अन्वेषण अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वे यह कैसे करते हैं? क्या वे केवल आकाश को देखकर अनुमान लगाते हैं?
उत्तर

नहीं — वे तुक्का नहीं लगाते। मौसम विज्ञान मौसम और इसके विकास का व्यवस्थित अध्ययन है, और यही अध्ययन मौसम के पूर्वानुमान का आधार है।

मौसम-विज्ञानी तीन चरणों में काम करते हैं —

  1. मापन। मौसम केंद्रों के उपकरण प्रतिदिन निश्चित समय पर तापमान, वर्षा, दाब, पवन और आर्द्रता दर्ज करते हैं।
  2. संग्रहण। सैकड़ों केंद्रों के ये पाठ्यांक महीनों और वर्षों तक एकत्र किए जाते हैं ताकि प्रतिरूप दिखाई दें — इसी को अध्याय सांख्यिकी कहता है, अर्थात प्रतिरूपों को पहचानने, घटनाओं को समझने अथवा भविष्यवाणियाँ करने के लिए आँकड़ों के संग्रहण और विश्लेषण की तकनीक।
  3. पूर्वानुमान। इन्हीं आँकड़ों पर वैज्ञानिक विधियाँ लगाकर बताया जाता है कि किसी प्रदेश विशेष में कुछ घंटों, कुछ दिनों या कुछ सप्ताह बाद मौसम कैसा होगा।
संकेत: आकाश देखना आज भी काम का है — घिर आया काला बादल एक वास्तविक प्रमाण है। किंतु आँख एक समय में केवल एक स्थान का आकाश देख पाती है। उपकरण पूरे देश को, दिन-रात देखते हैं और जो देखा उसे याद भी रखते हैं।
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