्रता। रातभर की वर्षा के बाद 20°C की नम वायु त्वचा पर उसी तापमान की शुष्क वायु से कहीं अधिक ठंडी लगती है।