प्र1.
क्या आप इनमें से किसी चित्र से परिचित हैं? क्या आप अपने आस-पास इसी तरह के किसी स्थान का नाम बता सकते हैं ?
उत्तर
पहले यह पहचानिए कि चित्रों में वास्तव में क्या है, फिर उसी प्रकार का स्थान अपने आस-पास खोजिए।
| चित्र में | यह किस प्रकार का पावन स्थल है | अपने आस-पास ऐसा खोजिए |
|---|---|---|
| चित्र 8.1 — ऊँचे देवदार वृक्षों के बीच पत्थर के मंदिर | वन में स्थित मंदिर-समूह | आपके गाँव या नगर का मंदिर, विशेषकर जो किसी वन या पहाड़ी पर हो |
| चित्र 8.1 — साँझ के समय नदी पर तैरते जलते दीये | पूजा के लिए प्रयुक्त नदी-घाट | वह घाट, तालाब या नदी-तट जहाँ आपके नगर में आरती या विसर्जन होता है |
| चित्र 8.1 — नंगे पर्वत पर सफ़ेद स्तूप | बौद्ध स्तूप | आपके जनपद का स्तूप, विहार या मठ, यदि हो |
| चित्र 8.1 — तालाब के बीच बना छोटा मंदिर | पावन जलाशय | मंदिर का तालाब, कुंड, बावड़ी या वह पोखर जिसे अनुष्ठानों के लिए स्वच्छ रखा जाता है |
| चित्र 8.1 — खुले मैदान में खड़े पत्थर | पावन शिलाएँ / लोक अथवा जनजातीय स्थल | गाँव की सीमा के पत्थर, देवगुड़ी, ग्रामदेवता का चबूतरा |
| चित्र 8.1 — धागों, नींबू और कुमकुम से सजी वृक्ष की जड़ें | पावन वृक्ष | विद्यालय के पास का पीपल, बरगद या नीम, जिसकी परिक्रमा की जाती है और जिस पर धागे बाँधे जाते हैं |
| चित्र 8.2 — भीड़ भरी दरगाह, मस्जिद, यहूदी प्रार्थना-गृह, अग्यारी | इस्लाम, यहूदी तथा पारसी धर्म के पावन स्थल | आपके नगर की दरगाह, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, अग्यारी या सिनेगॉग |
नमूना उत्तर: “हाँ — धागों और नींबुओं से लदे वृक्ष का चित्र बहुत परिचित है। हमारी गली के मोड़ पर एक पुराना पीपल है; लोग उस पर लाल धागा बाँधते हैं, तने पर कुमकुम लगाते हैं और कोई उसकी टहनी नहीं काटता। दीयों वाली नदी का चित्र उस घाट जैसा है, जहाँ हम कार्तिक पूर्णिमा पर जाते हैं। मेरे घर के पास एक पहाड़ी मंदिर भी है, जहाँ मेले के दिन हम पैदल चढ़ते हैं; एक दरगाह है, जिसकी जाली पर हर समुदाय के लोग धागा बाँधते हैं; और बाज़ार के अंत में एक चर्च है।”
पुस्तक यह प्रश्न सबसे पहले क्यों पूछती है: यह दिखाने के लिए कि ‘पावन भूभाग’ कोई दूर की, प्राचीन वस्तु नहीं है। वह आपके अपने आस-पास का साधारण मानचित्र ही है — एक वृक्ष, एक तालाब, एक पहाड़ी, एक स्थल — बस उसे देखने की दृष्टि बदल जाती है।