प्र1.
लेकिन हम ऐसी संख्याओं को कैसे मापते हैं?
उत्तर
आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) नामक उपकरण से। यह सापेक्षिक आर्द्रता को प्रतिशत में दर्शाता है —
| सापेक्षिक आर्द्रता | अर्थ |
|---|---|
| 0 प्रतिशत | बिल्कुल जलवाष्प रहित वायु — प्राकृतिक परिस्थितियों में असंभव |
| 20 – 40 प्रतिशत | शुष्क मौसम |
| 60 – 80 प्रतिशत | आर्द्र मौसम |
| 100 प्रतिशत | जलवाष्प से संतृप्त वायु — अब और वाष्प नहीं समा सकती |
आर्द्रतामापी भी कई प्रकार के होते हैं, जो अपने-अपने सिद्धांत पर निर्भर करते हैं। एक सरल पारंपरिक आर्द्रतामापी में दो तापमापी साथ-साथ लगे होते हैं, जिनमें से एक के बल्ब पर गीला कपड़ा लपेटा जाता है; वायु जितनी शुष्क होगी, कपड़े से जल उतनी तेजी से वाष्पित होगा, वह तापमापी उतना ही ठंडा होगा और दोनों पाठ्यांकों का अंतर उतना ही अधिक होगा। आधुनिक मौसम केंद्रों में इसके स्थान पर वैद्युत संवेदक प्रयुक्त होते हैं।
इसे मापने की चिंता कौन करता है: आर्द्रता का मापन अनेक औद्योगिक प्रक्रियाओं में, जैसे खाद्य प्रसंस्करण में, बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि उत्पाद न अधिक सूखें और न खराब हों। संग्रहालयों में भी आर्द्रता की निगरानी की जाती है, क्योंकि उन्हें अपनी प्रदर्शित वस्तुओं को बचाने के लिए शुष्क वातावरण बनाए रखना पड़ता है। और प्रतिदिन के मौसम बुलेटिन में यह इसलिए दी जाती है, क्योंकि तापमान वास्तव में कैसा लगेगा, यह आर्द्रता ही तय करती है।