दीपकम् अध्याय 2 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
नरः कतिभिः वकारैः पूजितः भवति ?
उत्तर

उत्तरम् — पञ्चभिः (वकारैः) ।

[हिन्दी — मनुष्य पाँच ‘व’कारों से पूजित होता है — वस्त्र, वपुः (शरीर), वाक्, विद्या, विनय।]

व्याकरणम्: ‘पञ्चभिः’ — तृतीया विभक्तिः, बहुवचनम् (‘पञ्चन्’ संख्यावाचक शब्द नित्यं बहुवचने)। प्रश्न ‘कतिभिः’ तृतीया में है, इसलिए उत्तर भी तृतीया में ही देना है।
प्र2.
पुरुषेण कति दोषाः हातव्याः ?
उत्तर

उत्तरम् — षड् (दोषाः) ।

[हिन्दी — मनुष्य को छह दोष छोड़ने चाहिए — निद्रा, तन्द्रा, भय, क्रोध, आलस्य और दीर्घसूत्रता।]

सङ्केतः: ‘षष्’ शब्द का प्रथमा/द्वितीया बहुवचन रूप षट् होता है; ‘दोषाः’ (घोष वर्ण) के पूर्व आने पर सन्धि से षड् दोषाः बनता है।
प्र3.
बुद्धिः केन शुध्यति ?
उत्तर

उत्तरम् — ज्ञानेन ।

[हिन्दी — बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है — ‘बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति’।]

व्याकरणम्: ‘ज्ञानेन’ — ‘ज्ञान’ (नपुंसकलिङ्ग, अकारान्त) की तृतीया विभक्ति, एकवचन। प्रश्नपद ‘केन’ भी तृतीया एकवचन है।
प्र4.
जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः कः पूर्यते ?
उत्तर

उत्तरम् — घटः ।

[हिन्दी — जल की बूँदों के गिरने से धीरे-धीरे घड़ा भर जाता है।]

व्याकरणम्: ‘घटः’ — पुंलिङ्ग, प्रथमा विभक्ति, एकवचन; कर्मवाच्य क्रिया ‘पूर्यते’ का कर्म ही यहाँ प्रथमा में आया है।
प्र5.
आलस्यं केषां महान् रिपुः अस्ति ?
उत्तर

उत्तरम् — मनुष्याणाम् ।

[हिन्दी — आलस्य मनुष्यों का बड़ा शत्रु है — और वह भी शरीर के भीतर ही बैठा हुआ (शरीरस्थः)।]

व्याकरणम्: ‘मनुष्याणाम्’ — षष्ठी विभक्ति, बहुवचन, पुंलिङ्ग। प्रश्न का ‘केषाम्’ भी षष्ठी बहुवचन है।
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