प्र1.
मातृभाषया अर्थं लिखन्तु — उत्थाय, प्रेरकः, नैतिकः, वपुषा, सम्मानम्, हातव्याः, भूतिम्, तन्द्रा, दीर्घसूत्रता, अवरोधकाः, वाञ्छति, अद्भिः, भूतात्मा, द्वन्द्वः, वर्षम्, सन्ततिः, निपातेन, हेतुः, परिपृच्छति, उपाश्रयति, सङ्गतिः, तुष्यन्ति, रिपुः, पुण्यम्, परपीडनम् ।
उत्तर
पुस्तक की तालिका के अनुसार पूरा शब्दार्थ-कोश नीचे दिया गया है। अन्तिम स्तम्भ ‘मातृभाषया अर्थं लिखन्तु’ में यदि आपकी मातृभाषा हिन्दी है तो तीसरे स्तम्भ का ही अर्थ लिखिए; अन्य मातृभाषा हो तो उसका अनुवाद लिखिए।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| उत्थाय | उत्थानं कृत्वा | खड़े होकर | Having got up |
| प्रेरकः | प्रेरणादायकः | प्रेरित करने वाला | One who inspires |
| नैतिकः | सदाचारयुक्तः | नैतिक | Moral / ethical |
| वपुषा | शरीरेण | शरीर से | By physique |
| सम्मानम् | आदरः | आदर | Respect |
| हातव्याः | त्यक्तव्याः | छोड़ना चाहिए | Worth discarding |
| भूतिम् | वैभवम् | ऐश्वर्य | Prosperity |
| तन्द्रा | अकर्मण्यता | कर्महीनता | Lassitude |
| दीर्घसूत्रता | विलम्बकार्यप्रवृत्तिः | कार्य को आगे टालने की प्रवृत्ति | Procrastination |
| अवरोधकाः | निवारकाः | रोकने वाले | Barriers |
| वाञ्छति | इच्छति | चाहता / चाहती है | Wants / Desires |
| अद्भिः | जलैः | जल से | By water |
| भूतात्मा | जीवः | प्राणी | Soul |
| द्वन्द्वः | द्वैधीभावः | दुविधा | Dilemma |
| वर्षम् | भूमेः विभागः | महाद्वीप का विभाग | A division of continent |
| सन्ततिः | अपत्यम् | सन्तान | Progeny |
| निपातेन | पतनेन | गिरने से | By falling |
| हेतुः | कारणम् | कारण | Reason |
| परिपृच्छति | सादरं पृच्छति | विनय से पूछता / ती है | Humbly enquires |
| उपाश्रयति | समीपम् गच्छति | पास जाता / जाती है | Approaches |
| सङ्गतिः | संसर्गः | संग | Association |
| तुष्यन्ति | सन्तोषम् अनुभवन्ति | सन्तुष्ट होते हैं | Feeling satisfied |
| रिपुः | शत्रुः | बैरी | Enemy |
| पुण्यम् | सत्कर्मणां फलम् | सत्कार्यों का फल | Fruits of meritorious deeds |
| परपीडनम् | अन्येभ्यः कष्टप्रदानम् | दूसरों को पीड़ा देना | Bothering others |
सङ्केतः: ‘उत्थाय’, ‘कृत्वा’ जैसे रूप ल्यप्/क्त्वा प्रत्यय वाले अव्यय हैं — इनका रूप कभी नहीं बदलता। ‘वपुषा’, ‘अद्भिः’, ‘निपातेन’ तृतीया विभक्ति के रूप हैं, जो इस पाठ का व्याकरण-केन्द्र है।