उत्तरम् — नरः वस्त्रेण वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च — एतैः पञ्चभिः वकारैः युक्तः सन् पूजितः भवति ।
[हिन्दी — मनुष्य वस्त्र, शरीर, वाणी, विद्या और विनय — इन पाँच ‘व’कारों से युक्त होकर पूजित (आदरणीय) होता है।]
अद्यतन2026-09-05
उत्तरम् — नरः वस्त्रेण वपुषा वाचा विद्यया विनयेन च — एतैः पञ्चभिः वकारैः युक्तः सन् पूजितः भवति ।
[हिन्दी — मनुष्य वस्त्र, शरीर, वाणी, विद्या और विनय — इन पाँच ‘व’कारों से युक्त होकर पूजित (आदरणीय) होता है।]
उत्तरम् — भूतिम् इच्छता पुरुषेण निद्रा, तन्द्रा, भयम्, क्रोधः, आलस्यं, दीर्घसूत्रता च — एते षड् दोषाः हातव्याः ।
[हिन्दी — ऐश्वर्य चाहने वाले मनुष्य को छह दोष छोड़ देने चाहिए — अधिक नींद, ऊँघ/अकर्मण्यता, भय, क्रोध, आलस्य और काम को टालने की आदत।]
उत्तरम् — यः पठति, लिखति, पश्यति, परिपृच्छति, पण्डितान् उपाश्रयति च — तस्य बुद्धिः दिवाकरकिरणैः नलिनीदलम् इव विस्तारिता भवति ।
[हिन्दी — जो पढ़ता है, लिखता है, देखता है, आदर से पूछता है और विद्वानों के समीप रहता है — उसकी बुद्धि सूर्य की किरणों से खिले कमल-दल की तरह विकसित हो जाती है।]
उत्तरम् — उद्यमं कृत्वा मनुष्यः न अवसीदति ।
[हिन्दी — परिश्रम करके मनुष्य कभी दुःखी/हताश नहीं होता। इसीलिए कहा गया — ‘नास्त्युद्यमसमो बन्धुः’ अर्थात् उद्यम के समान कोई मित्र नहीं।]
उत्तरम् — ‘परोपकारः पुण्याय पापाय परपीडनम्’ इति व्यासस्य वचनद्वयम् ।
[हिन्दी — ‘परोपकार पुण्य के लिए है और दूसरों को पीड़ा देना पाप के लिए’ — यही अठारह पुराणों में कहा गया व्यास जी का दो-वाक्यों वाला सार है।]