कक्षा ७ संस्कृत अध्याय 1 वन्दे भारतमातरम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः ने १८८२ तमे वर्षे ‘आनन्दमठः’ नामक उपन्यास लिखा; ‘वन्दे मातरम्’ गीत उसी उपन्यास में है। ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ है — ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ (मैं माता की वन्दना करता हूँ)। यह गीत संस्कृत तथा बाङ्गला — दोनों भाषाओं में है, और इसमें भारतमाता के स्वरूप का रमणीय वर्णन है। स्वतन्त्रता-आन्दोलन में देशभक्त इसे मन्त्र की तरह गाते थे। भारतमाता का वर्णन — पर्वतराज हिमालय उसके मस्तक पर मुकुट-रूप में शोभित है, रत्नाकर समुद्र उसके चरण धोता है, महेन्द्रगिरि–मलय–सह्य–रैवतक–विन्ध्य–अरावलि जैसे पर्वत तथा गङ्गा–यमुना–सरस्वती–सिन्धु–ब्रह्मपुत्र–गोदावरी–कृष्णा–कावेरी जैसी पवित्र नदियाँ उसकी शोभा हैं। त्रिवर्णध्वज का सन्देश — केशरवर्ण त्याग एवं शौर्य का सूचक है (‘जयतु सैनिकः’), श्वेतवर्ण शान्ति, सत्य तथा वैज्ञानिकों के धवल यश का द्योतक है (‘जयतु वैज्ञानिकः’), हरितवर्ण कृषकों के स्वेद

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दःसंस्कृतार्थःहिन्दी अर्थEnglish
वन्देप्रणामं करोमिप्रणाम करता/करती हूँI greet
आलिङ्ग्यआलिङ्गनं कृत्वाआलिंगन करकेHaving embraced
बहुत्रबहुषु स्थानेषुअनेक स्थानों परIn many places
जिज्ञासाज्ञातुम् इच्छाजानने की इच्छाCuriosity
वत्सलास्नेहयुक्तास्नेहमयीLoving
माहात्म्यम्महत्त्वम्महिमाGreatness
पर्वतराजःपर्वतानां राजापर्वतों का राजाThe king of mountains
रत्नाकरःसमुद्रःसागरSea / Ocean
तीर्थक्षेत्राणिपुण्यक्षेत्राणितीर्थस्थलHoly places
ललाटेभालेमाथे परOn the forehead
स्वेदबिन्दुभिःघर्मस्य जलकणैःपसीने की बूँदों सेBy sweat-drops
सस्यश्यामलासस्यैः घनश्यामाउपजों से हरी-भरीDensely covered with crops
धवलम्शुक्लम्श्वेतWhite
अराःचक्रस्य यष्टिकाःतीलियाँSpokes of a wheel
श्रान्तेःक्लान्तेःथकान काOf tiredness
जेतुम्विजयं प्राप्तुम्जीतने के लिएTo win
  1. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  2. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  3. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  4. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  5. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. योग्यताविस्तरः
  10. परियोजनाकार्यम्
क्या यह उपयोगी रहा?