कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 8 भौगोलिक क्षेत्र कैसे पावन होते हैं? के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

इस अध्याय में पावनता का अर्थ है — किसी वस्तु में गहरे धार्मिक या आध्यात्मिक भाव का अनुभव, जो पावन एवं दिव्य हो तथा आदर और श्रद्धा के योग्य हो। यह ‘वस्तु’ केवल कोई भवन नहीं होती। यह कोई विशेष स्थल या धार्मिक स्थान हो सकता है, कोई विशेष प्रकार की यात्रा (तीर्थयात्रा), उस यात्रा का मार्ग , अथवा वह संपूर्ण भूभाग जिससे होकर यात्रा गुजरती है । इसीलिए पावनता केवल धर्म और आध्यात्मिकता से नहीं, अपितु भूगोल और जीवंत परंपराओं से भी जुड़ी हुई है। भारत में प्राय: प्रत्येक विचारधारा और धर्म के अपने-अपने पावन स्थल हैं। भारत से बाहर उद्भव हुए धर्मों — इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी — के पावन स्थल हैं, जैसे अजमेर शरीफ़ तथा तमिलनाडु का वेलांकन्नी चर्च, जहाँ अन्य पंथों के लोग भी जाते हैं। बौद्ध धर्म में वे स्थल पावन हैं जहाँ महात्मा बुद्ध गए या जहाँ उनके अवशेष हैं — साँची का स्तूप तथा बोधगया का महाबोधि स्तूप, जह

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दअर्थअध्याय में कहाँयाद रखने योग्य
पावनताकिसी वस्तु में गहरे धार्मिक या आध्यात्मिक भाव का अनुभव, जो पावन और दिव्य हो तथा आदर एवं श्रद्धा के योग्य होपृष्ठ 168यह कोई स्थल, कोई यात्रा, कोई मार्ग या स्वयं भूभाग हो सकता है
तीर्थयात्राकिसी पावन स्थल की यात्रा, जो उससे संबंधित धर्म या मत-विश्वास के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखती हैहाशिया, पृष्ठ 169भारत में लगभग 3000 वर्षों से अटूट परंपरा
पावन स्थलवह स्थल जो किसी दिव्य, पावन स्मृति अथवा आध्यात्मिक व्यक्ति से संबंध के कारण पावन माना जाता हैहाशिया, पृष्ठ 169अजमेर शरीफ़ और वेलांकन्नी चर्च में अनेक पंथों के लोग आते हैं
पावन अवशेषकिसी संत या आध्यात्मिक व्यक्ति के शरीर का अंश या उनसे संबंधित वस्तु, जिसे सम्मान के साथ रखा जाता हैहाशिया, पृष्ठ 169साँची का स्तूप एक अवशेष स्तूप है
तख्तसिख धर्म में अध्यात्म का आधिकारिक केंद्रपृष्ठ 169तख्त श्री पटना साहिब · अकाल तख्त, अमृतसर · तख्त श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर
तीर्थशाब्दिक अर्थ में वह स्थल जहाँ नदी या जल का स्रोत पार किया जाता है; प्रतीकात्मक दृष्टि से जहाँ कोई सामान्य जीवन से उच्च, आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करता हैहाशिया, पृष्ठ 170इसी अर्थ से समझ आता है कि तीर्थ नदी-तटों और संगमों पर क्यों हैं
तीर्थंकरजो तीर्थ का निर्माण करता है, अर्थात जो साधारण जीवन से ऊपर उठकर उच्चतर जीवन की ओर मार्गदर्शन करता है; जैन परंपरा में सर्वोच्च धर्मोपदेशकहाशिया, पृष्ठ 171जैन तीर्थ : माउंट आबू, गिरनार, शत्रुंजय
वारीवह तीर्थयात्रा जो नियमित रूप से होती है — पंढरपुर में प्रतिवर्षचित्र 8.4, पृष्ठ 171महाराष्ट्र की आठ सौ वर्ष पुरानी परंपरा; तीर्थयात्री इक्कीस दिन चलकर विठोबा मंदिर पहुँचते हैं
चार धामचार पावन स्थल, जिनकी यात्रा की इच्छा कुछ हिंदू रखते हैं; ये भारत के चार कोनों में स्थित हैंपृष्ठ 173, मानचित्र चित्र 8.6बद्रीनाथ (उत्तर) · पुरी (पूर्व) · रामेश्वरम (दक्षिण) · द्वारका (पश्चिम)
ज्योतिर्लिंग / शक्तिपीठभगवान शिव से संबंधित द्वादश पावन स्थल, प्रत्येक का अपना नाम और पौराणिक पृष्ठभूमि; तथा वे 51 स्थल जहाँ माता सती के अंग गिरेपृष्ठ 173 तथा हाशियाशक्तिपीठ वर्तमान बांग्लादेश तथा पाकिस्तान तक फैले हैं
पुण्यक्षेत्रपावन क्षेत्र — संपूर्ण प्राकृतिक परिदृश्य ही पावन स्थल के रूप मेंपावन पारिस्थितिकी, पृष्ठ 175भूभाग, संस्कृति और आध्यात्मिकता का परस्पर सम्मिश्रण
नदी-स्तुति सूक्तऋग्वेद का वह सूक्त जो नदियों की प्रशंसा एवं स्तुति के प्रति समर्पित हैपृष्ठ 175यह प्राचीन उत्तर-पश्चिम भारत की उन्नीस प्रमुख नदियों का आह्वान करता है
कुंभ मेलाहरिद्वार, प्रयागराज, नासिक और उज्जैन में लगने वाला विशाल मेला, जहाँ अमृत की बूँदें गिरी मानी जाती हैंपृष्ठ 176, चित्र 8.7यूनेस्को की ‘अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर’; 2025 के कुंभ में लगभग 66 करोड़ लोग
पावन निकुंजवह प्राकृतिक वन जिसे समुदाय देवता का निवास मानकर आखेट, कटाई और खनन से बचाता हैपृष्ठ 179–180कावु · कोविलकादु · देवरे कादु · देवराई · खलाव केनतांग · देव वन · सरना · देवगुड़ी · ओरण
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