अन्वेषण अध्याय 3 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपकी प्रिय ऋतुएँ कौन-सी हैं? अपने कारणों सहित इस पर एक संक्षिप्त निबंध लिखिए।
उत्तर

यह आपका अपना निबंध है, इसलिए इसे कोई और नहीं लिख सकता — किंतु अच्छा निबंध तीन काम करता है : वह ऋतु का नाम लेता है, दो प्रकार के कारण देता है (मौसम कैसा रहता है और आप उसमें क्या करते हैं), और ऋतु को अपने स्थान से जोड़ता है — वहाँ का भोजन, त्योहार, फूल, खेल।

लिखने की रूपरेखा :

  1. ऋतु का नाम और आपके यहाँ वह किन महीनों में रहती है।
  2. मौसम का वर्णन — तापमान, वर्षा, हवा, प्रकाश।
  3. आस-पास क्या बदलता है — वृक्ष, पक्षी, फसलें, वस्त्र।
  4. आप उसमें क्या करते हैं — त्योहार, भोजन, खेल, छुट्टियाँ।
  5. अंत में एक वाक्य — यह ऋतु आपको सबसे प्रिय क्यों है।

नमूना उत्तर: “मेरी प्रिय ऋतु वर्षा है। जून के अंत से सितंबर तक हमारे कस्बे का आकाश धूसर हो जाता है और पहली ही बौछार हर पत्ते की धूल धो देती है। हवा में गीली मिट्टी की गंध भर जाती है और तापमान 40 डिग्री की तपन से उतरकर सुखद 30 डिग्री हो जाता है। घर के पीछे के खेत भूरे से ऐसे हरे हो जाते हैं कि आँखें चौंधिया जाएँ, और रात में मेंढक बोलने लगते हैं। साँझ को गरम पकौड़े और चाय मिलती है और नाली में कागज की नावें चलती हैं। मुझे वर्षा सबसे प्रिय है क्योंकि यही वह ऋतु है जो बाकी सब को जीवन देती है — इसके बिना न फसल होती, न फसल का त्योहार, और न हमारे कुएँ में पानी।”

संकेत: ‘मुझे गर्मी अच्छी लगती है क्योंकि वह अच्छी है’ जैसे वाक्य न लिखें। हर ‘अच्छा’ के स्थान पर एक तथ्य रखिए — कोई तापमान, कोई गंध, कोई भोजन, कोई ध्वनि।
प्र2.
आपके क्षेत्र में ऋतुओं से जुड़ी विशेष घटनाओं का पता लगाने के लिए तीन या चार विद्यार्थियों के समूह में चर्चा कीजिए। इनसे संबंधित गीत, उत्सवों से संबंधित भोजन, विभिन्न ऋतुओं से संबंधित प्रचलित प्रथाएँ आदि को लिखिए और कक्षा के साथ साझा कीजिए।
उत्तर

क्रियाकलाप कैसे करें :

  1. वर्ष को समूह में बाँट लीजिए — एक सदस्य एक ऋतु ले।
  2. घर और पड़ोस में पूछिए : इस ऋतु में कौन-सा त्योहार आता है? उसमें क्या पकता है? कोई गीत, नृत्य, रंगोली या विशेष वेशभूषा है?
  3. यह भी लिखिए कि वह उत्सव उसी ऋतु में क्यों पड़ता है — अधिकांश बुवाई, फसल या पहली वर्षा से जुड़े होते हैं।
  4. चार या छह स्तंभों (एक ऋतु के लिए एक) का चार्ट बनाइए और उस पर चित्र या रेखाचित्र लगाइए।

अच्छे विवरण में क्या होना चाहिए — प्रत्येक उत्सव के लिए : नाम, ऋतु और महीना, आयोजन का कारण, भोजन, गीत या नृत्य, और भाग लेने वाले लोग।

नमूना उत्तर (असम का कोई समूह ऐसा लिख सकता है):

ऋतुउत्सवउसी ऋतु में क्योंभोजन, गीत, प्रथा
वसंत (बोहाग)रोंगाली बिहूकृषि वर्ष का आरंभ, बुवाई का समयपीठा और लारू; ढोल और पेपा के साथ बिहू नृत्य
वर्षाअंबुबाचीमाना जाता है कि पहली वर्षा में धरती विश्राम कर नवीन होती हैखेती रुक जाती है; कामाख्या मंदिर तीन दिन बंद रहता है
शरद/शीतमाघ बिहूफसल घर आ चुकी होती है, भंडार भरे होते हैंसामूहिक भोज, मेजी की अलाव, पारंपरिक खेल
स्वयं जाँचिए: तुलना के लिए अध्याय का चित्र 3.11 ही ग्यारह उत्सव देता है — बिहू, छठ पूजा, मकर संक्रांति, बैसाखी, पोंगल, अवि शीतकालीन महोत्सव, हेमिस, लोसुंग, गुडी पड़वा, लोहड़ी और ओणम।
प्र3.
क्या आप जानते हैं कि आपके क्षेत्र में कौन-से वृक्ष शीत ऋतु के आगमन से पूर्व अपना रंग बदलते हैं? क्या ऐसे वृक्ष हैं, जो इस समय अपने पत्ते गिरा देते हैं? आपके विचार में ऐसा क्यों होता है? इन वृक्षों के स्थानीय नामों का पता लगाइए और उनके विषय में लिखिए।
उत्तर

आप क्या पाएँगे। भारत के अधिकांश भागों में पत्ते शरद में नहीं, बल्कि शीत के अंत और ग्रीष्म के आरंभ (फरवरी–अप्रैल) में गिरते हैं, और नई कोंपलें हरी होने से पहले लाल या ताम्र रंग की होती हैं। ये वृक्ष देखिए :

वृक्षस्थानीय नामक्या करता है
सालसाल, सखुआशुष्क महीनों में पत्ते गिराता है; नई कोंपलें गुलाबी-भूरी
सागौनसागवान, टेकूशीत-शुष्क ऋतु में बड़े पत्ते भूरे होकर गिर जाते हैं
पलाशपलाश, टेसू, किंशुकपत्ते गिराकर ठूँठ डालियों पर दहकते नारंगी फूल खिलाता है
सेमलसेमल, शाल्मलिशीत में नंगा, फिर लाल फूलों से भर जाता है
देशी बादामबादाम, देशी बादामगिरने से पहले पत्ते चटक लाल-पीले हो जाते हैं
अमलतासअमलतास, गोल्डन शॉवर ट्री, कणिक्कोन्नापत्ते विरल होकर पीले फूलों की झालर लटक जाती है — दक्षिण में मानसून का संकेत
ऐसा क्यों होता है: पत्ते गिराना वृक्ष का जल बचाने का उपाय है। पत्ते के सूक्ष्म छिद्रों से लगातार जल उड़ता रहता है। जब मिट्टी सूखी और ठंडी — या सूखी और तपती — हो, तो वृक्ष उस जल की भरपाई नहीं कर पाता, इसलिए वह पत्ते गिराकर प्रतीक्षा करता है। रंग पहले बदलता है : वृक्ष पत्ते से हरा वर्णक (पर्णहरित) और उपयोगी भोजन वापस खींच लेता है, और जो पीले-नारंगी-लाल वर्णक पहले से थे, वे दिखने लगते हैं। हिमालयी ढलानों जैसे अत्यधिक ठंडे स्थानों में यही उपाय वृक्ष को पाले से भी बचाता है — इसीलिए अध्याय कहता है कि शरद के आते ही कुछ वृक्ष पत्ते गिरा देते हैं या रंग बदल लेते हैं।

कैसे लिखें: प्रत्येक वृक्ष का स्थानीय नाम, यदि मिल सके तो वानस्पतिक नाम, पत्ते गिरने का महीना, फूल आने का महीना लिखिए और एक दबाया हुआ पत्ता चिपकाइए। जो नाम पुस्तकों में न मिलें, वे किसी वृद्धजन या माली से पूछिए।

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