पहले देखिए कि चित्रों में क्या है। चित्र 8.18 में चार छायाचित्र हैं : रासायनिक झाग से ढकी नदी, जिसके दूसरे तट पर कारखाने हैं; पहाड़ी नदी के किनारे जमा प्लास्टिक कचरा; प्लास्टिक की बोतलों और थैलियों का ढेर; और एक गाय — जो पावन मानी जाती है — उसी कचरे में मुँह डाले हुए। प्रत्येक चित्र किसी पावन वस्तु के साथ कूड़ाघर जैसा व्यवहार दिखाता है।
नदियाँ इतनी प्रदूषित कैसे हो गईं? किसी एक कारण से नहीं, अनेक कारणों से एक साथ :
| कारण | नदी पर प्रभाव |
|---|---|
| अनुपचारित मल-जल, तेजी से बढ़ते नगरों से | सबसे बड़ा स्रोत; नाले सीधे नदी में गिरते हैं |
| औद्योगिक अपशिष्ट — रंग, चर्मशोधन, रसायन | जल विषैला हो जाता है; चित्र का झाग इसी का परिणाम है |
| खेतों का बहाव — उर्वरक और कीटनाशक | शैवाल बढ़ते हैं, ऑक्सीजन घटती है, मछलियाँ मरती हैं |
| प्लास्टिक और ठोस कचरा, पूजा-सामग्री सहित | तट भर जाते हैं; पशु उसे खाते हैं, जैसे चित्र की गाय |
| अति दोहन — बाँध, नहरें, नलकूप | जल कम होने से नदी की अपशिष्ट बहा ले जाने की क्षमता घट जाती है |
किंतु इन पाँचों के पीछे एक गहरा कारण है, जिसे अध्याय स्वयं बताता है : लोगों और पावन भूभाग के बीच का पुराना सौहार्दपूर्ण संबंध आज “संकट” में है। हम आज भी नदी को ‘गंगा जी’ कहते और पूजते हैं — और फिर उसी को नाला बना देते हैं। श्रद्धा केवल कर्मकांड रह गई, उत्तरदायित्व नहीं रहा। जो व्यक्ति नदी को सचमुच माता माने, वह उसमें कारखाने का पाइप नहीं खोलेगा।
आस-पास के क्षीण होते पावन स्थल। कक्षा में इनके वास्तविक नाम बताइए :
- गाँव का तालाब या मंदिर का कुंड, जो अब गाद, प्लास्टिक और जलकुंभी से भरा है।
- वह पावन निकुंज, जो खेतों, मकानों या खदान के कारण सिकुड़ गया — अध्याय बताता है कि ऐसे अतिक्रमण से हजारों निकुंज घट गए हैं।
- नगर के नीचे की नदी का वह भाग, जहाँ नालों के मिलते ही जल का रंग बदल जाता है।
- वह पहाड़ी मंदिर, जिसकी ढलानें अब नंगी हैं या रैपर और बोतलों से भरी हैं।
- सड़क चौड़ी करने में कटे पुराने वृक्ष, या नलकूपों के बाद सूख गया जलस्रोत।
दायित्व किसका है? सबका — चार स्तरों पर; और सच यह है कि एक भी स्तर चूक जाए तो काम नहीं चलता।
| कौन | क्या करना चाहिए |
|---|---|
| हम में से प्रत्येक | जल में कचरा न डालें; कपड़े का थैला लें; फूल बिना प्लास्टिक के चढ़ाएँ; पावन स्थल से अपना कचरा वापस लाएँ |
| समुदाय — मंदिर समितियाँ, पंचायत, नागरिक समूह | तालाब, निकुंज या घाट की सफ़ाई और रखवाली; पुराने नियमों को पुनर्जीवित करना; श्रमदान |
| उद्योग और व्यापार | अपशिष्ट को छोड़ने से पहले उपचारित करना; व्यय प्रदूषक उठाए, नदी नहीं |
| सरकार | मल-जल शोधन संयंत्र बनाना और सचमुच चलाना; कानून लागू करना; निकुंजों और नदियों को विधिक संरक्षण देना — जैसे न्यूजीलैंड ने तारानकी माउंगा के लिए किया |