अन्वेषण अध्याय 6 आइए विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप जानते हैं कि गांधार कहाँ है? क्या यह आपको महाकाव्य महाभारत के किसी पात्र की याद दिलाता है?
उत्तर

गांधार कहाँ था। गांधार उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम का प्राचीन प्रदेश था — पेशावर और स्वात की घाटियाँ, तक्षशिला से लेकर काबुल की ओर तक; अर्थात् वर्तमान उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी अफगानिस्तान। अध्याय इस कला शैली को “पंजाब के पश्चिमी भागों” में विकसित बताता है। यही वे मार्ग थे जिनसे इंडो-ग्रीक, शक और कुषाण भारत में आए — और इसीलिए वहाँ की कला में ग्रीक-रोमन तथा भारतीय तत्वों का मेल दिखता है।

महाभारत से संबंध। हाँ — गांधारी, जिनके नाम का अर्थ ही है ‘गांधार की कन्या'। वे गांधार की राजकुमारी थीं, जिनका विवाह नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र से हुआ और जिन्होंने पति की स्थिति में सहभागी होने के लिए स्वयं अपनी आँखों पर पट्टी बाँध ली। वे सौ कौरवों की माता थीं, जिनमें ज्येष्ठ दुर्योधन थे। उनके भाई थे शकुनि, गांधार के राजकुमार, जिनके द्यूत-क्रीड़ा के कारण पांडवों को वनवास हुआ।

गांधार (प्रदेश) → गांधारी (‘गांधार की') → धृतराष्ट्र की पत्नी, कौरवों की माता
उनके भाई : शकुनि, गांधार के राजकुमार
नाम का महत्व : गांधार कोई विदेशी भूमि नहीं थी जहाँ संयोगवश भारतीय कला बन गई हो। भारत के अपने महाकाव्य में उसका उल्लेख उस राज्य के रूप में है जिसकी राजकुमारी हस्तिनापुर के राजपरिवार में ब्याही गई। ग्रीक शैली के आने से बहुत पहले वह क्षेत्र भारतीय जगत का अंग था — इसीलिए वहाँ की मूर्तिकला समन्वय है, आयात नहीं।
क्या आप जानते हैं? अफगानिस्तान का कंधार नगर आज भी उस प्राचीन नाम की स्मृति संजोए है, और अशोक ने वहाँ अपना एक शिलालेख छोड़ा — ग्रीक और आरामाइक भाषा में, ताकि उस क्षेत्र के लोग उसे पढ़ सकें।
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