अन्वेषण अध्याय 8 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप ऊपर दिए गए मानचित्र में कुछ पारंपरिक तीर्थों की पहचान कर सकते हैं? आप पुस्तक के अंत में दिए गए राजनैतिक मानचित्र की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

मानचित्र पर कोई नाम अंकित नहीं है — केवल संकेत हैं, जो रेखाओं से जुड़े हैं। अत: कार्य यह है कि प्रत्येक संकेत की स्थिति को राजनैतिक मानचित्र पर मिलाकर पढ़ा जाए। संकेत सूची में आठ चिह्न हैं : अंतर्राष्ट्रीय सीमा, शक्तिपीठ (लाल त्रिभुज), ज्योतिर्लिंग (गहरे नीले त्रिभुज), चार धाम (हल्के नीले त्रिभुज), कुंभ मेला (नारंगी त्रिभुज), सिख धर्म के पावन स्थल (पीले वृत्त), बौद्ध धर्म के पावन स्थल (गुलाबी वर्ग) तथा जैन धर्म के पावन स्थल (बैंगनी चतुष्कोण)।

संकेत-दर-संकेत देखने पर ये तीर्थ विश्वासपूर्वक पहचाने जा सकते हैं :

संकेतमानचित्र पर स्थितितीर्थ
चार धामउत्तराखंड हिमालय, लगभग 30½° उ०, 79° पू०बद्रीनाथ
चार धामओडिशा तट, लगभग 20° उ०, 86° पू०पुरी
चार धामसौराष्ट्र तट, लगभग 22° उ०, 69° पू०द्वारका
चार धामदक्षिणी छोर, लगभग 9° उ०, 79° पू०रामेश्वरम (जो ज्योतिर्लिंग भी है — दोनों त्रिभुज साथ-साथ हैं)
कुंभ मेलाजहाँ गंगा पहाड़ों से मैदान में आती है, लगभग 30° उ०, 78° पू०हरिद्वार
कुंभ मेलागंगा-यमुना संगम, लगभग 25½° उ०, 82° पू०प्रयागराज
कुंभ मेलामालवा, लगभग 23° उ०, 76° पू०उज्जैन (महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भी)
कुंभ मेलाउत्तरी महाराष्ट्र, लगभग 20° उ०, 74° पू०नासिक (साथ में त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग)
ज्योतिर्लिंगउत्तराखंड की पहाड़ियों में बद्रीनाथ से थोड़ा पश्चिमकेदारनाथ
ज्योतिर्लिंगनर्मदा तट तथा पश्चिमी महाराष्ट्र का समूहओंकारेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर, औंढा नागनाथ
सिख धर्म का पावन स्थलपंजाब, लगभग 31½° उ०, 75° पू०अमृतसर (स्वर्ण मंदिर / अकाल तख्त); उसके पूर्व का चिह्न आनंदपुर साहिब
सिख धर्म का पावन स्थलमध्य गंगा मैदान, लगभग 25½° उ०, 85° पू०पटना साहिब
सिख धर्म का पावन स्थलमराठवाड़ा, लगभग 19° उ०, 77° पू०नांदेड़ (हजूर साहिब)
बौद्ध धर्म का पावन स्थलपूर्वी उत्तर प्रदेश तथा नेपाल सीमासारनाथ, कुशीनगर, लुंबिनी/कपिलवस्तु
बौद्ध धर्म का पावन स्थलबिहार, लगभग 24½° उ०, 85° पू०, तथा मध्य भारतबोधगया; मध्य प्रदेश में साँची
जैन धर्म का पावन स्थलदक्षिणी राजस्थान तथा सौराष्ट्रमाउंट आबू; गिरनार तथा शत्रुंजय (पालीताना)
जैन धर्म का पावन स्थलझारखंड, लगभग 24° उ०, 86° पू०, तथा दक्षिण कर्नाटकसम्मेद शिखर (पारसनाथ); श्रवणबेलगोला
शक्तिपीठकोलकाता, गुवाहाटी, कन्याकुमारी, काँगड़ा तथा दर्जनों अन्यकालीघाट, कामाख्या, कन्याकुमारी, ज्वालामुखी …
स्वयं जाँचिए: पुस्तक के अंत के राजनैतिक मानचित्र से प्रत्येक संकेत का अक्षांश-देशांतर पढ़कर ही नाम बताइए — यही कौशल यह प्रश्न सिखाना चाहता है। जहाँ कोई लाल त्रिभुज ऐसे क्षेत्र में हो जिसे आप पहचान न सकें, वहाँ इतना कहना पर्याप्त है — “इस राज्य में स्थित एक शक्तिपीठ”।
मानचित्र वास्तव में क्या दिखा रहा है: नामों की सूची नहीं, अपितु एक प्रतिरूप। रेखाएँ सभी परंपराओं के स्थलों को ऐसे जालों में जोड़ती हैं, जो बार-बार एक-दूसरे को काटते हैं, और उपमहाद्वीप का कोई भाग बाहर नहीं छूटता। यही प्रतिरूप पूरे अध्याय का सार एक चित्र में है।
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