अन्वेषण अध्याय 2 प्रश्न और क्रियाकलाप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मौसम के तत्वों का उनको मापने वाले उपकरणों के साथ मिलान कीजिए। (1) आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर) (2) पवन वेगमापी (एनीमोमीटर) (3) वायुदाबमापी (बैरोमीटर) (4) तापमापी (थर्मामीटर) (5) वर्षामापी (रेन गेज) — (क) वर्षण (प्रेसिपिटेशन) (ख) वायुमंडलीय दबाव (ग) वायु की दिशा और गति (घ) आर्द्रता (ङ) तापमान
उत्तर
प्रयुक्त उपकरणमौसम का तत्वइकाई
(1) आर्द्रतामापी (हाइग्रोमीटर)(घ) आर्द्रतासापेक्षिक आर्द्रता (%)
(2) पवन वेगमापी (एनीमोमीटर)(ग) वायु की दिशा और गतिकिमी/घंटा
(3) वायुदाबमापी (बैरोमीटर)(ख) वायुमंडलीय दबावमिलीबार (mb)
(4) तापमापी (थर्मामीटर)(ङ) तापमान°C (अथवा °F)
(5) वर्षामापी (रेन गेज)(क) वर्षण (प्रेसिपिटेशन)मिलीमीटर (मि.मी.)
1 – घ    2 – ग    3 – ख    4 – ङ    5 – क
याद रखने का सरल उपाय: अंग्रेजी नामों की ग्रीक जड़ें ही उत्तर बता देती हैं — ह्यूग्रोस = नम (हाइग्रोमीटर), एनेमॉस = पवन (एनीमोमीटर), बैरोस = भार (बैरोमीटर), थर्मे = ऊष्मा (थर्मामीटर)। वर्षामापी के लिए तो हिंदी नाम ही पर्याप्त है।
एक छोटी सावधानी: अकेला पवन वेगमापी केवल पवन की गति मापता है; दिशा उसी खंभे पर लगे वात दिक्सूचक यंत्र या वात शंकु से मिलती है। पुस्तक ने दोनों को एक साथ रखा है, क्योंकि मौसम केंद्र में ये सदैव जोड़े में ही काम करते हैं।
प्र2.
ज्योत्सना यह सोच रही है कि जून में मुंबई में अपनी विद्यालय यात्रा के समय कौन-से कपड़े साथ ले जाए। वह मौसम के पूर्वानुमान को देखती है, जो 29 डिग्री सेल्सियस और 84 प्रतिशत आर्द्रता की भविष्यवाणी करता है। आप उसको क्या सलाह देंगे?
उत्तर

दोनों संख्याओं को साथ पढ़िए। अकेला 29°C बहुत गर्म नहीं है — किंतु 84 प्रतिशत सापेक्षिक आर्द्रता बहुत अधिक है, इसलिए पसीना वाष्पित ही नहीं हो पाएगा और दिन 29°C से कहीं अधिक गर्म तथा चिपचिपा लगेगा। मुंबई में जून मानसून के आरंभ का महीना भी है, इसलिए भारी वर्षा की पूरी संभावना है।

29°C + 84 प्रतिशत आर्द्रता → वाष्पन बहुत कम → पसीने से ठंडक नहीं
गर्म, चिपचिपा और उमस भरा अनुभव, और धुले कपड़े देर तक नहीं सूखेंगे

ज्योत्सना को मेरी सलाह —

  • हल्के, ढीले और पतले सूती कपड़े ले जाए — हल्के रंग के और कहीं भी कसे हुए नहीं। सूती कपड़ा पसीना सोखता है और हवा आने-जाने देता है; सिंथेटिक और डेनिम असहज लगेंगे।
  • अपने अनुमान से अधिक जोड़ी कपड़े रखे, क्योंकि इतनी आर्द्रता में नम कपड़े रातभर में नहीं सूखेंगे।
  • बरसाती या छाता, और ऐसी चप्पल-सैंडल जो पानी में खराब न हों — जून में मुंबई में मानसून रहता है।
  • पुस्तकों, फोन और टिकट के लिए प्लास्टिक की थैली या जलरोधी पाउच, तथा एक जोड़ी सूखे जूते अलग से।
  • पानी की बोतल — उमस भरी गर्मी में बिना अधिक गर्मी अनुभव किए भी शरीर से बहुत जल निकल जाता है।
  • ऊनी कपड़े नहीं। जून की मुंबई में उनकी कोई आवश्यकता नहीं।
यहाँ निर्णायक संख्या तापमान नहीं, आर्द्रता है: पसीना शरीर को तभी ठंडा करता है जब वह वाष्पित हो। जो वायु पहले से 84 प्रतिशत जलवाष्प से भरी है, उसमें वाष्पन बहुत धीमा होता है — इसलिए शरीर की शीतलन प्रणाली लगभग काम नहीं करती। यही कारण है कि तटीय मुंबई का 29°C शुष्क मई की दिल्ली के 35°C से भी अधिक असहनीय लगता है।
प्र3.
कल्पना कीजिए कि आपका एक छोटा समूह वर्षामापी यंत्र स्थापित कर रहा है। यहाँ उसे स्थापित करने के स्थान के कुछ विकल्प दिए गए हैं — 1. विद्यालय का सब्जी उद्यान। 2. विद्यालय भवन की छत। 3. ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान। 4. विद्यालय परिसर की दीवार। 5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदा। अपने समूह के साथ चर्चा कीजिए और सर्वाधिक उपयुक्त स्थान का निर्धारण कीजिए। अपने निर्णय के कारणों को लिखिए।
उत्तर

हमारे समूह का निर्णय : विकल्प 3 — ऊँचे चबूतरे के साथ खुला मैदान।

इसे चुनने के कारण —

  • यह खुला है, इसलिए ऊपर कोई पेड़, दीवार या छत नहीं है जो वर्षा रोके या अतिरिक्त जल टपकाए।
  • ऊँचा चबूतरा वर्षामापी को भूमि से ऊपर रखता है, जिससे कीप में मिट्टी के छींटे नहीं जाते और भूमि पर बहता जल भीतर नहीं आ पाता।
  • चबूतरा समतल, दृढ़ और स्थिर आधार देता है, इसलिए यंत्र सीधा खड़ा रहेगा और हवा से न झुकेगा, न गिरेगा — पृष्ठ 34 की गतिविधि यही आग्रह करती है।
  • वर्षा में भी प्रतिदिन एक ही समय पर वहाँ पहुँचना सरल है और किसी को असुविधा नहीं होती।

अन्य विकल्प क्यों छोड़े —

स्थानअनुपयुक्त क्यों
1. विद्यालय का सब्जी उद्यानऊपर उगे पौधे वर्षा रोक लेंगे; क्यारियों की सिंचाई से अतिरिक्त जल आ जाएगा; खुदी हुई नरम मिट्टी में यंत्र झुक जाएगा
2. विद्यालय भवन की छतवहाँ पवन कहीं अधिक तेज और अनियमित होती है, जो वर्षा को कीप के मुख के ऊपर से उड़ा ले जाती है और पाठ्यांक कम आ जाता है; यंत्र गिर भी सकता है
4. विद्यालय परिसर की दीवारसँकरी और अस्थिर जगह; दीवार एक ओर से ओट देती है और दूसरी ओर छींटे डालती है, और यंत्र के गिरने की पूरी आशंका रहती है
5. विद्यालय प्रयोगशाला का बरामदायह ढका हुआ है। वर्षा यंत्र तक पहुँचेगी ही नहीं — पाठ्यांक निरर्थक होगा
इन सबके पीछे का नियम: वर्षामापी को ठीक उतनी ही वर्षा पकड़नी चाहिए जितनी उस भूखंड पर गिरती — न कम, न अधिक। जो भी वस्तु उसे ओट दे, छींटे डाले, झुका दे या असामान्य पवन में डाल दे, वह पाठ्यांक बिगाड़ देगी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मानक इससे भी आगे जाते हैं — यंत्र का मुख भूमि से लगभग 30 सेंटीमीटर ऊपर, समतल खुले स्थान पर, और किसी भी वस्तु से उसकी ऊँचाई की कम से कम दोगुनी दूरी पर रखा जाता है।
प्र4.
नीचे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग, जम्मू और कश्मीर से ली गई एक सारणी है। उपलब्ध आँकड़ों को देखते हुए, दिखाए गए दिन को, जम्मू और कश्मीर के विभिन्न भागों में मौसम की स्थिति को दर्ज करने हेतु एक लघु आलेख लिखिए। (संकेत – ताप सीमा, अधिकतम और न्यूनतम तापमान, आर्द्रता, वर्षा आदि को सम्मिलित करें।) ध्यान दें – ACT (एक्चुअल अर्थात वास्तविक), NOR (नॉर्मल अर्थात सामान्य), DEP (डिपार्चर अर्थात सामान्य से हटकर), R/F (रेनफॉल अर्थात वृष्टि), S/N (स्नोफॉल अर्थात हिमपात), TR (ट्रेस अमाउंट अर्थात वर्षण की माप)।
उत्तर

सबसे पहले प्रत्येक केंद्र की ताप सीमा निकालिए (वास्तविक अधिकतम − वास्तविक न्यूनतम) —

केंद्रअधिकतम (°C)न्यूनतम (°C)ताप सीमा (°C)अधिकतम का DEP (°C)24 घंटे की वर्षा (मि.मी.)24 घंटे का हिमपात (से.मी.)आर्द्रता 8:30 / 17:30 (%)
श्रीनगर6.50.26.3−2.413.42.489 / 89
काजीगुंड3.2−0.43.6−5.336.222.097 / 90
पहलगाम1.1−4.15.2−4.519.423.096 / 96
कुपवाड़ा5.1−0.75.8−3.421.910.097 / 94
कूकेरंग2.6−1.44.0−4.035.230.096 / 97
गुलमर्ग−2.6−7.65.0−4.035.235.076 / 100
मुजफ्फराबाद8.55.62.925.893 / —

नमूना उत्तर — 1 फरवरी 2024 के सायंकालीन बुलेटिन का आलेख:

“नमस्कार। सुनिए 1 फरवरी 2024 का जम्मू और कश्मीर का मौसम समाचार, जो भारत मौसम विज्ञान विभाग के सायंकालीन आँकड़ों पर आधारित है।

घाटी में आज का दिन ठंडा, आर्द्र और हिमपात वाला रहा। सभी केंद्रों का अधिकतम तापमान उस तिथि के सामान्य से नीचे रहा। श्रीनगर का अधिकतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सामान्य से 2.4 डिग्री कम है, और न्यूनतम 0.2 डिग्री रहा — अर्थात ताप सीमा 6.3 डिग्री। कुपवाड़ा में अधिकतम 5.1 और न्यूनतम −0.7 डिग्री रहा, जबकि काजीगुंड केवल 3.2 डिग्री तक ही पहुँच सका, जो सामान्य से पूरे 5.3 डिग्री कम है, और वहाँ रात का न्यूनतम −0.4 डिग्री रहा।

ऊँचाई वाले स्थान और भी ठंडे रहे। पहलगाम में अधिकतम 1.1 और न्यूनतम −4.1 डिग्री, तथा कूकेरंग में 2.6 और −1.4 डिग्री दर्ज हुआ। गुलमर्ग क्षेत्र का सबसे ठंडा स्थान रहा — वहाँ तापमान दिनभर हिमांक से ऊपर गया ही नहीं; अधिकतम −2.6 और कड़कड़ाता न्यूनतम −7.6 डिग्री रहा। उधर मुजफ्फराबाद सबसे गर्म रहा, दिन में 8.5 और रात में 5.6 डिग्री — और वहीं दिन-रात का अंतर सबसे कम, केवल 2.9 डिग्री रहा।

आज प्रातः साढ़े आठ बजे तक के चौबीस घंटों में व्यापक वर्षण हुआ। सर्वाधिक 36.2 मिलीमीटर वर्षा और 22 सेंटीमीटर हिमपात काजीगुंड में हुआ; कूकेरंग में 35.2 मिलीमीटर वर्षा और 30 सेंटीमीटर हिमपात; और सर्वाधिक हिमपात गुलमर्ग में, 35 सेंटीमीटर, साथ में 35.2 मिलीमीटर वर्षा। पहलगाम में 19.4 मिलीमीटर और 23 सेंटीमीटर, कुपवाड़ा में 21.9 मिलीमीटर और 10 सेंटीमीटर, तथा मुजफ्फराबाद में 25.8 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। श्रीनगर सबसे कम प्रभावित रहा — 13.4 मिलीमीटर वर्षा और 2.4 सेंटीमीटर हिमपात। दिन में भी अधिकांश केंद्रों पर वर्षण जारी रहा, यद्यपि श्रीनगर में प्रातः साढ़े आठ से सायं साढ़े पाँच बजे के बीच केवल अत्यल्प (TR) मात्रा ही दर्ज हुई।

वायु सर्वत्र अत्यंत आर्द्र रही। प्रातःकालीन सापेक्षिक आर्द्रता 76 से 97 प्रतिशत के बीच रही, और सायंकाल तक गुलमर्ग में यह 100 प्रतिशत — अर्थात संतृप्त वायु — तक पहुँच गई, जबकि कूकेरंग में 97 और पहलगाम में 96 प्रतिशत रही। श्रीनगर में यह दिनभर 89 प्रतिशत पर स्थिर रही।

संक्षेप में — ठंडा, मेघाच्छादित और हिमपात वाला दिन, जो इस ऋतु के लिए सामान्य से अधिक ठंडा रहा और ऊपरी क्षेत्रों में ताजा भारी हिमपात हुआ। जम्मू–श्रीनगर राजमार्ग तथा गुलमर्ग और पहलगाम की ओर जाने वाले यात्री निकलने से पहले मार्ग की स्थिति अवश्य देख लें, और निवासी ठंड से बचाव करें। नमस्कार।”

DEP स्तंभ कैसे पढ़ें: DEP सामान्य से विचलन है — अर्थात आज का दिन उस तिथि के औसत से कितना दूर रहा। यहाँ अधिकतम तापमान का DEP हर केंद्र पर ऋणात्मक है, और यही सारणी का सबसे स्पष्ट तथ्य है — यह पूरे क्षेत्र में सामान्य से ठंडा दिन था। रोचक बात यह है कि न्यूनतम तापमान के DEP धनात्मक हैं, क्योंकि जिस घने मेघाच्छादन ने हिमपात कराया, उसी ने कंबल का काम करके रात को उतना ठंडा नहीं होने दिया जितनी वह सामान्यतः होती है।
संकेत: मुजफ्फराबाद की पंक्ति में NOR और DEP के स्थान पर डैश (–) हैं — उस केंद्र के सामान्य मान उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए विचलन निकाला ही नहीं जा सकता। वास्तविक बुलेटिन में इसे छिपाया नहीं, बताया जाता है।
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