दीपकम् अध्याय 2 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
मातृभाषया अर्थं लिखन्तु — उत्थाय, प्रेरकः, नैतिकः, वपुषा, सम्मानम्, हातव्याः, भूतिम्, तन्द्रा, दीर्घसूत्रता, अवरोधकाः, वाञ्छति, अद्भिः, भूतात्मा, द्वन्द्वः, वर्षम्, सन्ततिः, निपातेन, हेतुः, परिपृच्छति, उपाश्रयति, सङ्गतिः, तुष्यन्ति, रिपुः, पुण्यम्, परपीडनम् ।
उत्तर

पुस्तक की तालिका के अनुसार पूरा शब्दार्थ-कोश नीचे दिया गया है। अन्तिम स्तम्भ ‘मातृभाषया अर्थं लिखन्तु’ में यदि आपकी मातृभाषा हिन्दी है तो तीसरे स्तम्भ का ही अर्थ लिखिए; अन्य मातृभाषा हो तो उसका अनुवाद लिखिए।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
उत्थायउत्थानं कृत्वाखड़े होकरHaving got up
प्रेरकःप्रेरणादायकःप्रेरित करने वालाOne who inspires
नैतिकःसदाचारयुक्तःनैतिकMoral / ethical
वपुषाशरीरेणशरीर सेBy physique
सम्मानम्आदरःआदरRespect
हातव्याःत्यक्तव्याःछोड़ना चाहिएWorth discarding
भूतिम्वैभवम्ऐश्वर्यProsperity
तन्द्राअकर्मण्यताकर्महीनताLassitude
दीर्घसूत्रताविलम्बकार्यप्रवृत्तिःकार्य को आगे टालने की प्रवृत्तिProcrastination
अवरोधकाःनिवारकाःरोकने वालेBarriers
वाञ्छतिइच्छतिचाहता / चाहती हैWants / Desires
अद्भिःजलैःजल सेBy water
भूतात्माजीवःप्राणीSoul
द्वन्द्वःद्वैधीभावःदुविधाDilemma
वर्षम्भूमेः विभागःमहाद्वीप का विभागA division of continent
सन्ततिःअपत्यम्सन्तानProgeny
निपातेनपतनेनगिरने सेBy falling
हेतुःकारणम्कारणReason
परिपृच्छतिसादरं पृच्छतिविनय से पूछता / ती हैHumbly enquires
उपाश्रयतिसमीपम् गच्छतिपास जाता / जाती हैApproaches
सङ्गतिःसंसर्गःसंगAssociation
तुष्यन्तिसन्तोषम् अनुभवन्तिसन्तुष्ट होते हैंFeeling satisfied
रिपुःशत्रुःबैरीEnemy
पुण्यम्सत्कर्मणां फलम्सत्कार्यों का फलFruits of meritorious deeds
परपीडनम्अन्येभ्यः कष्टप्रदानम्दूसरों को पीड़ा देनाBothering others
सङ्केतः: ‘उत्थाय’, ‘कृत्वा’ जैसे रूप ल्यप्/क्त्वा प्रत्यय वाले अव्यय हैं — इनका रूप कभी नहीं बदलता। ‘वपुषा’, ‘अद्भिः’, ‘निपातेन’ तृतीया विभक्ति के रूप हैं, जो इस पाठ का व्याकरण-केन्द्र है।
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