अध्याय का पूरा पूर्वार्द्ध इसी वाक्य में समाया है। भारत में जन्मी और बाहर से आई — हर परंपरा ने अपने पावन स्थल इस मानचित्र पर छोड़े हैं।
| परंपरा | अध्याय में उल्लिखित पावन स्थल | वे पावन क्यों हैं |
|---|---|---|
| इस्लाम, ईसाई, यहूदी, पारसी | अजमेर शरीफ़; वेलांकन्नी चर्च, तमिलनाडु | प्रार्थना और पूजा के स्थल, जहाँ विशेष अवसरों पर श्रद्धालु जाते हैं — और अन्य पंथों के लोग भी |
| बौद्ध धर्म | साँची का स्तूप (अवशेष स्तूप); बोधगया का महाबोधि स्तूप | जहाँ महात्मा बुद्ध गए या जहाँ उनके अवशेष हैं; बोधगया में उन्होंने निर्वाण प्राप्त किया |
| जैन धर्म | माउंट आबू, गिरनार, शत्रुंजय पहाड़ी (सौराष्ट्र) | जहाँ तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया या उनके जीवन की विशिष्ट घटनाएँ घटीं — तथा वे वृक्ष, सरोवर और पर्वत जहाँ वे गए |
| सिख धर्म | तख्त श्री पटना साहिब; अकाल तख्त, अमृतसर; तख्त श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर | सिख गुरुओं से संबंधित अध्यात्म के आधिकारिक केंद्र; श्रद्धालु जीवन में कम-से-कम एक बार वहाँ जाना चाहते हैं |