अन्वेषण अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्यों एक शक्तिशाली शासक ने अपने सिक्कों पर महात्मा बुद्ध और शिवजी को अंकित किया होगा? यह उसके मूल्यों और प्राथमिकताओं के बारे में क्या दर्शाता है?
उत्तर

क्योंकि सिक्का किसी शासक का सबसे दूर तक पहुँचने वाला सार्वजनिक वक्तव्य था, और कनिष्क ने उसके द्वारा यह कहा कि उनका राज्य हर मत के लोगों का है

कारणमूल्यों और प्राथमिकताओं के विषय में यह क्या दर्शाता है
सभी आस्थाओं का सम्मानएक सिक्के पर बुद्ध, दूसरे पर शिव — उन्होंने प्रजा पर कोई एक मत नहीं थोपा। अध्याय बताता है कि कुषाण मूर्तिकला में भी “विविध देवताओं का चित्रण मिलता है, जो विभिन्न विचारधाराओं के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को दर्शाता है”
मिश्रित साम्राज्य की निष्ठा जीतनाउनका साम्राज्य मध्य एशिया से उत्तर भारत तक फैला था, जिसमें बौद्ध, शिव-उपासक, ग्रीक और ईरानी सभी थे। उनके देवताओं का सम्मान बल की अपेक्षा साम्राज्य को अधिक मजबूती से जोड़ता था
अपनापनविदेशी मूल का शासक अपनी मुद्रा पर भारतीय देवता अंकित कर यह कहता है — यह मेरी भूमि है और ये मेरे भी देवता हैं
व्यक्तिगत आस्थावे वेदी पर आहुति देते हुए दिखाए गए हैं — ऐसा राजा जो केवल आदेश नहीं देता, उपासना भी करता है
व्यापार और प्रतिष्ठासिक्के रेशम मार्ग पर यात्रा करते थे। परिचित और आदरणीय चित्र उनके स्वर्ण को समस्त एशिया में स्वीकार्य बनाते थे
यह उल्लेखनीय क्यों है : वे “कुषाण वंश के सबसे शक्तिशाली शासक” थे और चाहते तो एक ही मत को अनिवार्य कर सकते थे। इसके स्थान पर उन्होंने बहुलता चुनी — वही मूल्य जो अध्याय खारवेल में, सातवाहनों में और पांड्यों में भी पाता है। भिन्न-भिन्न मूल के शासकों द्वारा बार-बार किया गया यही चुनाव वह है जिसे पुस्तक ‘भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि' कहती है।
प्र2.
क्या आप आज के कुछ आधुनिक उदाहरण जानते हैं, जहाँ मुद्राओं पर प्रतीकात्मक चित्र अंकित किए जाते हैं?
उत्तर

हाँ — आपकी जेब का हर नोट और सिक्का चुने हुए प्रतीक लिए हुए है। पहले भारतीय मुद्रा देखिए।

आधुनिक उदाहरणप्रतीकवह क्या कहना चाहता है
हर भारतीय नोटसारनाथ का सिंह-शीर्ष (राज्य-चिह्न) और अशोक चक्रगणराज्य की सत्ता, और अशोक से जानबूझकर जोड़ा गया सूत्र — ठीक वैसा ही उधार जैसा कनिष्क के सिक्कों में दिखता है
भारतीय नोटों का पिछला भागस्मारक और उपलब्धियाँ — लाल किला, कोणार्क का सूर्य मंदिर, साँची स्तूप, मंगलयान, रानी की वावराष्ट्रीय धरोहर और गौरव; नोट भारत के इतिहास और विज्ञान की एक छोटी प्रदर्शनी हैं
सभी भारतीय नोटभाषा-पट्टी पर 17 भाषाओं में मूल्यमुद्रा पर छपी ‘विविधता में एकता' — एक देश, अनेक भाषाएँ
स्मारक सिक्केवर्षगाँठों पर जारी चित्र और चिह्न — कोई नेता, कोई आंदोलन, कोई संस्थाराष्ट्र जिसे स्मरण रखना चाहता है
अन्य देशयूरो के नोटों पर पुल और द्वार जो किसी एक देश के नहीं; ब्रिटिश सिक्कों पर राजा या रानीपुल = राष्ट्रों के बीच जुड़ाव; राजा = सत्ता का स्रोत
अपरिवर्तित तर्क : मुद्रा देश के हर हाथ से गुज़रती है। इसलिए जो उसे जारी करता है, वह उस पर वही चित्र अंकित करता है जो वह सबको दिखाना और स्वीकार कराना चाहता है। कनिष्क के स्वर्ण सिक्के और आज के ₹500 के नोट के बीच दो हजार वर्ष हैं, पर चित्रों के पीछे का तर्क बिलकुल वही है।
यह कीजिए : घर से कोई दो नोट लीजिए, उन पर बने हर प्रतीक की सूची बनाइए और प्रत्येक के बारे में एक पंक्ति लिखिए कि वह क्या कहना चाहता है। फिर अपनी सूची की तुलना पृष्ठ 137 पर कनिष्क के सिक्कों के वर्णन से कीजिए।
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