दीपकम् अध्याय 2 नित्यं पिबामः सुभाषितरसम् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का मूल वाक्य पहले पृष्ठ के संवाद में है — “अयोग्यः पुरुषो नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः” । अर्थात् इस जगत् में कोई भी अयोग्य नहीं; कमी योग्यता की नहीं, प्रेरक और मार्गदर्शक की है। सुभाषितम् क्या है? — “मानवानां विविधमूल्यानां विकासाय श्रेष्ठजनैः उक्तानि सुवचनानि एव सुभाषितानि।” श्रेष्ठ जनों द्वारा कहे गए सुन्दर वचन ही सुभाषित हैं। लाभ क्या? — “सुभाषितानां पठनेन अस्माकं नैतिकः सामाजिकः च विकासः भवति।” सुभाषित बताते हैं कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। नौ सुभाषितों का सार — पञ्च वकार (वस्त्र, वपुः, वाक्, विद्या, विनय), त्याज्य षड् दोष (निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य, दीर्घसूत्रता), शुद्धि के चार साधन (जल, सत्य, विद्या-तप, ज्ञान), भारतवर्ष का भूगोल, बूँद-बूँद से घड़ा, स्वाध्याय से बुद्धि-विकास, प्रिय वचन, उद्यम, और परोपकार। व्याकरण का केन्द्र — तृतीया विभक्ति । पूरे पाठ में वस्त्रेण,
अभ्यास
- पाठ्य-प्रश्नाः (संवादः)
- सुभाषितानि
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- परियोजनाकार्यम्
- कार्यकलापः