कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 8 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
क्या आप इनमें से किसी चित्र से परिचित हैं? क्या आप अपने आस-पास इसी तरह के किसी स्थान का नाम बता सकते हैं ?

चित्रों में क्या है — चित्र 8.1 (अध्याय का आरंभ, पृष्ठ 167) तथा चित्र 8.2 (पृष्ठ 168) :

  • चित्र 8.1, छह छायाचित्र : (1) देवदार के वन में खड़े पत्थर के मंदिरों का समूह, जिनकी छतें स्लेट की हैं; (2) रात में नदी पर तैरते जलते दीयों की पंक्तियाँ और जल में झिलमिलाते तट के प्रकाश; (3) नंगे पथरीले पर्वत पर स्वर्ण शिखर वाला श्वेत स्तूप; (4) मंदिर के सरोवर के बीच खड़ा छोटा स्तंभयुक्त देवालय; (5) खुले हरे मैदान में गड़े ऊँचे खड़े पत्थर; (6) वृक्ष की जड़ों का निकट-चित्र, जिन पर धागे, मनकों की लड़ियाँ, नींबू, फूल और अन्य भेंटें चढ़ी हैं।
  • चित्र 8.2, पाँच छायाचित्र : (1) खचाखच भरी दरगाह, जहाँ लाल चँदोवे के नीचे स्त्री-पुरुष भूमि पर बैठे हैं; (2) किसी सिनेगॉग (यहूदी उपासना-गृह) का भीतरी दृश्य — चमकती पीतल की जालियाँ, मेनोरा तथा भूमि पर बिछा नारंगी वस्त्र; (3) पारसी अग्नि-मंदिर का प्रवेश-द्वार, द्वार के ऊपर अभिलेख और बगल में उत्कीर्ण पंखयुक्त द्वारपाल; (4) दो मीनारों और श्वेत संगमरमर के गुंबदों वाली लाल बलुआ पत्थर की बड़ी मस्जिद; (5) एक और सिनेगॉग का भीतरी दृश्य — झाड़-फ़ानूस, पीतल के स्तंभ तथा लाल परदा।
चित्र 8.1 (पृष्ठ 167) तथा चित्र 8.2 (पृष्ठ 168) — छायाचित्र, जिनका वर्णन यहाँ दिया गया है; मूल चित्र पाठ्यपुस्तक में देखिए।
उत्तर

पहले यह पहचानिए कि चित्रों में वास्तव में क्या है, फिर उसी प्रकार का स्थान अपने आस-पास खोजिए।

चित्र मेंयह किस प्रकार का पावन स्थल हैअपने आस-पास ऐसा खोजिए
चित्र 8.1 — ऊँचे देवदार वृक्षों के बीच पत्थर के मंदिरवन में स्थित मंदिर-समूहआपके गाँव या नगर का मंदिर, विशेषकर जो किसी वन या पहाड़ी पर हो
चित्र 8.1 — साँझ के समय नदी पर तैरते जलते दीयेपूजा के लिए प्रयुक्त नदी-घाटवह घाट, तालाब या नदी-तट जहाँ आपके नगर में आरती या विसर्जन होता है
चित्र 8.1 — नंगे पर्वत पर सफ़ेद स्तूपबौद्ध स्तूपआपके जनपद का स्तूप, विहार या मठ, यदि हो
चित्र 8.1 — तालाब के बीच बना छोटा मंदिरपावन जलाशयमंदिर का तालाब, कुंड, बावड़ी या वह पोखर जिसे अनुष्ठानों के लिए स्वच्छ रखा जाता है
चित्र 8.1 — खुले मैदान में खड़े पत्थरपावन शिलाएँ / लोक अथवा जनजातीय स्थलगाँव की सीमा के पत्थर, देवगुड़ी, ग्रामदेवता का चबूतरा
चित्र 8.1 — धागों, नींबू और कुमकुम से सजी वृक्ष की जड़ेंपावन वृक्षविद्यालय के पास का पीपल, बरगद या नीम, जिसकी परिक्रमा की जाती है और जिस पर धागे बाँधे जाते हैं
चित्र 8.2 — भीड़ भरी दरगाह, मस्जिद, यहूदी प्रार्थना-गृह, अग्यारीइस्लाम, यहूदी तथा पारसी धर्म के पावन स्थलआपके नगर की दरगाह, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, अग्यारी या सिनेगॉग
नमूना उत्तर: “हाँ — धागों और नींबुओं से लदे वृक्ष का चित्र बहुत परिचित है। हमारी गली के मोड़ पर एक पुराना पीपल है; लोग उस पर लाल धागा बाँधते हैं, तने पर कुमकुम लगाते हैं और कोई उसकी टहनी नहीं काटता। दीयों वाली नदी का चित्र उस घाट जैसा है, जहाँ हम कार्तिक पूर्णिमा पर जाते हैं। मेरे घर के पास एक पहाड़ी मंदिर भी है, जहाँ मेले के दिन हम पैदल चढ़ते हैं; एक दरगाह है, जिसकी जाली पर हर समुदाय के लोग धागा बाँधते हैं; और बाज़ार के अंत में एक चर्च है।”
पुस्तक यह प्रश्न सबसे पहले क्यों पूछती है: यह दिखाने के लिए कि ‘पावन भूभाग’ कोई दूर की, प्राचीन वस्तु नहीं है। वह आपके अपने आस-पास का साधारण मानचित्र ही है — एक वृक्ष, एक तालाब, एक पहाड़ी, एक स्थल — बस उसे देखने की दृष्टि बदल जाती है।
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