प्र1.
वे यह कैसे करते हैं? क्या वे केवल आकाश को देखकर अनुमान लगाते हैं?
उत्तर
नहीं — वे तुक्का नहीं लगाते। मौसम विज्ञान मौसम और इसके विकास का व्यवस्थित अध्ययन है, और यही अध्ययन मौसम के पूर्वानुमान का आधार है।
मौसम-विज्ञानी तीन चरणों में काम करते हैं —
- मापन। मौसम केंद्रों के उपकरण प्रतिदिन निश्चित समय पर तापमान, वर्षा, दाब, पवन और आर्द्रता दर्ज करते हैं।
- संग्रहण। सैकड़ों केंद्रों के ये पाठ्यांक महीनों और वर्षों तक एकत्र किए जाते हैं ताकि प्रतिरूप दिखाई दें — इसी को अध्याय सांख्यिकी कहता है, अर्थात प्रतिरूपों को पहचानने, घटनाओं को समझने अथवा भविष्यवाणियाँ करने के लिए आँकड़ों के संग्रहण और विश्लेषण की तकनीक।
- पूर्वानुमान। इन्हीं आँकड़ों पर वैज्ञानिक विधियाँ लगाकर बताया जाता है कि किसी प्रदेश विशेष में कुछ घंटों, कुछ दिनों या कुछ सप्ताह बाद मौसम कैसा होगा।
संकेत: आकाश देखना आज भी काम का है — घिर आया काला बादल एक वास्तविक प्रमाण है। किंतु आँख एक समय में केवल एक स्थान का आकाश देख पाती है। उपकरण पूरे देश को, दिन-रात देखते हैं और जो देखा उसे याद भी रखते हैं।