कक्षा ७ संस्कृत अध्याय 3 मित्राय नमः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ की कथा — योगिता प्रतिदिन प्रातः पिता के साथ उद्यान जाती है और वहाँ भ्रमण करती है, जबकि बहुत-से लोग वहाँ व्यायाम और योगासन करते हैं। यह सुनकर सब मित्र उत्साह से योगशिक्षिका (आचार्या) के पास जाते हैं और सूर्यनमस्कार सीखने की इच्छा प्रकट करते हैं। सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति — सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है। हर आसन से पहले एक मन्त्र बोला जाता है; उनमें पहला मन्त्र है ‘ॐ मित्राय नमः’ और सबके अन्त में ‘ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः’ । सूर्य के बारह नाम — मित्रः, रविः, सूर्यः, भानुः, खगः, पूषा, हिरण्यगर्भः, मरीचिः, आदित्यः, सविता, अर्कः, भास्करः। मन्त्र में ये सब चतुर्थी विभक्ति में आते हैं — मित्राय, रवये, सूर्याय, भानवे, खगाय, पूष्णे, हिरण्यगर्भाय, मरीचये, आदित्याय, सवित्रे, अर्काय, भास्कराय। दो व्याकरण-नियम (अत्र इदम् अवधेयम्) — (1) ‘नमः’ शब्दस्य योगे चतुर्थी विभक्तिः भ
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्दः (प्रातिपदिकम्) | व्याकरण-परिचयः | चतुर्थी — एकवचनम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|
| मित्र | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | मित्राय | सूर्य (सबका मित्र); सखा |
| रवि | इकारान्तः, पुंलिङ्गः | रवये | सूर्य |
| भानु | उकारान्तः, पुंलिङ्गः | भानवे | सूर्य (प्रकाशवान्) |
| पूषन् | नकारान्तः, पुंलिङ्गः | पूष्णे | सूर्य (पोषण करने वाला) |
| मरीचि | इकारान्तः, पुंलिङ्गः | मरीचये | सूर्य (किरणों वाला) |
| सवितृ | ऋकारान्तः, पुंलिङ्गः | सवित्रे | सूर्य (प्रेरक) |
| आचार्या | आकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | आचार्यायै | अध्यापिका, गुरु |
| भगिनी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | भगिन्यै | बहन |
| पितामही | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | पितामह्यै | दादी |
| आसन | अकारान्तः, नपुंसकलिङ्गः | आसनाय | आसन |
| प्रज्ञा | आकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | प्रज्ञायै | मेधा, बुद्धि |
| तेजस् | सकारान्तः, नपुंसकलिङ्गः | तेजसे | दीप्ति, कान्ति |
अभ्यास
- पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- परियोजनाकार्यम्