वे कौन थे: गुप्त एक राजवंश थे, जिनका उदय तीसरी शताब्दी सा.सं. में उस समय हुआ जब उत्तर और उत्तर-पश्चिम में फैला कुषाण साम्राज्य दुर्बल पड़ रहा था। अध्याय स्पष्ट कहता है कि उनकी उत्पत्ति के विषय में अनेक मत हैं, परंतु व्यापक रूप से यही माना जाता है कि वे वर्तमान उत्तर प्रदेश के समीप के क्षेत्र में क्षेत्रीय शासकों के रूप में उभरे। आगे चलकर वे अपने समय की सबसे बड़ी शक्ति बने। उनकी राजधानी पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) थी और उनका शासन तीसरी से छठी शताब्दी सा.सं. तक रहा।
अध्याय जिन तीन शासकों के इर्द-गिर्द अपनी कथा बुनता है —
| शासक | किस बात के लिए स्मरणीय |
|---|---|
| चंद्रगुप्त प्रथम | साम्राज्य के प्रारंभिक विस्तार के लिए; अपने सिक्कों (चित्र 7.4, रानी कुमारदेवी के साथ) और रणनीतिक गठबंधनों के लिए, जिनसे सुदृढ़ साम्राज्य की नींव पड़ी |
| समुद्रगुप्त | प्रयाग प्रशस्ति के योद्धा शासक; महत्वाकांक्षा धरणी-बंध अर्थात ‘संपूर्ण पृथ्वी को एक करना’। उन्होंने कला, ज्ञान और व्यापार को भी प्रोत्साहन दिया — एक सिक्के पर वे वीणा बजाते दिखाए गए हैं |
| चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ | विष्णु के उपासक; उनके शासनकाल में महरौली का लौह-स्तंभ स्थापित हुआ और उसके अभिलेख में ‘चंद्र’ नामक राजा का उल्लेख है। कला, वास्तुकला, साहित्य और विज्ञान विशेष रूप से उन्हीं के समय में फले-फूले |
‘उत्कृष्ट युग’ क्यों: क्योंकि शांति और स्थिरता के लंबे काल ने लोगों को केवल जीवित रहने से आगे बढ़ने का अवसर दिया — और लगभग हर क्षेत्र में जो कार्य हुआ, वह आगे के युगों के लिए मानक बन गया।
→ अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई, जिससे राज्य विद्वानों, कलाकारों और वैज्ञानिकों को संरक्षण दे सका
→ पूर्ववर्ती युगों का ज्ञान एकत्रित कर ग्रंथों में संकलित किया गया
→ साहित्य, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, धातु विज्ञान और कला में असाधारण कार्य
→ इतिहासकारों ने इसे भारत का ‘उत्कृष्ट युग’ कहा
- साहित्य — संस्कृत साहित्य का विकास: कालिदास की रचनाएँ और अनेक प्रमुख पुराण।
- विज्ञान और गणित — आर्यभट और वराहमिहिर ने गणित तथा खगोल विज्ञान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
- चिकित्सा — चिकित्सा ग्रंथों में सिद्धांत और व्यवहार संकलित व परिष्कृत हुए; इसी काल में आयुर्वेद संहिताबद्ध हुआ।
- धातु विज्ञान — बिना जंग वाला लौह-स्तंभ इसका जीवित प्रमाण है।
- कला — सारनाथ की बुद्ध मूर्तियाँ, अजंता की गुफाएँ, उदयगिरि की चट्टान काटकर बनाई गई गुफाएँ। ‘गुप्तकालीन कला’ ने सौंदर्यबोध के उच्च मानक स्थापित किए, जिनका स्थायी प्रभाव पड़ा।