अन्वेषण अध्याय 2 इसे अनदेखा न करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वर्ष 2023 में ‘राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ ने समुद्रतल से 4800 मीटर से अधिक ऊँचाई पर सिक्किम की एक हिम-झील (ग्लेशियल लेक) पर स्वचालित मौसम केंद्र स्थापित किया। यह केंद्र आने वाले मौसम की परिस्थितियों के बारे में पूर्व जानकारी प्रदान करता है।
उत्तर

स्वचालित मौसम केंद्र एक ऐसा स्वचालित तंत्र है, जो संवेदकों (सेंसरों) की सहायता से तापमान, आर्द्रता, वायु की गति और दिशा, वर्षा तथा वायुमंडलीय दाब मापता और दर्ज करता है — और यह सब बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के

हिम-झील पर ही क्यों, और स्वचालित केंद्र ही क्यों —

  • 4800 मीटर से अधिक ऊँचाई पर, हिम के बीच, कोई प्रेक्षक पूरे वर्ष दिन में चार बार पाठ्यांक लेने के लिए नहीं बैठ सकता। स्वचालित केंद्र बैठ सकता है।
  • हिम-झीलें केवल ढीली बर्फ और मलबे के बाँध से रुकी रहती हैं। भारी वर्षा या अचानक गर्मी उस बाँध को तोड़ सकती है और घाटी में जल की दीवार भेज सकती है — इसे हिम-झील विस्फोट बाढ़ कहते हैं।
  • केंद्र से नीचे भेजे गए पाठ्यांक पूर्व जानकारी देते हैं — तीस्ता घाटी के नीचे बसे नगरों और जलविद्युत परियोजनाओं को चेतावनी के कुछ घंटे मिल जाते हैं।
स्वचालित केंद्र क्यों बढ़ रहे हैं: इनका उपयोग कृषि, विमानन, नौकायन और पर्यावरणीय निगरानी में व्यापक रूप से होता है और ये नियमित अंतराल पर सटीक और समयबद्ध जानकारी देते हैं। इसी से अब मरुस्थलों, पर्वतों, समुद्र में तैरते बोयों और हिमनदों पर भी मौसम मापा जा सकता है — ठीक उन्हीं स्थानों पर, जहाँ से सबसे खतरनाक मौसम आरंभ होता है।
क्या आप जानते हैं? सिक्किम का अपना इतिहास बताता है कि यह क्यों आवश्यक है — तीस्ता बेसिन में हिम-झील से आई विनाशकारी बाढ़ यह राज्य देख चुका है। स्रोत पर लगाए गए उपकरण किसी पर्वतीय राज्य के लिए सबसे सस्ता सुरक्षा-कवच हैं।
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