दीपकम् अध्याय 1 योग्यताविस्तरः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारतस्य राष्ट्रगानस्य ‘वन्दे मातरम्’ इत्यस्य पूर्णं मूलस्वरूपं मिलित्वा गायामः। — वन्दे मातरम् (मूलगीतम्)
उत्तर

यह गतिविधि सामूहिक गान की है — कक्षा में सब मिलकर पूरा ‘वन्दे मातरम्’ गाएँ। नीचे गीत का अर्थ दिया है, जिससे गाते समय भाव समझ में आए।

वन्दे मातरं, वन्दे मातरम्।
सुजलां सुफलां मलयज-शीतलाम्।
शस्य-श्यामलां मातरम्॥ वन्दे...॥

अन्वयः — (अहम्) सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज-शीतलाम्, शस्य-श्यामलां मातरं वन्दे।

अर्थः — सुन्दर जल से भरी हुई, उत्तम फल देने वाली, मलय-पवन से शीतल तथा फसलों से हरी-भरी माता को मैं प्रणाम करता हूँ।

भावः — कवि मातृभूमि को केवल भूमि नहीं, जीवित माता मानता है। जल, फल, शीतल पवन और हरी फसलें — ये माता के दिए हुए वरदान हैं, इसीलिए उसके प्रति कृतज्ञता ही ‘वन्दन’ है।

पद्यांशःभावार्थः (हिन्दी)
शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम् … सुखदां वरदां मातरम्॥१॥उज्ज्वल चाँदनी से पुलकित रात्रि वाली, खिले फूलों और वृक्षों के पत्तों से सुशोभित, मधुर हँसने-बोलने वाली, सुख तथा वर देने वाली माता।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कलकल-निनाद-कराले … रिपुदल-वारिणीं मातरम्॥२॥करोड़ों कण्ठों के कलकल-निनाद से भयंकर, चौदह करोड़ भुजाओं में तीखी तलवार धारण करने वाली — हे माँ, तुम्हें अबला कौन कहता है ? बहुबल धारण करने वाली, तारने वाली और शत्रुदल को रोकने वाली माता को मैं नमन करता हूँ।
तुमि विद्या, तुमि धर्म … तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे॥३॥(बाङ्गला अंश) तुम्हीं विद्या हो, तुम्हीं धर्म, तुम्हीं हृदय और तुम्हीं मर्म। शरीर में तुम्हीं प्राण हो, भुजाओं में तुम्हीं शक्ति, हृदय में तुम्हीं भक्ति हो; हम मन्दिर-मन्दिर में तुम्हारी ही प्रतिमा गढ़ते हैं।
त्वं हि दुर्गा … धरणीं भरणीं मातरम्॥४॥तुम्हीं दस अस्त्र धारण करने वाली दुर्गा हो, कमलदल में विहार करने वाली कमला (लक्ष्मी) हो, विद्या देने वाली वाणी (सरस्वती) हो। निर्मल और अतुलनीय माता को नमन। श्यामल, सरल, सुन्दर मुस्कान वाली, आभूषित, सबको धारण-भरण करने वाली माता को प्रणाम।
अलङ्कार-सङ्केत: ‘सुजलां सुफलां … शस्यश्यामलाम्’ में अनुप्रास तथा सम्पूर्ण गीत में मातृभूमि को माता के रूप में देखने से रूपक/मानवीकरण अलङ्कार है।
तथ्य-सूचना: पुस्तक में इसे ‘राष्ट्रगान’ कहा गया है; शासकीय दृष्टि से ‘वन्दे मातरम्’ भारत का राष्ट्रगीत (National Song) है और ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान (National Anthem) है। दोनों को समान सम्मान प्राप्त है — उत्तर लिखते समय यह भेद स्पष्ट रखें।
प्र2.
ब्रिटिशजनानां शासनकाले प्रमुखकार्यक्रमेषु तेषां राष्ट्रगीतं ‘गॉड सेव द क्वीन’ इति सर्वे अनिवार्यरूपेण गायन्ति स्म। तद् ज्ञात्वा बङ्किमचन्द्रवर्यः तस्य गीतस्य विकल्परूपेण भारतमातुः गौरवसूचकं ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं रचितवान्। एतद् गीतं १८८२ तमे वर्षे प्रकाशिते ‘आनन्दमठ’ इति ग्रन्थे वर्तते। तस्य प्रकाशनात् पूर्वमेव भारतीयाः ‘वन्दे मातरं’ गीतं सर्वत्र गातुम् आरब्धवन्तः। ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतेन सह एतस्य इतिहासः अपि अवश्यं सर्वैः पठनीयः।
उत्तर

सारः (संस्कृतम्) — ब्रिटिशशासनकाले सर्वे प्रमुखकार्यक्रमेषु ‘गॉड सेव द क्वीन’ इति गीतं गायन्ति स्म। तस्य विकल्परूपेण बङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं रचितवान्, यत् १८८२ तमे वर्षे प्रकाशिते ‘आनन्दमठ’ इति उपन्यासे वर्तते।

(हिन्दी — अंग्रेज़ी शासन के समय सभी बड़े कार्यक्रमों में अनिवार्य रूप से ‘गॉड सेव द क्वीन’ गाया जाता था। यह जानकर बङ्किमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने उसके विकल्प के रूप में भारतमाता के गौरव का सूचक ‘वन्दे मातरम्’ गीत रचा। यह गीत सन् १८८२ में प्रकाशित ‘आनन्दमठ’ ग्रन्थ में है। प्रकाशन से पहले ही भारतीय इसे सर्वत्र गाने लगे थे।)

तथ्यम्विवरणम्
रचयिताबङ्किमचन्द्रः चट्टोपाध्यायः
ग्रन्थः‘आनन्दमठः’ (उपन्यासः)
प्रकाशनवर्षम्१८८२ तमं वर्षम्
भाषासंस्कृतम् बाङ्गला च
विषयःभारतमातुः स्वरूपस्य रम्यं वर्णनम्
अर्थः‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’ — मैं माता की वन्दना करता हूँ
इससे क्या सीखें: ‘वन्दे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, वह परतन्त्रता के विरुद्ध एक उत्तर था। इसीलिए पाठ कहता है — “स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने सर्वे देशभक्ताः एतत् गीतं मन्त्रम् इव गायन्ति स्म।” गीत के साथ उसका इतिहास पढ़ना भी आवश्यक है, तभी उसका भाव पूरी तरह समझ में आता है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ