कक्षा ७ सामाजिक विज्ञान अध्याय 8 आइए पता लगाएँ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
क्या आप ऊपर दिए गए मानचित्र में कुछ पारंपरिक तीर्थों की पहचान कर सकते हैं? आप पुस्तक के अंत में दिए गए राजनैतिक मानचित्र की भी सहायता ले सकते हैं।
चित्र 8.6, पृष्ठ 174 — पुनर्रेखित : पारंपरिक तीर्थों के कुछ अंतर्संबंधों को दर्शाता मानचित्र। प्रत्येक चिह्न वहीं है जहाँ पुस्तक में है और पुस्तक की भाँति यहाँ भी किसी स्थान का नाम नहीं दिया गया — नाम पहचानना ही तो प्रश्न है। छपे मानचित्र में एक ही परंपरा के स्थल आपस में उसी रंग की पतली रेखाओं से जुड़े हैं, इसी से वे ‘अंतर्संबंध’ बनते हैं।
उत्तर
मानचित्र पर कोई नाम अंकित नहीं है — केवल संकेत हैं, जो रेखाओं से जुड़े हैं। अत: कार्य यह है कि प्रत्येक संकेत की स्थिति को राजनैतिक मानचित्र पर मिलाकर पढ़ा जाए। संकेत सूची में आठ चिह्न हैं : अंतर्राष्ट्रीय सीमा, शक्तिपीठ (लाल त्रिभुज), ज्योतिर्लिंग (गहरे नीले त्रिभुज), चार धाम (हल्के नीले त्रिभुज), कुंभ मेला (नारंगी त्रिभुज), सिख धर्म के पावन स्थल (पीले वृत्त), बौद्ध धर्म के पावन स्थल (गुलाबी वर्ग) तथा जैन धर्म के पावन स्थल (बैंगनी चतुष्कोण)।
संकेत-दर-संकेत देखने पर ये तीर्थ विश्वासपूर्वक पहचाने जा सकते हैं :
संकेत
मानचित्र पर स्थिति
तीर्थ
चार धाम
उत्तराखंड हिमालय, लगभग 30½° उ०, 79° पू०
बद्रीनाथ
चार धाम
ओडिशा तट, लगभग 20° उ०, 86° पू०
पुरी
चार धाम
सौराष्ट्र तट, लगभग 22° उ०, 69° पू०
द्वारका
चार धाम
दक्षिणी छोर, लगभग 9° उ०, 79° पू०
रामेश्वरम (जो ज्योतिर्लिंग भी है — दोनों त्रिभुज साथ-साथ हैं)
कुंभ मेला
जहाँ गंगा पहाड़ों से मैदान में आती है, लगभग 30° उ०, 78° पू०
हरिद्वार
शक्तिपीठ (लाल)
गंगा-यमुना संगम, लगभग 25½° उ०, 82° पू०
प्रयागराज — कुंभ मेले का नगर (पृष्ठ 176), यद्यपि मानचित्र पर यहाँ नारंगी नहीं, लाल त्रिभुज ही अंकित है
शक्तिपीठ (लाल)
मालवा, लगभग 23° उ०, 76° पू०
उज्जैन — कुंभ मेले का नगर तथा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भी, किंतु मानचित्र पर यहाँ केवल लाल त्रिभुज छपा है
कुंभ मेला
उत्तरी महाराष्ट्र, लगभग 20° उ०, 74° पू०
नासिक (साथ में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग)
ज्योतिर्लिंग
उत्तराखंड की पहाड़ियों में बद्रीनाथ से थोड़ा पश्चिम
केदारनाथ
ज्योतिर्लिंग
नर्मदा तट तथा पश्चिमी महाराष्ट्र का समूह
ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर, औंढा नागनाथ
सिख धर्म का पावन स्थल
पंजाब, लगभग 31½° उ०, 75° पू०
अमृतसर (स्वर्ण मंदिर / अकाल तख्त); उसके पूर्व का चिह्न आनंदपुर साहिब
सिख धर्म का पावन स्थल
मध्य गंगा मैदान, लगभग 25½° उ०, 85° पू०
पटना साहिब
सिख धर्म का पावन स्थल
मराठवाड़ा, लगभग 19° उ०, 77° पू०
नांदेड़ (हजूर साहिब)
बौद्ध धर्म का पावन स्थल
पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नेपाल सीमा
सारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी/कपिलवस्तु
बौद्ध धर्म का पावन स्थल
बिहार, लगभग 24½° उ०, 85° पू०, तथा मध्य भारत
बोधगया; मध्य प्रदेश में साँची
जैन धर्म का पावन स्थल
दक्षिणी राजस्थान तथा सौराष्ट्र
माउंट आबू; गिरनार तथा शत्रुंजय (पालीताना)
जैन धर्म का पावन स्थल
झारखंड, लगभग 24° उ०, 86° पू०, तथा दक्षिण कर्नाटक
सम्मेद शिखर (पारसनाथ); श्रवणबेलगोला
शक्तिपीठ
कोलकाता, गुवाहाटी, कन्याकुमारी, काँगड़ा तथा दर्जनों अन्य
कालीघाट, कामाख्या, कन्याकुमारी, ज्वालामुखी …
वही मानचित्र, तीर्थों के नाम सहित — अपने उत्तर की जाँच के लिए इसका उपयोग कीजिए। (पुस्तक के मानचित्र में नाम नहीं दिए गए हैं।)
मानचित्र के विषय में एक बात: संकेत सूची में कुंभ मेला दिया गया है, किंतु मानचित्र पर केवल दो नारंगी त्रिभुज ही स्पष्ट दिखते हैं — हरिद्वार और नासिक। प्रयागराज तथा उज्जैन में, जो पृष्ठ 176 पर कुंभ के अन्य दो नगर बताए गए हैं, केवल लाल शक्तिपीठ-त्रिभुज ही अंकित है।
स्वयं जाँचिए: पुस्तक के अंत के राजनैतिक मानचित्र से प्रत्येक संकेत का अक्षांश-देशांतर पढ़कर ही नाम बताइए — यही कौशल यह प्रश्न सिखाना चाहता है। जहाँ कोई लाल त्रिभुज ऐसे क्षेत्र में हो जिसे आप पहचान न सकें, वहाँ इतना कहना पर्याप्त है — “इस राज्य में स्थित एक शक्तिपीठ”।
मानचित्र वास्तव में क्या दिखा रहा है: नामों की सूची नहीं, अपितु एक प्रतिरूप। रेखाएँ सभी परंपराओं के स्थलों को ऐसे जालों में जोड़ती हैं, जो बार-बार एक-दूसरे को काटते हैं, और उपमहाद्वीप का कोई भाग बाहर नहीं छूटता। यही प्रतिरूप पूरे अध्याय का सार एक चित्र में है।