प्र1.
उदाहरणानुसारं श्लोकांशान् यथोचितं योजयन्तु — (क) विद्यया वपुषा वाचा वस्त्रेण विनयेन च। (ख) षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता। (ग) अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति। (घ) उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। (ङ) जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। — [निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता॥ / वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः॥ / वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ / स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥ / विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति॥]
उत्तर
पुस्तक में (क) का मिलान उदाहरण-रूप में पहले से जुड़ा हुआ है। शेष चारों का सही मेल नीचे है —
| क्रमः | प्रथमः श्लोकांशः | यथोचितः द्वितीयः श्लोकांशः | श्लोक-सं. |
|---|---|---|---|
| (क) | विद्यया वपुषा वाचा वस्त्रेण विनयेन च। | वकारैः पञ्चभिर्युक्तो नरो भवति पूजितः॥ | १ |
| (ख) | षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता। | निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता॥ | २ |
| (ग) | अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति। | विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति॥ | ३ |
| (घ) | उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। | वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥ | ४ |
| (ङ) | जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः। | स हेतुः सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च॥ | ५ |
मिलान की कुंजी: हर पंक्ति में एक ‘सङ्केत-शब्द’ है जो जोड़ी बता देता है —
(ख) में ‘षड् दोषाः’ कहा गया, तो दूसरी पंक्ति में उन छहों के नाम गिनाए गए हैं।
(ग) में गात्र और मन की शुद्धि है, तो आगे भूतात्मा और बुद्धि की शुद्धि आती है।
(घ) में ‘उत्तरं यत्’ के ‘यत्’ का जोड़ीदार ‘तद्’ अगली पंक्ति में है।
(ङ) में ‘घटः’ के लिए ‘सः’ सर्वनाम अगली पंक्ति में आया है।
(ख) में ‘षड् दोषाः’ कहा गया, तो दूसरी पंक्ति में उन छहों के नाम गिनाए गए हैं।
(ग) में गात्र और मन की शुद्धि है, तो आगे भूतात्मा और बुद्धि की शुद्धि आती है।
(घ) में ‘उत्तरं यत्’ के ‘यत्’ का जोड़ीदार ‘तद्’ अगली पंक्ति में है।
(ङ) में ‘घटः’ के लिए ‘सः’ सर्वनाम अगली पंक्ति में आया है।