कक्षा ७ संस्कृत अध्याय 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का मूल वाक्य पहले पृष्ठ के संवाद में है — “अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः” । अर्थात् इस जगत् में कोई भी अयोग्य नहीं; कमी योग्यता की नहीं, प्रेरक और मार्गदर्शक की है। सुभाषितम् क्या है? — “मानवानां विविधमूल्यानां विकासाय श्रेष्ठजनैः उक्तानि सुवचनानि एव सुभाषितानि।” श्रेष्ठ जनों द्वारा कहे गए सुन्दर वचन ही सुभाषित हैं। लाभ क्या? — “सुभाषितानां पठनेन अस्माकं नैतिकः सामाजिकः च विकासः भवति।” सुभाषित बताते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। नौ सुभाषितों का सार — पञ्च वकार (वस्त्र, वपुः, वाक्, विद्या, विनय), त्याज्य षड् दोष (निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य, दीर्घसूत्रता), शुद्धि के चार साधन (जल, सत्य, विद्या-तप, ज्ञान), भारतवर्ष का भूगोल, बूँद-बूँद से घड़ा, स्वाध्याय से बुद्धि-विकास, प्रिय वचन, उद्यम, और परोपकार। व्याकरण का केन्द्र — तृतीया विभक्ति । पूरे पाठ में वस्त्रेण,

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शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दी अर्थEnglish
उत्थायउत्थानं कृत्वाखड़े होकरHaving got up
प्रेरकःप्रेरणादायकःप्रेरित करने वालाOne who inspires
वपुषाशरीरेणशरीर सेBy physique
हातव्याःत्यक्तव्याःछोड़ना चाहिएWorth discarding
भूतिम्वैभवम्ऐश्वर्यProsperity
तन्द्राअकर्मण्यताकर्महीनताLassitude
दीर्घसूत्रताविलम्बकार्यप्रवृत्तिःकाम को टालने की प्रवृत्तिProcrastination
अद्भिःजलैःजल सेBy water
भूतात्माजीवःप्राणीSoul
वर्षम्भूमेः विभागःमहाद्वीप का विभागA division of continent
सन्ततिःअपत्यम्सन्तानProgeny
निपातेनपतनेनगिरने सेBy falling
परिपृच्छतिसादरं पृच्छतिविनय से पूछता/ती हैHumbly enquires
उपाश्रयतिसमीपम् गच्छतिपास जाता/जाती हैApproaches
तुष्यन्तिसन्तोषम् अनुभवन्तिसन्तुष्ट होते हैंFeel satisfied
रिपुःशत्रुःबैरीEnemy
परपीडनम्अन्येभ्यः कष्टप्रदानम्दूसरों को पीड़ा देनाBothering others
  1. पाठ्य-प्रश्नाः (संवादः)
  2. सुभाषितानि
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  5. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  10. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  11. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  12. परियोजनाकार्यम्
  13. कार्यकलापः
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