अन्वेषण अध्याय 6 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब आप मथुरा और गांधार कला शैलियों की मूल विशेषताओं से परिचित हो चुके हैं। अगले पृष्ठ पर चित्र 6.27 में दी गई कलाकृतियों को देखिए और पहचानिए। क्या आप बता सकते हैं कि चित्र में दी गई प्रत्येक कलाकृति किस कला शैली से संबंधित है? अपने विचार कारण सहित लिखिए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
उत्तर

पहले दो कसौटियाँ मन में बिठा लीजिए — पत्थर और आकृति का गठन

गांधार शैलीमथुरा शैली
पत्थरस्लेटी-काला शिस्टलाल (प्रायः चित्तीदार) बलुआ पत्थर — कभी हल्का पीला
प्रभावग्रीक-रोमन तथा भारतीय तत्वों का समायोजनविशिष्ट भारतीय; ग्रीको-रोमन प्रभाव बहुत कम
आकृतियाँयथार्थ शरीर-रचना, गहरी चुन्नटों वाले उड़ते वस्त्र, लहरदार केश, सूक्ष्म विवरणमृदुलाकार (गोल-मटोल) चिकनी आकृतियाँ, शरीर से चिपके पतले वस्त्र, चौड़े मुख
विषयप्रायः बुद्ध और बोधिसत्व की प्रतिमाएँ तथा बुद्ध-जीवन के दृश्यबुद्ध के साथ-साथ भारतीय देवी-देवता — कुबेर, लक्ष्मी, शिव, कार्तिकेय, यक्ष-यक्षिणी, नाग

अब छहों कलाकृतियों पर यही कसौटी लगाइए :

क्र.कलाकृतिशैलीकारण
1बुद्ध के परिनिर्वाण का दृश्यगांधारस्लेटी-काला शिस्ट; भीड़भरा कथात्मक फलक; लेटे हुए बुद्ध पर गहरी, यथार्थ चुन्नटें; शोकाकुल जनों के अलग-अलग मुख और मूँछें — ग्रीक-रोमन गठन
2बोधिसत्व मैत्रेयगांधारगहरा नीला-स्लेटी शिस्ट; लहरदार केश, मूँछ, भारी आभूषण और रोमन ‘टोगा' जैसी गहरी चुन्नटों में गिरता उत्तरीय; छरहरा, शरीर-रचना के अनुसार गढ़ा शरीर
3कुषाण भक्तों द्वारा शिवलिंग की पूजामथुराविशिष्ट चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; भारतीय, अ-बौद्ध विषय; सपाट और सरलता से गढ़ी आकृतियाँ
4दो नागिनों के बीच एक नाग, कनिष्क के आठवें वर्ष का उल्लेख करता शिलालेखमथुराहल्का लाल बलुआ पत्थर; सिर के पीछे फणों का छत्र लिए विशुद्ध भारतीय लोक-देवता; भारी गोल शरीर; कुषाण राजवर्ष का ब्राह्मी लेख — मथुरा ही कुषाणों का भारतीय कला-केंद्र था
5कार्तिकेय (युद्ध के देवता) एवं अग्निदेवमथुराचित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; भारतीय देवता; चौड़े मुख, भरे हुए शरीर, चिकनी सतह, उथला उभार
6दंड मुद्रा में महात्मा बुद्ध (खड़े बुद्ध)गांधारगहरा शिस्ट पत्थर; बड़ा सादा प्रभामंडल; दोनों कंधों को ढकता उत्तरीय, जो लगातार लहरदार चुन्नटों में गिरता है — गांधार बुद्ध की पहचान
गांधार : 1, 2, 6  ·  मथुरा : 3, 4, 5
सबसे तेज़ कसौटी : पहले रंग, फिर विषय। गहरा स्लेटी पत्थर और भारी चुन्नटदार वस्त्र → गांधार। लाल या हल्का बलुआ पत्थर और भरी-चिकनी भारतीय आकृति → मथुरा। फिर विषय जाँचिए : नाग, यक्ष, कार्तिकेय या शिवलिंग प्रायः मथुरा ही होंगे।
संकेत : कारण लिखते समय सदैव दो विशेषताएँ बताइए — सामग्री और आकृति की कोई एक बात। अकेली एक विशेषता भ्रमित कर सकती है, क्योंकि बुद्ध की प्रतिमाएँ दोनों शैलियों में बनीं।
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