कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
अब आप मथुरा और गांधार कला शैलियों की मूल विशेषताओं से परिचित हो चुके हैं। अगले पृष्ठ पर चित्र 6.27 में दी गई कलाकृतियों को देखिए और पहचानिए। क्या आप बता सकते हैं कि चित्र में दी गई प्रत्येक कलाकृति किस कला शैली से संबंधित है? अपने विचार कारण सहित लिखिए और सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।
चित्र 6.27 की छह कलाकृतियाँ, पुस्तक के क्रमांक के अनुसार :
6.27.1 बुद्ध के महापरिनिर्वाण का दृश्य — गहरे स्लेटी-काले पत्थर की आयताकार उत्कीर्ण पट्टिका : बुद्ध एक शय्या पर करवट लेटे हैं, पीछे शोकाकुल जन खड़े हैं और नीचे की पट्टी में बैठी हुई आकृतियाँ हैं।
6.27.2 बोधिसत्व मैत्रेय — गहरे स्लेटी-काले पत्थर में लगभग गोल तराशी गई खड़ी आकृति; मूँछें, मुकुट जैसी केश-सज्जा, भारी आभूषण, एक हाथ में कमंडल और गहरी चुन्नटों में गिरता वस्त्र।
6.27.3 कुषाण भक्तों द्वारा पूजित शिवलिंग — चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर की टूटी पट्टिका; ऊपर शिवलिंग और नीचे गोल-मटोल खड़ी आकृतियाँ।
6.27.4 दो नागियों के बीच एक नाग, जिस पर कनिष्क के शासन के आठवें वर्ष का उल्लेख करता अभिलेख है — हल्के लाल बलुआ पत्थर की खड़ी पट्टिका; साँपों के फण के नीचे एक चौड़ी खड़ी आकृति, दोनों ओर एक-एक छोटी आकृति, और आधार पर अभिलेख की एक पंक्ति।
6.27.5 युद्ध के देवता कार्तिकेय और अग्नि के देवता अग्नि — चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर का फलक, जिसमें दो भारी खड़ी आकृतियाँ हैं; एक के हाथ में भाला और दूसरे के चारों ओर ज्वालाएँ।
6.27.6 खड़े बुद्ध — गहरे स्लेटी-काले पत्थर की ऊँची आकृति, उत्कीर्ण चौकी पर खड़ी; सिर के पीछे बड़ा गोल प्रभामंडल, लहरदार केश और दोनों कंधों को ढकता वस्त्र, जिसकी चुन्नटें पास-पास और नियमित हैं।
चित्र 6.27 (पृष्ठ 141) — छह कलाकृतियाँ; छायाचित्र, जिनका वर्णन यहाँ दिया गया है। चित्र स्वयं पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर
पहले दो कसौटियाँ मन में बिठा लीजिए — पत्थर और आकृति का गठन।
गांधार शैली
मथुरा शैली
पत्थर
स्लेटी-काला शिस्ट
लाल (प्रायः चित्तीदार) बलुआ पत्थर — कभी हल्का पीला
मृदुलाकार (गोल-मटोल) चिकनी आकृतियाँ, शरीर से चिपके पतले वस्त्र, चौड़े मुख
विषय
प्रायः बुद्ध और बोधिसत्व की प्रतिमाएँ तथा बुद्ध-जीवन के दृश्य
बुद्ध के साथ-साथ भारतीय देवी-देवता — कुबेर, लक्ष्मी, शिव, कार्तिकेय, यक्ष-यक्षिणी, नाग
अब छहों कलाकृतियों पर यही कसौटी लगाइए :
क्र.
कलाकृति
शैली
कारण
1
बुद्ध के परिनिर्वाण का दृश्य
गांधार
स्लेटी-काला शिस्ट; भीड़भरा कथात्मक फलक; लेटे हुए बुद्ध पर गहरी, यथार्थ चुन्नटें; शोकाकुल जनों के अलग-अलग मुख और मूँछें — ग्रीक-रोमन गठन
2
बोधिसत्व मैत्रेय
गांधार
गहरा नीला-स्लेटी शिस्ट; लहरदार केश, मूँछ, भारी आभूषण और रोमन ‘टोगा' जैसी गहरी चुन्नटों में गिरता उत्तरीय; छरहरा, शरीर-रचना के अनुसार गढ़ा शरीर
3
कुषाण भक्तों द्वारा शिवलिंग की पूजा
मथुरा
विशिष्ट चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; भारतीय, अ-बौद्ध विषय; सपाट और सरलता से गढ़ी आकृतियाँ
4
दो नागिनों के बीच एक नाग, कनिष्क के आठवें वर्ष का उल्लेख करता शिलालेख
मथुरा
हल्का लाल बलुआ पत्थर; सिर के पीछे फणों का छत्र लिए विशुद्ध भारतीय लोक-देवता; भारी गोल शरीर; कुषाण राजवर्ष का ब्राह्मी लेख — मथुरा ही कुषाणों का भारतीय कला-केंद्र था
5
कार्तिकेय (युद्ध के देवता) एवं अग्निदेव
मथुरा
चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; भारतीय देवता; चौड़े मुख, भरे हुए शरीर, चिकनी सतह, उथला उभार
6
दंड मुद्रा में महात्मा बुद्ध (खड़े बुद्ध)
गांधार
गहरा शिस्ट पत्थर; बड़ा सादा प्रभामंडल; दोनों कंधों को ढकता उत्तरीय, जो लगातार लहरदार चुन्नटों में गिरता है — गांधार बुद्ध की पहचान
गांधार : 1, 2, 6 · मथुरा : 3, 4, 5
सबसे तेज़ कसौटी :पहले रंग, फिर विषय। गहरा स्लेटी पत्थर और भारी चुन्नटदार वस्त्र → गांधार। लाल या हल्का बलुआ पत्थर और भरी-चिकनी भारतीय आकृति → मथुरा। फिर विषय जाँचिए : नाग, यक्ष, कार्तिकेय या शिवलिंग प्रायः मथुरा ही होंगे।
संकेत : कारण लिखते समय सदैव दो विशेषताएँ बताइए — सामग्री और आकृति की कोई एक बात। अकेली एक विशेषता भ्रमित कर सकती है, क्योंकि बुद्ध की प्रतिमाएँ दोनों शैलियों में बनीं।