दीपकम् अध्याय 1 वन्दे भारतमातरम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः ने १८८२ तमे वर्षे ‘आनन्दमठः’ नामक उपन्यास लिखा; ‘वन्दे मातरम्’ गीत उसी उपन्यास में है। ‘वन्दे मातरम्’ का अर्थ है — ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ (मैं माता की वन्दना करता हूँ)। यह गीत संस्कृत तथा बाङ्गला — दोनों भाषाओं में है, और इसमें भारतमाता के स्वरूप का रमणीय वर्णन है। स्वतन्त्रता-आन्दोलन में देशभक्त इसे मन्त्र की तरह गाते थे। भारतमाता का वर्णन — पर्वतराज हिमालय उसके मस्तक पर मुकुट-रूप में शोभित है, रत्नाकर समुद्र उसके चरण धोता है, महेन्द्रगिरि–मलय–सह्य–रैवतक–विन्ध्य–अरावलि जैसे पर्वत तथा गङ्गा–यमुना–सरस्वती–सिन्धु–ब्रह्मपुत्र–गोदावरी–कृष्णा–कावेरी जैसी पवित्र नदियाँ उसकी शोभा हैं। त्रिवर्णध्वज का सन्देश — केशरवर्ण त्याग एवं शौर्य का सूचक है (‘जयतु सैनिकः’), श्वेतवर्ण शान्ति, सत्य तथा वैज्ञानिकों के धवल यश का द्योतक है (‘जयतु वैज्ञानिकः’), हरितवर्ण कृषकों के स्वेद

  1. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  2. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  3. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  4. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  5. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. योग्यताविस्तरः
  10. परियोजनाकार्यम्
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