प्र1.
अपने दरबार में बैठी हुई प्रभावती गुप्त पर बनी चित्रकारी को देखिए (चित्र 7.10)। उनके वस्त्र, मुद्रा, आस-पास के लोगों और दरबार की व्यवस्था पर ध्यान दीजिए। ये सभी आपको उनके जीवन, भूमिका और समय के बारे में क्या बताते हैं? अपने अवलोकनों पर समूहों में चर्चा कीजिए और अपने विचारों को कक्षा के साथ साझा कीजिए।
उत्तर
चित्र को चार परतों में पढ़िए — वस्त्र, मुद्रा, आस-पास के लोग और परिवेश — और हर परत वही बात कहती है जिसकी पुष्टि पृष्ठ 155 का पाठ करता है।
| चित्र 7.10 में जो दिखता है | वह क्या बताता है |
|---|---|
| वस्त्र — रत्नजड़ित मुकुट, भारी स्वर्ण हार, बाजूबंद, कंगन, पायल और बड़े कुंडल; लाल-सुनहरा परिधान | वे स्वयं राजसत्ता हैं, किसी और के दरबार की अतिथि नहीं। स्वर्ण यह भी बताता है कि राज्य समृद्ध था और वस्त्र व आभूषण-शिल्प उन्नत था |
| मुद्रा — ऊँचे, नक्काशीदार सिंहासन पर गद्दी और पादपीठ के साथ केंद्र में सीधे बैठी हुईं; शेष सब उनसे नीचे | दरबार वही लगा रही हैं। ऊँचाई और केंद्र में स्थान चित्रकार की सत्ता दिखाने की भाषा है — निर्णय उन्हीं के हैं |
| गोद में बैठा एक छोटा बालक | पूरे चित्र की कुंजी। वाकाटक राजकुमार की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने अपने अल्पवयस्क पुत्र के लिए शासिका (रीजेंट) के रूप में शासन किया। एक अभिलेख उन्हें ‘दो राजाओं की माता’ कहता है — उनके दोनों पुत्र वाकाटक सिंहासन पर बैठे |
| पीछे खड़ी परिचारिकाएँ, जिनमें एक श्वेत चँवर लिए हुए | चँवर भारतीय कला का प्रचलित राजचिह्न है — यही वस्तु अश्वमेध वाले सिक्के (चित्र 7.7) में रानी के हाथ में है। किसी पर चँवर डुलाना उसे संप्रभु घोषित करना है |
| सामने भूमि पर बैठे वयोवृद्ध दरबारी — श्वेत वस्त्र और पगड़ी में, हाथ जोड़े; एक के हाथ में पांडुलिपि या लेखन-पट्टिका | यह कार्यरत दरबार है: मंत्री, पुरोहित और लेखक, जो परामर्श देते, निवेदन करते और अभिलेख रखते थे। जुड़े हाथ बताते हैं कि उनकी सत्ता स्वीकृत थी। पांडुलिपि स्मरण कराती है कि निर्णय लिखे जाते थे — जैसे पृष्ठ 156 के ताम्रपत्र |
| परिवेश — ऊँचे नक्काशीदार स्तंभ, धनुषाकार द्वार, अलंकृत फर्श | पत्थर से बना राजप्रासाद। यह गुप्त और वाकाटक वास्तुकला से मेल खाता है, जिसमें नक्काशीदार स्तंभ और धनुषाकार रूप मिलते हैं — वही भाषा अजंता की गुफाओं (चित्र 7.17) में भी दिखती है |
उनका समय क्या कहता है: पाँचवीं शताब्दी के भारत में एक स्त्री वास्तविक राजनीतिक सत्ता संभाल सकती थी — उन्होंने वाकाटक–गुप्त संबंध जीवित रखे, विष्णु और उनके अवतारों को समर्पित सात मंदिरों के निर्माण से जुड़ी हैं, और उनके अपने अभिलेख भी मिले हैं। सत्ता उन्हें परिवार से मिली (चंद्रगुप्त द्वितीय की पुत्री, वाकाटक राजकुमार की विधवा, दो राजाओं की माता), पर उसका प्रयोग उन्होंने स्वयं किया।
एक ईमानदार सावधानी: चित्र का शीर्षक स्वयं कहता है — यह ‘एक पुनर्कल्पित चित्र’ है। इसे हाल में, इतिहासकारों की जानकारी के आधार पर बनाया गया है; यह गुप्तकालीन चित्र नहीं है। इसलिए हर विवरण को आधुनिक पुनर्रचना मानिए और उसे लिखित साक्ष्य से मिलाकर देखिए, जैसा ऊपर की तालिका में किया गया है। पुनर्रचना और स्रोत का यह मिलान स्वयं में एक अच्छा इतिहास-अभ्यास है।