अन्वेषण अध्याय 9 महत्वपूर्ण प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
सरकार के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर

अध्याय सरकारों को दो वर्गों में बाँटता है — लोकतांत्रिक सरकारें और अन्य प्रकार की सरकारें।

वर्गप्रकारशासन कौन करता हैअध्याय में दिया उदाहरण
लोकतंत्र
‘जनता का शासन'
प्रत्यक्ष लोकतंत्रसभी नागरिक स्वयं प्रत्येक निर्णय में भाग लेते हैंस्विट्जरलैंड की कुछ व्यवस्थाएँ
प्रतिनिधि लोकतंत्रजनता प्रतिनिधि चुनती है, जो उसकी ओर से शासन करते हैंभारत तथा आज के अधिकांश लोकतंत्र
— संसदीय लोकतंत्रकार्यपालिका विधायिका का ही भाग होती है और उसे उसका विश्वास चाहिएभारत, ऑस्ट्रेलिया
— अध्यक्षीय शासन प्रणालीजनता द्वारा निर्वाचित राष्ट्राध्यक्ष विधायिका से स्वतंत्र कार्य करता हैसंयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण कोरिया
अन्य स्वरूपनिरंकुश राजतंत्रराजा कानून बनाता है, लागू कराता है और न्यायिक निर्णय भी देता हैसऊदी अरब
संवैधानिक राजतंत्रराजा के पास केवल औपचारिक शक्ति; वास्तविक शासन संसद और प्रधानमंत्री काब्रिटेन
धर्मतंत्रशासन धार्मिक नियमों और धार्मिक नेताओं के अनुसारईरान, अफगानिस्तान, वेटिकन सिटी
अधिनायकतंत्रसंपूर्ण सत्ता एक व्यक्ति या छोटे समूह के पास; संविधान या कानून का कोई नियंत्रण नहींहिटलर का जर्मनी; ईदी अमीन का युगांडा
अल्पतंत्रकुछ शक्तिशाली लोग या परिवार सारे महत्वपूर्ण निर्णय लेते हैंप्राचीन ग्रीस के कुलीन परिवार

एक शब्द और जोड़ लीजिए, क्योंकि अध्याय उसे अलग से परिभाषित करता है — गणराज्य वह शासन व्यवस्था है जिसमें राज्य का प्रमुख निर्वाचित होता है और वह वंशानुगत राजा या रानी नहीं होता। गणराज्य इन प्रकारों के साथ खड़ा पाँचवाँ ‘प्रकार' नहीं है; यह बताता है कि राष्ट्राध्यक्ष कैसे चुना जाता है। भारत लोकतंत्र भी है और गणराज्य भी।

ध्यान दें: ये नाम एक-दूसरे पर आ भी सकते हैं। ब्रिटेन राजतंत्र भी है और संसदीय लोकतंत्र भी। ईरान में धर्मतंत्र और लोकतंत्र दोनों के तत्व हैं। इसलिए किसी देश की शासन प्रणाली बताते समय यह भी बताइए कि आप कौन-सी विशेषता की बात कर रहे हैं।
प्र2.
सरकार अपनी शक्ति कहाँ से प्राप्त करती है?
उत्तर

जिसे वह देश सत्ता का स्रोत मानता है, वहीं से। यही विभिन्न शासन प्रणालियों के बीच सबसे आधारभूत अंतर है। अध्याय का पहला ‘प्रमुख अंतर' यही पूछता है — ‘यह सरकार है’ — यह तय करने का अधिकार किसे है?

शासन प्रणालीशक्ति और सत्ता का स्रोतसरकार का गठन कैसे
लोकतंत्रदेश की जनतानियमित और निश्चित अंतराल पर होने वाले चुनावों से
राजतंत्रजन्म और उत्तराधिकार; कहीं-कहीं राजाओं ने ईश्वर से दिव्य शक्ति का दावा भी कियावंशानुगत — सामान्यतः राजा का ज्येष्ठ पुत्र
धर्मतंत्रधार्मिक विश्वास और धार्मिक संस्था का मुखियाधर्मगुरुओं का समूह सर्वोच्च नेता का चयन करता है; ईरान में निर्वाचित राष्ट्रपति और संसद भी हैं
अधिनायकतंत्रएक व्यक्ति या छोटे समूह द्वारा अर्जित और बनाए रखी गई सत्ता, जिस पर कोई संवैधानिक नियंत्रण नहीं1933 में चांसलर बनने के तुरंत बाद हिटलर ने ऐसे कानून बनाए जिन्होंने उसे निरंकुश शक्ति दी और विपक्ष समाप्त कर दिया
अल्पतंत्रकुछ परिवारों या व्यक्तियों की संपत्ति और प्रभावऔपचारिक व्यवस्था चाहे जो हो, वास्तविक निर्णय यही छोटा समूह लेता है
ऐसा क्यों: सत्ता का स्रोत ही तय करता है कि सरकार को किसकी सुननी है। यदि शक्ति जनता से आती है तो सरकार को जनता के प्रति जवाब देना होगा — यही उत्तरदायित्व है और चुनाव इसे लागू करने का साधन। यदि शक्ति जन्म से, बल से या धन से आती है, तो जनता के पास ऐसा कोई साधन नहीं रहता।
क्या आप जानते हैं? जिस देश की शक्ति का स्रोत किसी बाहरी प्रभाव से स्वतंत्र होता है, उसे संप्रभु कहते हैं। इसीलिए हमारे संविधान की प्रस्तावना में भारत के लिए पहला शब्द ‘सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न' आता है।
प्र3.
एक देश की सरकार जनता से किस प्रकार संवाद स्थापित करती है?
उत्तर

यह पूरी तरह शासन प्रणाली पर निर्भर है। लोकतंत्र में संवाद दोनों ओर से होता है; अन्य स्वरूपों में प्रायः केवल ऊपर से नीचे की ओर।

लोकतंत्र में जनता सरकार तक इन माध्यमों से पहुँचती है —

  • चुनाव — सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से प्रत्येक वयस्क नागरिक अपना प्रतिनिधि चुनता है। भारत में प्रत्येक पाँच साल में आम चुनाव होते हैं, अमेरिका में प्रत्येक चार साल में।
  • प्रतिनिधित्व — चुने गए प्रतिनिधि विधायिका का भाग बनते हैं और अपने मतदाताओं की आवश्यकताएँ वहाँ रखते हैं, ठीक वैसे ही जैसे कक्षा प्रतिनिधि अपनी कक्षा की बात विद्यार्थी समिति में रखता है।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता — नागरिक सरकार के विषय में अपनी राय खुलकर कह सकते हैं और सरकार को उसे सुनना होता है।
  • न्यायालय — स्वतंत्र न्यायपालिका के कारण एक साधारण नागरिक भी सरकार को चुनौती दे सकता है और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा करा सकता है।

और सरकार जनता तक पहुँचती है — कानून बनाकर, सेवाएँ देकर (शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना), कानून व्यवस्था बनाए रखकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करके और अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करके — अर्थात पृष्ठ 186 पर दी गई भूमिकाओं द्वारा।

ऐसा क्यों होता है: क्योंकि सरकार की शक्ति मूलतः जनता से ही आई है, इसलिए उसे जनता के प्रति उत्तरदायी रहना पड़ता है। यदि वह अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं करती तो लोग अगले चुनाव में अपने प्रतिनिधि बदल सकते हैं। यही भय सरकार की कार्यप्रणाली पर निरंतर निगरानी बनाए रखता है।

अब पृष्ठ 203 की शेन की कहानी से तुलना कीजिए — नियम उसके बाल, उसके कपड़े और उसकी सैन्य सेवा तय करते हैं, वह बाहर की सूचना तक नहीं पहुँच सकता और उससे दूसरों की जानकारी देने की अपेक्षा की जाती है। वहाँ सरकार जनता पर नजर रखती है; जनता सरकार पर नहीं रख सकती।

प्र4.
लोकतंत्र का क्या महत्व है?
उत्तर

क्योंकि यह नागरिकों को पाँच ऐसी चीजें देता है, जिनकी गारंटी अन्य शासन प्रणालियाँ अपनी बनावट के कारण नहीं दे पातीं।

  1. बराबर की भागीदारी। सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार प्रत्येक वयस्क को — धनी हो या निर्धन — एक मत देता है।
  2. कानून के समक्ष समानता तथा शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाओं तक समान पहुँच।
  3. स्वतंत्रता। लोग तय कर सकते हैं कि क्या बोलना है, क्या पहनना है, किस विश्वास को मानना है और अपनी अभिव्यक्ति कैसे करनी है — अध्याय समझदारी भरी सीमा भी जोड़ता है, ‘जब तक कि यह अन्य किसी के अधिकार को क्षति न पहुँचाए'
  4. उत्तरदायित्व और शांतिपूर्ण उपाय। सरकार असफल हो तो लोग उसे मतदान से बदलते हैं, विद्रोह से नहीं।
  5. संरक्षण। स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार नागरिक की रक्षा सरकार के विरुद्ध भी करते हैं।

यही कारण है कि आज विश्व के आधे से अधिक देशों ने लोकतंत्र अपनाया है।

स्वयं जाँचिए: अध्याय यह दावा नहीं करता कि लोकतंत्र निर्दोष है। वह वास्तविक समस्याएँ भी गिनाता है — भ्रष्टाचार, आर्थिक विषमता, लोकतांत्रिक संस्थाओं पर कुछ लोगों का अत्यधिक नियंत्रण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्षरण और सूचना माध्यमों का दुरुपयोग। लोकतंत्र महत्वपूर्ण है और उसे सजग नागरिक चाहिए — दोनों बातें पुस्तक में हैं।
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