दीपकम् अध्याय 1 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पर्वतराजः कः ?
उत्तर

हिमालयः। (हिन्दी — पर्वतों का राजा हिमालय है।)

आधारवाक्यम्: पाठ में आया है — “साक्षात् पर्वतराजः हिमालयः मुकुटरूपेण अस्याः मस्तके शोभते।” अर्थात् हिमालय भारतमाता के मस्तक पर मुकुट के रूप में सुशोभित होता है।
ध्यान दें: प्रश्न ‘कः’ (प्रथमा विभक्ति, पुंल्लिङ्ग, एकवचन) से पूछा गया है, इसलिए उत्तर भी प्रथमा एकवचन में — हिमालयः — ही होगा, ‘हिमालयम्’ नहीं।
प्र2.
समुद्रः कस्याः चरणौ प्रक्षालयति ?
उत्तर

भारतमातुः (चरणौ)। (हिन्दी — समुद्र भारतमाता के दोनों चरण धोता है।)

आधारवाक्यम्: “अस्याः चरणौ प्रक्षालयति स्वयं रत्नाकरः समुद्रः।” यहाँ ‘अस्याः’ का अर्थ भारतमाता का ही है।
व्याकरण-सङ्केत: ‘कस्याः’ षष्ठी विभक्ति, स्त्रीलिङ्ग, एकवचन है; अतः उत्तर भी षष्ठी एकवचन भारतमातुः होगा (मातृ-शब्द का षष्ठी एकवचन ‘मातुः’)।
प्र3.
त्रिवर्णयुतः ध्वजः कुत्र विलसति ?
उत्तर

भारतमातुः हस्ते। (हिन्दी — तिरंगा ध्वज भारतमाता के हाथ में सुशोभित होता है।)

आधारवाक्यम्:भारतमातुः हस्ते विलसति त्रिवर्णयुतः राष्ट्रध्वजः।” चित्र में भी भारतमाता के हाथ में तिरंगा दिखाया गया है।
ध्यान दें: ‘कुत्र’ स्थान पूछता है, इसलिए उत्तर सप्तमी विभक्ति में — हस्ते (अधिकरण)।
प्र4.
ध्वजस्थितः केशरवर्णः अस्मान् किं वक्तुं प्रेरयति ?
उत्तर

‘जयतु सैनिकः’ इति (वक्तुं प्रेरयति)। (हिन्दी — ध्वज में स्थित केसरिया रंग हमें ‘जयतु सैनिकः’ — सैनिक की जय हो — कहने के लिए प्रेरित करता है।)

आधारवाक्यम्: “‘जयतु सैनिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः अयं केशरवर्णः।” यह वर्ण त्यागपरम्परा तथा शौर्यपरम्परा का सूचक है और वीरों के बलिदान की याद दिलाता है।
प्र5.
कृषकबान्धवाः भारतभूमिं कैः सिञ्चन्ति ?
उत्तर

स्व-स्वेदबिन्दुभिः। (हिन्दी — किसान भाई भारतभूमि को अपने पसीने की बूँदों से सींचते हैं।)

आधारवाक्यम्: “कृषकबान्धवाः अस्माकं भारतभूमिं सर्वदा स्व-स्वेदबिन्दुभिः सिञ्चन्ति।” उन्हीं के परिश्रम से भारतभूमि हरितवर्णमयी और सस्यश्यामला बनी है।
व्याकरण-सङ्केत: ‘कैः’ तृतीया विभक्ति बहुवचन (करण) है, अतः उत्तर भी तृतीया बहुवचन — स्वेदबिन्दुभिः
प्र6.
केषां धवलं यशः राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति ?
उत्तर

वैज्ञानिकानाम् (भारतीयानां वैज्ञानिकानाम्)। (हिन्दी — भारतीय वैज्ञानिकों का उज्ज्वल यश राष्ट्रध्वज के मध्य में सुशोभित होता है।)

आधारवाक्यम्:वैज्ञानिकानां तत् धवलं यशः धवलवर्णरूपेण राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति।” अणुशास्त्र, सङ्गणकशास्त्र, चिकित्साशास्त्र, अन्तरिक्षशास्त्र तथा आयुधशास्त्र में भारतीय वैज्ञानिकों ने महान् यश पाया है।
व्याकरण-सङ्केत: ‘केषां’ षष्ठी बहुवचन है, इसलिए उत्तर वैज्ञानिकानाम् (षष्ठी बहुवचन) — ‘वैज्ञानिकैः’ नहीं।
प्र7.
सूर्यः कं विना नित्यं सञ्चरति ?
उत्तर

विरामं विना। (हिन्दी — सूर्य बिना रुके (विश्राम के बिना) प्रतिदिन चलता रहता है।)

आधारवाक्यम्: “सूर्यः विरामं विना नित्यं सञ्चरति।” धर्मचक्र का सन्देश भी यही है — कर्तव्यपथ पर बिना रुके चलते रहो।
नियम: ‘विना’ के योग में प्रायः द्वितीया विभक्ति आती है — इसीलिए ‘विरामम्’ (द्वितीया एकवचन) रूप बना है।
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